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पिता को बचाने के लिए जान पर खेली बेटी, दो गोली लगी
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Mon, 10 Jul 2017 12:12 AM IST
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अस्पताल में घायल बेटी।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर के बेहट में पत्नी की मौत और तंगहाली के कारण तनाव में चल रहे एक व्यक्ति ने खुद को गोली मार ली। उससे तमंचा छीनने के प्रयास में उसकी बेटी को भी गोली लग गई।
दोनों को गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां से पिता को हायर सेंटर भेजा गया है। घटना के समय पिता को बचाने के लिए बेटी जान पर खेल गई और दो गोलियां उसे ही लगीं।
कोतवाली बेहट क्षेत्र के बाबैल बुजुर्ग गांव निवासी जंगशेर उर्फ पप्पू (45) दोपहर करीब एक बजे अपने घर पहुंचा। घर पर उसकी बेटी रजनी (22) थी। अचानक ही उसने तमंचा उठाया और उसमें कारतूस भरकर खुद को गोली मारने चाही।
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लेकिन गोली चलने से पहले रजनी की निगाह जंगशेर पर पड़ गई। उसने जंगशेर से तमंचा छीनने का प्रयास किया। इस दौरान गोली चल गई और रजनी की बांह में लग गई।
इस पर जंगशेर ने दूसरा कारतूस तमंचे में डाला। लेकिन रजनी फिर से तमंचा छीनने लगी। इस बार गोली चली तो रजनी की टांग पर लग गई और वह नीचे गिर गई। बेटी के बेबस होने पर जंगशेर ने तीसरा कारतूस तमंचे में भरा और अपने आप को गोली मार ली।
करीब एक घंटे तक दोनों बंद मकान में लहूलुहान हालत में पड़े रहे। तीन बजे जंगशेर का बेटा हनी घर पहुंचा तो अंदर से दरवाजा बंद होने पर किसी तरह गेट खोला। अंदर बहन और पिता को लहूलुहान हालत में पड़े देख उसके होश उड़ गए।
उसने तुरंत पड़ोसियों की मदद से दोनों को जिला अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया। जंगशेर को प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर हालत के चलते हायर सेंटर रेफर किया गया।
बताया गया है कि चार साल पहले जंगशेर की पत्नी रीना की बीमारी के चलते मौत हो गई थी। पत्नी की बीमारी में अधिक खर्च होने जाने पर जंगशेर आर्थिक तंगी से भी जूझ रहा था, जिससे वह तनाव में था।
इस मामले में कोतवाली प्रभारी वेदप्रकाश गिरि का कहना है कि अभी तहरीर नहीं आई है। लेकिन जानकारी मिली है कि जंगशेर मानसिक तनाव में था। इसलिए यह कदम उठाया है।
पिता को आत्महत्या से रोकने के लिए तमंचा छीनने के दौरान पहली गोली रजनी की बांह पर लगी, लेकिन उसे हिम्मत नहीं हारी। जब जंगशेर ने दूसरी गोली तमंचे में लोड की और खुद को मारनी चाही तब भी रजनी अपनी जान पर खेल गई और तमंचा पकड़कर छीनना चाहा।
दूसरी गोली टांग में लगने पर वह नीचे गिरने के बाद बेबस हो गई। बेटी के लाचार होने पर ही जंगशेर ने खुद को गोली मारी।
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दोनों को गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां से पिता को हायर सेंटर भेजा गया है। घटना के समय पिता को बचाने के लिए बेटी जान पर खेल गई और दो गोलियां उसे ही लगीं।
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कोतवाली बेहट क्षेत्र के बाबैल बुजुर्ग गांव निवासी जंगशेर उर्फ पप्पू (45) दोपहर करीब एक बजे अपने घर पहुंचा। घर पर उसकी बेटी रजनी (22) थी। अचानक ही उसने तमंचा उठाया और उसमें कारतूस भरकर खुद को गोली मारने चाही।
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लेकिन गोली चलने से पहले रजनी की निगाह जंगशेर पर पड़ गई। उसने जंगशेर से तमंचा छीनने का प्रयास किया। इस दौरान गोली चल गई और रजनी की बांह में लग गई।
इस पर जंगशेर ने दूसरा कारतूस तमंचे में डाला। लेकिन रजनी फिर से तमंचा छीनने लगी। इस बार गोली चली तो रजनी की टांग पर लग गई और वह नीचे गिर गई। बेटी के बेबस होने पर जंगशेर ने तीसरा कारतूस तमंचे में भरा और अपने आप को गोली मार ली।
करीब एक घंटे तक दोनों बंद मकान में लहूलुहान हालत में पड़े रहे। तीन बजे जंगशेर का बेटा हनी घर पहुंचा तो अंदर से दरवाजा बंद होने पर किसी तरह गेट खोला। अंदर बहन और पिता को लहूलुहान हालत में पड़े देख उसके होश उड़ गए।
उसने तुरंत पड़ोसियों की मदद से दोनों को जिला अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया। जंगशेर को प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर हालत के चलते हायर सेंटर रेफर किया गया।
बताया गया है कि चार साल पहले जंगशेर की पत्नी रीना की बीमारी के चलते मौत हो गई थी। पत्नी की बीमारी में अधिक खर्च होने जाने पर जंगशेर आर्थिक तंगी से भी जूझ रहा था, जिससे वह तनाव में था।
इस मामले में कोतवाली प्रभारी वेदप्रकाश गिरि का कहना है कि अभी तहरीर नहीं आई है। लेकिन जानकारी मिली है कि जंगशेर मानसिक तनाव में था। इसलिए यह कदम उठाया है।
पिता को आत्महत्या से रोकने के लिए तमंचा छीनने के दौरान पहली गोली रजनी की बांह पर लगी, लेकिन उसे हिम्मत नहीं हारी। जब जंगशेर ने दूसरी गोली तमंचे में लोड की और खुद को मारनी चाही तब भी रजनी अपनी जान पर खेल गई और तमंचा पकड़कर छीनना चाहा।
दूसरी गोली टांग में लगने पर वह नीचे गिरने के बाद बेबस हो गई। बेटी के लाचार होने पर ही जंगशेर ने खुद को गोली मारी।