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किशोर कारागार में रहेगा बड़ा डॉन
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Thu, 03 Mar 2016 01:23 AM IST
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एमएलसी चुनाव में वाराणसी से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपनी किस्मत आजमा रहे माफिया पूर्वांचल के डॉन बृजेश सिंह को शासन के आदेश पर बुधवार को शाहजहांपुर जेल से सहारनपुर कारागार में शिफ्ट करा दिया गया है।
सुबह करीब ग्यारह बजे कड़ी सुरक्षा में जेल प्रशासन की ओर से उसे यहां किशोर कारागार में भेजा गया। बड़ी कारागार में पहले ही एक हजार से अधिक कैदियों की भीड़ और उनकी सुरक्षा की दृष्टि से जेल प्रशासन ने छोटी जेल में ही बड़े डॉन को भेजने में भलाई समझी।
एमएलसी चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर वाराणसी से माफिया डान बृजेश सिंह के चुनाव लड़ने से सूबे की सपा सरकार की भौहें उसकी तरफ तन गई।
कारागार निदेशालय डीएस चौहान के दिशा निर्देशों पर शाहजहांपुर कारागार से शिफ्ट करने संबंधी वारंट को यहां दाखिल कराने के बाद बृजेश सिंह को जब कारागार में रखने की तैयारी की जाने लगी, तो बड़ी जेल में कैदियों की अधिक संख्या और उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बराबर की किशोर कारागार में ही भेजा गया।
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जेल से जुड़े सूत्रों के मुताबिक इस शिफ्टिंग के समय बृजेश सिंह से जुड़े कुछ प्राइवेट सुरक्षाकर्मी भी साथ पहुंचे हैं, जो उसके यहां रहने तक इधर उधर सक्रिय रहेंगे।
जेल तो छोटी चलेगी, मगर कुछ व्यवस्थाएं तो कीजिए
जेल से जुड़े सूत्रों ने बताया कि बृजेश सिंह को किशोर कारागार में शिफ्ट करने के बाद उसने यहां रहने की व्यवस्थाओं के बारे में पूछा। यह भी कहा कि छोटी जेल तो चल जाएगी।
मगर, उठने बैठने का कुछ इंतजाम तो किया जाए। पता चला है कि बृजेश सिंह के लिए सामान्य कैदियों से कुछ अलग इंतजाम कराए जा रहे हैं। किशोर कारागार में बंदियों की संख्या लगभग 60 है, जबकि बड़ी जेल में यह संख्या 1000 से भी ऊपर है।
तीन चरणों की जांच के बाद दिया जाएगा भोजन
कोर्ट के आदेश पर बृजेश सिंह को दिया जाने वाला खाना घर के सदस्य या कोई परिचित बाहर से ला सकता है। हालांकि यह खाना देने से पहले तीन चरणों में सघन सत्यापन किया जाएगा।
सबसे पहले तो खाना लाने के लिए आने वाले का पहचान पत्र देखा जाएगा। इसके बाद यह आईडी बृजेश सिंह तक पहुंचाई जाएगी। बृजेश सिंह यदि आईडी को हरी झंडी देगा, तभी केयर टेकर का खाना उस तक पहुंचाया जाएगा।
छोटी जेल पर अब रहेगा पहरा ः जेल प्रशासन कैदियों पर निगरानी और कड़ी सुरक्षा को लेकर बड़ी जेल को लेकर ही अधिक गंभीर रहा है। किशोर कारागार पर इसके मुकाबले कम ध्यान दिया जाता रहा है।
हालांकि डॉन बृजेश सिंह के शिफ्ट होने के बाद किशोर कारागार में भी दिन और रात के समय अतिरिक्त बंदीरक्षकों और बाहरी सुरक्षा जवानों की तैनाती की गई है।
जेल प्रशासन के लिए गले की फांस बना स्थानांतरण
वाराणसी के सेंट्रल जेल से शाहजहांपुर और वहां से यहां सहारनपुर कारागार स्थानांतरित किए गए बृजेश सिंह की शिफ्टिंग का मामला जेल प्रशासन के लिए गले की फांस बन गया है।
अफसर मानते हैं कि यहां की जेल में ऐसे डॉन जैसे कैदी की सुरक्षा के लिए न तो पर्याप्त सुरक्षा जवान है और न ही बड़ा निगरानी तंत्र। एमएलसी चुनाव को लेकर सियासी चुनौती के बीच जेल प्रशासन को सत्ता का दबाव भी झेलना पड़ रहा है।
