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Saharanpur News: बांग्लादेशी नागरिक की गिरफ्तारी में कोर्ट ने दिए अग्रिम जांच के आदेश
Mon, 15 Dec 2025 12:34 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Mon, 15 Dec 2025 12:34 AM IST
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देवबंद। भारत में अवैध रूप से रहकर दारुल उलूम पढ़ाई कर रहे बांग्लादेशी छात्र और उसके साथियों के मामले में जांच से असंतुष्ट एसीजेएम परिवंद्र सिंह की अदालत ने विवेचक को कड़ी फटकार लगाई। साथ ही अदालत ने पुलिस को मुकदमे की अग्रिम विवेचना के आदेश दिए हैं।
मामले के अनुसार, पुलिस ने अप्रैल 2022 को अवैध रूप से फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर दारुल उलूम के अरबी के छात्र फारुक को गिरफ्तार किया था। छात्र ने खुद को मेघालय भारत का नागरिक बताया था और उसके पास भारत का आधार कार्ड व पैन कार्ड भी था। हालांकि तलाशी लेने पर उसके पास से बांग्लादेशी पासपोर्ट की फोटो स्टेट, बांग्लादेशी मुद्रा व मोबाइल बरामद हुआ था।
इसमें लगी लगी चिप में देशविरोधी गतिविधियों के साहित्य मिले थे। सख्ती से पूछताछ में फारुक ने स्वीकार किया था कि वह बांग्लादेश के थाना दारुद कुंदी, डिविजन चटोग्राम जिला कुमिल्ला का निवासी है। दारुल उलूम में पढाई के लिए फर्जी तरीके से भारत में दाखिल हुआ था।
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वर्ष 2017 में उसने तहसील के सामने स्थित दुकान से फर्जी आधार कार्ड व पैन कार्ड बनाया था। उसने यह भी बताया कि उसके दो साथी सलाउद्दीन सालिम व इफ्तेकार-उल-हक भी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दारुल उलूम में पढ़ते हैं।
मामले पुलिस ने फारुक, सलाउद्दीन सालिम, इफ्तेकार-उल-हक, तहसील गेट के सामने अज्ञात दुकानदार व रशीदिया मस्जिद के पास टोपी की दुकान चलाने वाले व्यक्ति के खिलाफ धारा 420,467,468,471 व 14बी विदेशी अधिनियम की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की थी। विवेचना उस समय कोतवाली में तैनात इंस्पेक्टर सिराजुद्दीन ने की थी।
मुख्य अभियुक्त फारुक भोपाल केंद्रीय कारागार में निरुद्ध है और भोपाल की स्पेशल कोर्ट में अभियुक्त है, जिसमें उसके बांग्लादेशी आतंकी संगठन जेएमबी का सक्रिय सदस्य होने, मुस्लिम युवाओं को जिहाद के नाम पर आतंकी संगठन में शामिल करने व उनसे भारत के विभिन्न राज्यों में आतंकी घटनाएं करने के लिए प्रेरित करने के पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध है।
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मामले के अनुसार, पुलिस ने अप्रैल 2022 को अवैध रूप से फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर दारुल उलूम के अरबी के छात्र फारुक को गिरफ्तार किया था। छात्र ने खुद को मेघालय भारत का नागरिक बताया था और उसके पास भारत का आधार कार्ड व पैन कार्ड भी था। हालांकि तलाशी लेने पर उसके पास से बांग्लादेशी पासपोर्ट की फोटो स्टेट, बांग्लादेशी मुद्रा व मोबाइल बरामद हुआ था।
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इसमें लगी लगी चिप में देशविरोधी गतिविधियों के साहित्य मिले थे। सख्ती से पूछताछ में फारुक ने स्वीकार किया था कि वह बांग्लादेश के थाना दारुद कुंदी, डिविजन चटोग्राम जिला कुमिल्ला का निवासी है। दारुल उलूम में पढाई के लिए फर्जी तरीके से भारत में दाखिल हुआ था।
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वर्ष 2017 में उसने तहसील के सामने स्थित दुकान से फर्जी आधार कार्ड व पैन कार्ड बनाया था। उसने यह भी बताया कि उसके दो साथी सलाउद्दीन सालिम व इफ्तेकार-उल-हक भी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दारुल उलूम में पढ़ते हैं।
मामले पुलिस ने फारुक, सलाउद्दीन सालिम, इफ्तेकार-उल-हक, तहसील गेट के सामने अज्ञात दुकानदार व रशीदिया मस्जिद के पास टोपी की दुकान चलाने वाले व्यक्ति के खिलाफ धारा 420,467,468,471 व 14बी विदेशी अधिनियम की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की थी। विवेचना उस समय कोतवाली में तैनात इंस्पेक्टर सिराजुद्दीन ने की थी।
मुख्य अभियुक्त फारुक भोपाल केंद्रीय कारागार में निरुद्ध है और भोपाल की स्पेशल कोर्ट में अभियुक्त है, जिसमें उसके बांग्लादेशी आतंकी संगठन जेएमबी का सक्रिय सदस्य होने, मुस्लिम युवाओं को जिहाद के नाम पर आतंकी संगठन में शामिल करने व उनसे भारत के विभिन्न राज्यों में आतंकी घटनाएं करने के लिए प्रेरित करने के पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध है।