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हिंसा के आरोपियों पर कार्रवाई में बैकफुट पर प्रशासन
Updated Thu, 06 Jul 2017 12:20 AM IST
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हिंसा के आरोपियों पर कार्रवाई में बैकफुट पर प्रशासन
सहारनपुर। जिले में एक के बाद एक करके हुई हिंसा ने जिले की साख को तो बट्टा लगाया ही, विकास के मामले में सहारनपुर को पीछे धकेल दिया। इसके बावजूद पुलिस और प्रशासन हिंसा के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय बैकफुट पर आ चुका है। पिछले 20 दिन से एक भी आरोपी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। किसी के खिलाफ वारंट तक नहीं करा पाए अधिकारी।
जिले में अप्रैल से ही बवाल शुरू हो गया। पहले सड़क दूधली, फिर शब्बीरपुर, उसके बाद सहारनपुर में तथा चंदपुर में जमकर हिंसा हुई। 5 मई, 9 मई, 23 मई तथा 24 मई को हुई हिंसाओं में तीन युवक हिंसा की भेेंट चढ़ गए। इस जातीय बवाल ने पूरे देश को हिला डाला। जिले की साख तो खराब हुई ही, विकास के मामले में भी जिले पीछे रह गया। अधिकारी बवाल को शांत करने में लगे रहे और जिला स्मार्ट सिटी की दौड़ में कोसों पीछे रह गया। कई पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी इन बवालों के जाल में उलझकर कार्रवाई के शिकार हो गए।
पुलिस ने पहले तो जोर-शोर से कार्रवाई शुरू की, लेकिन जैसे-जैसे धमकियां मिलती चली गईं, कार्रवाई करने से पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी कदम पीछे खींचते गए। चंद्रशेखर की गिरफ्तारी तो कर ली, लेकिन उसके बाद दिल्ली में भीम आर्मी के प्रदर्शन और चेतावनी ने पुलिस अधिकारियों को बैकफुट पर ला दिया। भीम आर्मी के इनामी राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय रतन सिंह और प्रवक्ता मंजीत सिंह को पकड़ना तो दूर उनके वारंट तक जारी नहीं करा सकी। चंद्रशेखर की मां आमरण अनशन की चेतावनी दे चुकी है। जिससे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों में खलबली मची हुई है। फिलहाल अधिकारियों के आश्वासन पर अनशन स्थगित कर दिया गया है, लेकिन मांग चंद्रशेखर को जेल से बाहर कराने की हो रही है। सड़क दूधली के आरोपियों के मामले में तो पुलिस की जमकर छीछालेदार हो रही है। आरोपी ही नहीं गैर जमानती वारंटी भी पुलिस के सामने बार-बार आ रहे हैं, लेकिन पुलिस की हिम्मत उन्हें गिरफ्तार करने की नहीं हो पा रही।
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छोड़े गए निर्दोषों ने ही पुलिस पर एफआईआर की दाखिल की अपील
सहारनपुर। पुलिस ने लिए निर्दोषों को पकड़ना भारी पड़ गया। जेल से रिहा कराए गए निर्दोषों ने जेल से बाहर आते ही पुलिस अधिकारियों पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए एफआईआर कराने के लिए अपील दाखिल कर दी। इससे पुलिस की मुसीबत और भी बढ़ गई है। अब पुलिस ने निर्दोषों की जांच ही करानी बंद कर दी है।
--। कोई भी दोषी कार्रवाई से बच नहीं सकता
पुलिस अधीक्षक देहात विद्यासागर मिश्र का कहना है कि बवाल के जो भी आरोपी हैं उन पर कार्रवाई होना निश्चित है। कोई भी व्यक्ति कार्रवाई से बच नहीं सकता। जो निर्दोष हैं, उनके नाम निकाले जाने की जांच चल रही है। कुछ निर्दोषों के नाम और भी सामने आ सकते हैं।
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सहारनपुर। जिले में एक के बाद एक करके हुई हिंसा ने जिले की साख को तो बट्टा लगाया ही, विकास के मामले में सहारनपुर को पीछे धकेल दिया। इसके बावजूद पुलिस और प्रशासन हिंसा के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय बैकफुट पर आ चुका है। पिछले 20 दिन से एक भी आरोपी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। किसी के खिलाफ वारंट तक नहीं करा पाए अधिकारी।
जिले में अप्रैल से ही बवाल शुरू हो गया। पहले सड़क दूधली, फिर शब्बीरपुर, उसके बाद सहारनपुर में तथा चंदपुर में जमकर हिंसा हुई। 5 मई, 9 मई, 23 मई तथा 24 मई को हुई हिंसाओं में तीन युवक हिंसा की भेेंट चढ़ गए। इस जातीय बवाल ने पूरे देश को हिला डाला। जिले की साख तो खराब हुई ही, विकास के मामले में भी जिले पीछे रह गया। अधिकारी बवाल को शांत करने में लगे रहे और जिला स्मार्ट सिटी की दौड़ में कोसों पीछे रह गया। कई पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी इन बवालों के जाल में उलझकर कार्रवाई के शिकार हो गए।
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पुलिस ने पहले तो जोर-शोर से कार्रवाई शुरू की, लेकिन जैसे-जैसे धमकियां मिलती चली गईं, कार्रवाई करने से पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी कदम पीछे खींचते गए। चंद्रशेखर की गिरफ्तारी तो कर ली, लेकिन उसके बाद दिल्ली में भीम आर्मी के प्रदर्शन और चेतावनी ने पुलिस अधिकारियों को बैकफुट पर ला दिया। भीम आर्मी के इनामी राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय रतन सिंह और प्रवक्ता मंजीत सिंह को पकड़ना तो दूर उनके वारंट तक जारी नहीं करा सकी। चंद्रशेखर की मां आमरण अनशन की चेतावनी दे चुकी है। जिससे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों में खलबली मची हुई है। फिलहाल अधिकारियों के आश्वासन पर अनशन स्थगित कर दिया गया है, लेकिन मांग चंद्रशेखर को जेल से बाहर कराने की हो रही है। सड़क दूधली के आरोपियों के मामले में तो पुलिस की जमकर छीछालेदार हो रही है। आरोपी ही नहीं गैर जमानती वारंटी भी पुलिस के सामने बार-बार आ रहे हैं, लेकिन पुलिस की हिम्मत उन्हें गिरफ्तार करने की नहीं हो पा रही।
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छोड़े गए निर्दोषों ने ही पुलिस पर एफआईआर की दाखिल की अपील
सहारनपुर। पुलिस ने लिए निर्दोषों को पकड़ना भारी पड़ गया। जेल से रिहा कराए गए निर्दोषों ने जेल से बाहर आते ही पुलिस अधिकारियों पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए एफआईआर कराने के लिए अपील दाखिल कर दी। इससे पुलिस की मुसीबत और भी बढ़ गई है। अब पुलिस ने निर्दोषों की जांच ही करानी बंद कर दी है।
--। कोई भी दोषी कार्रवाई से बच नहीं सकता
पुलिस अधीक्षक देहात विद्यासागर मिश्र का कहना है कि बवाल के जो भी आरोपी हैं उन पर कार्रवाई होना निश्चित है। कोई भी व्यक्ति कार्रवाई से बच नहीं सकता। जो निर्दोष हैं, उनके नाम निकाले जाने की जांच चल रही है। कुछ निर्दोषों के नाम और भी सामने आ सकते हैं।
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