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पुलिस की चूक ने फिर कराया बवाल
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Sat, 06 May 2017 12:56 AM IST
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बवाल में हुआ पथराव और मौके पर ग्रामीण।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर में अभी सड़क दूधली कांड की आग से झुलसा सहारनपुर राहत भी नहीं ले पाया कि शब्बीरपुर में हुए जातीय संघर्ष ने सहारनपुर को एक बार फिर से दहका दिया। शब्बीरपुर में भी पुलिस की चूक सामने आई।
यहां पहले से ही जातीय तनाव बना हुआ था, फिर भी पुलिस गंभीरता को नहीं भांप सकी और संवेदनशीलता नहीं दिखाई। जिसका परिणाम गांव को भुगतना पड़ा।
महाराणा प्रताप जयंती के उपलक्ष्य में ग्राम शिमलाना में कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम के आयोजन की अनुमति ग्राम शिमलाना निवासी सतीश कुमार पुत्र महिपाल सिंह ने ली थी।
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हालांकि अनुमति सिर्फ बैठक कर विचार विमर्श करने की ली गई थी। लेकिन इस कार्यक्रम में आने वाले अतिथियों की जानकारी पुलिस के पास थी। आसपास के अधिकांश क्षत्रिय बहुल गांव है।
कार्यक्रम में क्षत्रिय समाज के महत्वपूर्ण अतिथियों के आने के चलते पुलिस को इतना तो भान होगा ही कि महाराणा प्रताप की जयंती कार्यक्रम में लोग जुलूस और शोभायात्रा निकालेंगे।
शोभायात्रा की सूचना भी पुलिस को दी गई थी और पुलिस को गांव शब्बीरपुर में पहले से ही तनाव की जानकारी थी। लेकिन पुलिस ने न तो शोभायात्रा का रास्ता ही बदलवाया और न ही गांव में ठोस सुरक्षा व्यवस्था की।
पुलिस की लापरवाही सिर्फ यहीं तक नहीं हुई, पथराव के बाद मची भगदड़ से क्षत्रिय समाज के युवक गांव से बाहर भाग गए थे। तब तक पुलिस भी पहुंच गई थी। लेकिन दूसरे गांव से आने वाले लोगों को पुलिस ने कहीं पर भी नहीं रोका, भीड़ बढ़ती गई और पुलिस के सामने ही लोग हमलावर हो गए।
फिर तो पुलिस सिर्फ मूकदर्शक ही बनकर रह गई। उपद्रवियों ने गांव में जमकर मनमानी की। एक ओर से खुलेआम तमंचे, कट्टे लेकर फायरिंग की जाती रही, दूसरी ओर से आगजनी, तोड़फोड़ और मारकाट मचती रही।
पुलिस दूर खड़ी सिर्फ तमाशा देखती रही। पुलिस दूसरी बार गांव में जाने से लोगों को रोक देती तो इतना बड़ा बवाल नहीं होता। यही नहीं पुलिस को भी जमकर गालियां दी गईं, पथराव किया गया। लेकिन पुलिस सिर्फ बचती नजर आई।
यहां तक कि आक्रोशित लोगों ने घायलों को लेने जा रही एंबुलेंस और आग बुझाने जा रही फायर ब्रिगेड को भी गांव में नहीं घुसने दिया और पुलिस कुछ नहीं कर सकी। एंबुलेंस चालक तो एंबुलेंस छोड़कर भाग गए।
एसएसपी सुभाष चंद दुबे गांव में पहुंचे, लेकिन वहां लोगों के तेवर और आक्रोश देखकर वह भी लोगों को समझाते रहे, लेकिन आक्रोशित युवाओं ने उनकी एक नही सुनीं और जमकर मनमानी की।
एसएसपी सुभाष चंद्र दुबे का कहना है कि शब्बीरपुर में हुई घटना गंभीर है। इस मामले में गंभीरता से जांच की जाएगी। दंगाइयों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। जल्दी ही सभी की गिरफ्तारी होगी।
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यहां पहले से ही जातीय तनाव बना हुआ था, फिर भी पुलिस गंभीरता को नहीं भांप सकी और संवेदनशीलता नहीं दिखाई। जिसका परिणाम गांव को भुगतना पड़ा।
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महाराणा प्रताप जयंती के उपलक्ष्य में ग्राम शिमलाना में कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम के आयोजन की अनुमति ग्राम शिमलाना निवासी सतीश कुमार पुत्र महिपाल सिंह ने ली थी।
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हालांकि अनुमति सिर्फ बैठक कर विचार विमर्श करने की ली गई थी। लेकिन इस कार्यक्रम में आने वाले अतिथियों की जानकारी पुलिस के पास थी। आसपास के अधिकांश क्षत्रिय बहुल गांव है।
कार्यक्रम में क्षत्रिय समाज के महत्वपूर्ण अतिथियों के आने के चलते पुलिस को इतना तो भान होगा ही कि महाराणा प्रताप की जयंती कार्यक्रम में लोग जुलूस और शोभायात्रा निकालेंगे।
शोभायात्रा की सूचना भी पुलिस को दी गई थी और पुलिस को गांव शब्बीरपुर में पहले से ही तनाव की जानकारी थी। लेकिन पुलिस ने न तो शोभायात्रा का रास्ता ही बदलवाया और न ही गांव में ठोस सुरक्षा व्यवस्था की।
पुलिस की लापरवाही सिर्फ यहीं तक नहीं हुई, पथराव के बाद मची भगदड़ से क्षत्रिय समाज के युवक गांव से बाहर भाग गए थे। तब तक पुलिस भी पहुंच गई थी। लेकिन दूसरे गांव से आने वाले लोगों को पुलिस ने कहीं पर भी नहीं रोका, भीड़ बढ़ती गई और पुलिस के सामने ही लोग हमलावर हो गए।
फिर तो पुलिस सिर्फ मूकदर्शक ही बनकर रह गई। उपद्रवियों ने गांव में जमकर मनमानी की। एक ओर से खुलेआम तमंचे, कट्टे लेकर फायरिंग की जाती रही, दूसरी ओर से आगजनी, तोड़फोड़ और मारकाट मचती रही।
पुलिस दूर खड़ी सिर्फ तमाशा देखती रही। पुलिस दूसरी बार गांव में जाने से लोगों को रोक देती तो इतना बड़ा बवाल नहीं होता। यही नहीं पुलिस को भी जमकर गालियां दी गईं, पथराव किया गया। लेकिन पुलिस सिर्फ बचती नजर आई।
यहां तक कि आक्रोशित लोगों ने घायलों को लेने जा रही एंबुलेंस और आग बुझाने जा रही फायर ब्रिगेड को भी गांव में नहीं घुसने दिया और पुलिस कुछ नहीं कर सकी। एंबुलेंस चालक तो एंबुलेंस छोड़कर भाग गए।
एसएसपी सुभाष चंद दुबे गांव में पहुंचे, लेकिन वहां लोगों के तेवर और आक्रोश देखकर वह भी लोगों को समझाते रहे, लेकिन आक्रोशित युवाओं ने उनकी एक नही सुनीं और जमकर मनमानी की।
एसएसपी सुभाष चंद्र दुबे का कहना है कि शब्बीरपुर में हुई घटना गंभीर है। इस मामले में गंभीरता से जांच की जाएगी। दंगाइयों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। जल्दी ही सभी की गिरफ्तारी होगी।