{"_id":"5a887d754f1c1ba0268baaca","slug":"21518894453-saharanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हत्या के मामले में तीन को आजीवन कारावास","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
हत्या के मामले में तीन को आजीवन कारावास
Updated Sun, 18 Feb 2018 12:37 AM IST
विज्ञापन
हत्या के मामले में तीन को आजीवन कारावास
सहारनपुर। देहात कोतवाली के गांव सैयद माजरा में लगभग आठ साल पूर्व हुई शिक्षक अजीत पाल की हत्या के मामले में कोर्ट ने तीन लोगों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है जबकि एक आरोपी की मुकदमे के दौरान ही मौत हो गई थी। तीनों पर चार-चार हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
सैयद माजरा निवासी शिक्षक अजीत पाल सिंह की 31 मई 2010 को धारदार हथियारों से हमला कर हत्या कर दी गई थी। उसका शव एक जून को नगला के पास से बरामद हुआ था। पिता भगवत सिंह ने ग्राम संदलहेड़ी निवासी श्रीपाल, नेपाल, रविंद्र और ग्राम दतौली मुगल निवासी उम्मेद अली पर हत्या का आरोप लगाते हुए देहात कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था।
भगवत सिंह ने आरोप लगाया कि श्रीपाल ने अपने साथियों के साथ गांव की एक युवती का अपहरण करने का प्रयास किया था जिन्हें पकड़कर पुलिस को सौंप दिया गया था। तभी से आरोपी रंजिश रख रहे थे और कई बार हत्या की धमकी भी दी थी। इसी रंजिश में 31 मई को अजीत पाल गांव महीपुरा में एक मिस्त्री की दुकान पर बैठा था। उसी समय आरोपी उसके पास आए और बात करने के बहाने बुलाकर ले गए। बाद में धारदार हथियारों से उसकी हत्या कर दी।
विज्ञापन
इस मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश मुकेश कुमार सिंघल की अदालत में चल रही थी। सहायक शासकीय अधिवक्ता ठाकुर जयवीर सिंह पुंडीर ने बताया कि लगभग आठ साल तक चले मुकदमे के दौरान एक आरोपी श्रीपाल की मौत हो गई थी। बाकी तीन आरोपियों को कोर्ट ने अजीत पाल की हत्या के मामले में दोषी माना और उन्हें तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुना दी। तीनों पर चार-चार हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
विज्ञापन
सहारनपुर। देहात कोतवाली के गांव सैयद माजरा में लगभग आठ साल पूर्व हुई शिक्षक अजीत पाल की हत्या के मामले में कोर्ट ने तीन लोगों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है जबकि एक आरोपी की मुकदमे के दौरान ही मौत हो गई थी। तीनों पर चार-चार हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
सैयद माजरा निवासी शिक्षक अजीत पाल सिंह की 31 मई 2010 को धारदार हथियारों से हमला कर हत्या कर दी गई थी। उसका शव एक जून को नगला के पास से बरामद हुआ था। पिता भगवत सिंह ने ग्राम संदलहेड़ी निवासी श्रीपाल, नेपाल, रविंद्र और ग्राम दतौली मुगल निवासी उम्मेद अली पर हत्या का आरोप लगाते हुए देहात कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था।
विज्ञापन
भगवत सिंह ने आरोप लगाया कि श्रीपाल ने अपने साथियों के साथ गांव की एक युवती का अपहरण करने का प्रयास किया था जिन्हें पकड़कर पुलिस को सौंप दिया गया था। तभी से आरोपी रंजिश रख रहे थे और कई बार हत्या की धमकी भी दी थी। इसी रंजिश में 31 मई को अजीत पाल गांव महीपुरा में एक मिस्त्री की दुकान पर बैठा था। उसी समय आरोपी उसके पास आए और बात करने के बहाने बुलाकर ले गए। बाद में धारदार हथियारों से उसकी हत्या कर दी।
विज्ञापन
इस मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश मुकेश कुमार सिंघल की अदालत में चल रही थी। सहायक शासकीय अधिवक्ता ठाकुर जयवीर सिंह पुंडीर ने बताया कि लगभग आठ साल तक चले मुकदमे के दौरान एक आरोपी श्रीपाल की मौत हो गई थी। बाकी तीन आरोपियों को कोर्ट ने अजीत पाल की हत्या के मामले में दोषी माना और उन्हें तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुना दी। तीनों पर चार-चार हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।