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जिला जेल में कैंची, ब्लेड, लाइटर मिले
Updated Fri, 27 Jul 2018 12:32 AM IST
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जिला जेल में कैंची, ब्लेड, लाइटर मिले
सहारनपुर। जिलाधिकारी अलोक कुमार पांडेय और एसएसपी उपेंद्र कुमार अग्रवाल ने बृहस्पतिवार को पुलिस और प्रशासनिक अमले के साथ जिला कारागार छापा मारा। एक साथ सभी बैरकों में तलाशी ली गई। इस दौरान एक किताब मिली, जिसमें मोबाइल रखने के लिए खांचा बना हुआ था। अफसरों को यहां कैंचियां, ब्लेड, माचिस, लाइटर एवं हजारों रुपये की नगदी बरामद हुई।
बृहस्पतिवार को जिलाधिकारी आलोक कुमार पांडेय एवं एसएसपी उपेंद्र कुमार अग्रवाल ने अपनी टीमों के साथ जिला कारागार में छापा मारा। इसके लिए पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त रूप से पांच टीमें बनाई गईं। पांच टीमों ने एक साथ बैरकों में छापामारी की। इससे जेल प्रशासन में एक बार फिर हड़कंप मच गया। टीमों ने सभी 10 बैरकों में एक साथ तलाशी शुरू कर दी। एक टीम को दो बैरकें दी गईं।
टीमों ने तलाशी ली तो एक के बाद एक करके कई आपत्तिजनक वस्तुएं मिलती चली गईं। इसमें कैंची, ब्लेड, माचिस एवं लाइटर शामिल हैं। इसके अलावा बैरक नंबर नौ से टीम को एक किताब मिली। किताब देखने में बाहर से सामान्य लग रही थी। लेकिन टीम ने जब उसे खोलकर देखा तो हैरान रह गए। उस किताब को बीच से काटकर मोबाइल रखने का खांचा बना रखा था। हालांकि तलाशी में टीमों को कहीं भी मोबाइल बरामद नहीं हुआ। लेकिन आशंका जताई गई कि मोबाइल का जेल में प्रयोग होता रहा है। इस किताब में छिपाकर मोबाइल रखा जाता रहा है। इसके अलावा बंदियों से हजारों रुपये की नगदी भी बरामद की गई है। जिसे बंदियों के खातों में ही जमा करा दिया गया है।
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उधर, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक उपेंद्र कुमार अग्रवाल ने बताया कि जेल की बैरक से जो किताब मिली है उसमें मोबाइल छुपाने की जगह बनी हुई है। जिससे यह साफ हो रहा है कि जेल में मोबाइल का उपयोग होता रहा है। फिलहाल जेल से कोई मोबाइल बरामद नहीं हुआ है।
--
-- जमीन में दबाकर रखी गई थी धारदार सामग्री
छापामार टीमों को सामान्य तौर पर तो बैरकों में कुछ नहीं मिल सका। लेकिन जब जमीन को कुरेद कर देखा गया तो जमीन से कुछ ब्लेड एवं कैंचियां बरामद हुईं। बंदियों ने जमीन में दबाकर कैंचियां एवं ब्लेड रखे थे।
जेल को पूरी तरह घेरकर की छानबीन
डीएम और एसएसपी ने छापामार कार्रवाई पूरी तैयारी के साथ की। पुलिस और प्रशासनिक अमले को साथ लिया। डीएम, एसएसपी के अलावा एडीएम प्रशासन एसके दुबे, एसपी सिटी प्रबल प्रताप सिंह, चार एसडीएम, चार सीओ, 10 थानाध्यक्ष, एक महिला थानाध्यक्ष, 22 उप निरीक्षक, 100 सिपाही, दो कंपनी पीएसी शामिल रही। इतने बड़े अमले के साथ छापा मारा और सभी बैरकों की एक साथ तलाशी ली गई।
....तो क्या रावण चला रहा था जेल में मोबाइल
पुलिस एवं प्रशासनिक टीमों ने छापामारी के दौरान बैरक नंबर नौ से मोबाइल रखने वाली किताब बरामद की है। इस बैरक में भीम आर्मी चीफ एवं सहारनपुर हिंसा के आरोपी चंद्रशेखर उर्फ रावण भी रहा है। हालांकि इसमें मोबाइल बरामद नहीं हो सका। अधिकारियों का मानना है कि जेल में मोबाइल चलता रहा है। इस किताब में मोबाइल को छुपाकर रखा गया। हालांकि एसपी सिटी प्रबल प्रताप का कहना है कि रावण को अब बैरक नंबर नौ ए में है।
डीआईजी जेल ने मारा था दो बार छापा
बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद जेलों में एक के बाद एक अधिकारी छापा मार कार्रवाई कर रहे हैं। मंगलवार की रात साढ़े 11 बजे आगरा डीआईजी जेल संजीव त्रिपाठी ने छापा मारा। उसके बाद बुधवार को सुबह 10 बजे फिर से छापा मारा और ढाई घंटे तक जेल की तलाशी कराई थी। लेकिन जेल से कोई खास संदिग्ध वस्तु नहीं मिल सकी थी।