अंदरुनी तौर पर तो जेल के अफसर और बंदीरक्षक तक यही कह रहे हैं कि यह डॉन जितना जल्द यहां से वापस चला जाए बेहतर है। अन्यथा जरा सी चूक बड़ा पंगा करा देगी।
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सुबह करीब ग्यारह बजे कड़ी सुरक्षा में जेल प्रशासन की ओर से उसे यहां किशोर कारागार में भेजा गया। बड़ी कारागार में पहले ही एक हजार से अधिक कैदियों की भीड़ और उनकी सुरक्षा की दृष्टि से जेल प्रशासन ने छोटी जेल में ही बड़े डॉन को भेजने में भलाई समझी।
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एमएलसी चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर वाराणसी से माफिया डान बृजेश सिंह के चुनाव लड़ने से सूबे की सपा सरकार की भौहें उसकी तरफ तन गई।
कारागार निदेशालय डीएस चौहान के दिशा निर्देशों पर शाहजहांपुर कारागार से शिफ्ट करने संबंधी वारंट को यहां दाखिल कराने के बाद बृजेश सिंह को जब कारागार में रखने की तैयारी की जाने लगी, तो बड़ी जेल में कैदियों की अधिक संख्या और उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बराबर की किशोर कारागार में ही भेजा गया।
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जेल से जुड़े सूत्रों के मुताबिक इस शिफ्टिंग के समय बृजेश सिंह से जुड़े कुछ प्राइवेट सुरक्षाकर्मी भी साथ पहुंचे हैं, जो उसके यहां रहने तक इधर उधर सक्रिय रहेंगे।
जेल तो छोटी चलेगी, मगर कुछ व्यवस्थाएं तो कीजिए
जेल से जुड़े सूत्रों ने बताया कि बृजेश सिंह को किशोर कारागार में शिफ्ट करने के बाद उसने यहां रहने की व्यवस्थाओं के बारे में पूछा। यह भी कहा कि छोटी जेल तो चल जाएगी।
मगर, उठने बैठने का कुछ इंतजाम तो किया जाए। पता चला है कि बृजेश सिंह के लिए सामान्य कैदियों से कुछ अलग इंतजाम कराए जा रहे हैं। किशोर कारागार में बंदियों की संख्या लगभग 60 है, जबकि बड़ी जेल में यह संख्या 1000 से भी ऊपर है।
तीन चरणों की जांच के बाद दिया जाएगा भोजन
कोर्ट के आदेश पर बृजेश सिंह को दिया जाने वाला खाना घर के सदस्य या कोई परिचित बाहर से ला सकता है। हालांकि यह खाना देने से पहले तीन चरणों में सघन सत्यापन किया जाएगा।
सबसे पहले तो खाना लाने के लिए आने वाले का पहचान पत्र देखा जाएगा। इसके बाद यह आईडी बृजेश सिंह तक पहुंचाई जाएगी। बृजेश सिंह यदि आईडी को हरी झंडी देगा, तभी केयर टेकर का खाना उस तक पहुंचाया जाएगा।
छोटी जेल पर अब रहेगा पहरा ः जेल प्रशासन कैदियों पर निगरानी और कड़ी सुरक्षा को लेकर बड़ी जेल को लेकर ही अधिक गंभीर रहा है। किशोर कारागार पर इसके मुकाबले कम ध्यान दिया जाता रहा है।
हालांकि डॉन बृजेश सिंह के शिफ्ट होने के बाद किशोर कारागार में भी दिन और रात के समय अतिरिक्त बंदीरक्षकों और बाहरी सुरक्षा जवानों की तैनाती की गई है।
जेल प्रशासन के लिए गले की फांस बना स्थानांतरण
वाराणसी के सेंट्रल जेल से शाहजहांपुर और वहां से यहां सहारनपुर कारागार स्थानांतरित किए गए बृजेश सिंह की शिफ्टिंग का मामला जेल प्रशासन के लिए गले की फांस बन गया है।
अफसर मानते हैं कि यहां की जेल में ऐसे डॉन जैसे कैदी की सुरक्षा के लिए न तो पर्याप्त सुरक्षा जवान है और न ही बड़ा निगरानी तंत्र। एमएलसी चुनाव को लेकर सियासी चुनौती के बीच जेल प्रशासन को सत्ता का दबाव भी झेलना पड़ रहा है।
अंदरुनी तौर पर तो जेल के अफसर और बंदीरक्षक तक यही कह रहे हैं कि यह डॉन जितना जल्द यहां से वापस चला जाए बेहतर है। अन्यथा जरा सी चूक बड़ा पंगा करा देगी।