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सहारनपुर। जिलाधिकारी अलोक कुमार पांडेय और एसएसपी उपेंद्र कुमार अग्रवाल ने बृहस्पतिवार को पुलिस और प्रशासनिक अमले के साथ जिला कारागार छापा मारा। एक साथ सभी बैरकों में तलाशी ली गई। इस दौरान एक किताब मिली, जिसमें मोबाइल रखने के लिए खांचा बना हुआ था। अफसरों को यहां कैंचियां, ब्लेड, माचिस, लाइटर एवं हजारों रुपये की नगदी बरामद हुई।
बृहस्पतिवार को जिलाधिकारी आलोक कुमार पांडेय एवं एसएसपी उपेंद्र कुमार अग्रवाल ने अपनी टीमों के साथ जिला कारागार में छापा मारा। इसके लिए पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त रूप से पांच टीमें बनाई गईं। पांच टीमों ने एक साथ बैरकों में छापामारी की। इससे जेल प्रशासन में एक बार फिर हड़कंप मच गया। टीमों ने सभी 10 बैरकों में एक साथ तलाशी शुरू कर दी। एक टीम को दो बैरकें दी गईं।
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टीमों ने तलाशी ली तो एक के बाद एक करके कई आपत्तिजनक वस्तुएं मिलती चली गईं। इसमें कैंची, ब्लेड, माचिस एवं लाइटर शामिल हैं। इसके अलावा बैरक नंबर नौ से टीम को एक किताब मिली। किताब देखने में बाहर से सामान्य लग रही थी। लेकिन टीम ने जब उसे खोलकर देखा तो हैरान रह गए। उस किताब को बीच से काटकर मोबाइल रखने का खांचा बना रखा था। हालांकि तलाशी में टीमों को कहीं भी मोबाइल बरामद नहीं हुआ। लेकिन आशंका जताई गई कि मोबाइल का जेल में प्रयोग होता रहा है। इस किताब में छिपाकर मोबाइल रखा जाता रहा है। इसके अलावा बंदियों से हजारों रुपये की नगदी भी बरामद की गई है। जिसे बंदियों के खातों में ही जमा करा दिया गया है।
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उधर, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक उपेंद्र कुमार अग्रवाल ने बताया कि जेल की बैरक से जो किताब मिली है उसमें मोबाइल छुपाने की जगह बनी हुई है। जिससे यह साफ हो रहा है कि जेल में मोबाइल का उपयोग होता रहा है। फिलहाल जेल से कोई मोबाइल बरामद नहीं हुआ है।
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-- जमीन में दबाकर रखी गई थी धारदार सामग्री
छापामार टीमों को सामान्य तौर पर तो बैरकों में कुछ नहीं मिल सका। लेकिन जब जमीन को कुरेद कर देखा गया तो जमीन से कुछ ब्लेड एवं कैंचियां बरामद हुईं। बंदियों ने जमीन में दबाकर कैंचियां एवं ब्लेड रखे थे।
जेल को पूरी तरह घेरकर की छानबीन
डीएम और एसएसपी ने छापामार कार्रवाई पूरी तैयारी के साथ की। पुलिस और प्रशासनिक अमले को साथ लिया। डीएम, एसएसपी के अलावा एडीएम प्रशासन एसके दुबे, एसपी सिटी प्रबल प्रताप सिंह, चार एसडीएम, चार सीओ, 10 थानाध्यक्ष, एक महिला थानाध्यक्ष, 22 उप निरीक्षक, 100 सिपाही, दो कंपनी पीएसी शामिल रही। इतने बड़े अमले के साथ छापा मारा और सभी बैरकों की एक साथ तलाशी ली गई।
....तो क्या रावण चला रहा था जेल में मोबाइल
पुलिस एवं प्रशासनिक टीमों ने छापामारी के दौरान बैरक नंबर नौ से मोबाइल रखने वाली किताब बरामद की है। इस बैरक में भीम आर्मी चीफ एवं सहारनपुर हिंसा के आरोपी चंद्रशेखर उर्फ रावण भी रहा है। हालांकि इसमें मोबाइल बरामद नहीं हो सका। अधिकारियों का मानना है कि जेल में मोबाइल चलता रहा है। इस किताब में मोबाइल को छुपाकर रखा गया। हालांकि एसपी सिटी प्रबल प्रताप का कहना है कि रावण को अब बैरक नंबर नौ ए में है।
डीआईजी जेल ने मारा था दो बार छापा
बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद जेलों में एक के बाद एक अधिकारी छापा मार कार्रवाई कर रहे हैं। मंगलवार की रात साढ़े 11 बजे आगरा डीआईजी जेल संजीव त्रिपाठी ने छापा मारा। उसके बाद बुधवार को सुबह 10 बजे फिर से छापा मारा और ढाई घंटे तक जेल की तलाशी कराई थी। लेकिन जेल से कोई खास संदिग्ध वस्तु नहीं मिल सकी थी।