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Saharanpur News: दंपती ने टिकट लिया था, परिचालक ने की अभद्रता...आयोग ने लगाया जुर्माना

Fri, 25 Sep 2026 02:01 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 25 Sep 2026 02:01 AM IST
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Couple bought tickets, conductor behaved rudely... Commission imposed a fine.
मुजफ्फरनगर। करीब 11 साल पहले मुजफ्फरनगर डिपो की बस में टिकट लेकर सवार हुए दंपती के साथ बदसलूकी और सेवा में कमी के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एआरएम और परिचालक पर संयुक्त रूप से 15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। धनराशि चुकाने के लिए दो माह का समय दिया गया।
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पुरकाजी के मोहल्ला मेन बाजार निवासी सराफ अनमोल जैन अपनी पत्नी प्रियंका जैन के साथ दो जून 2015 को वहलना मंदिर में गए थे। सुबह-सुबह 10 बजकर 23 मिनट पर रोडवेज बस स्टैंड से वह पुरकाजी के लिए रोडवेज बस में सवार होने लगे।
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आरोप लगाया गया था कि परिचालक प्रदीप चौधरी ने कस्बे के अंदर से बस ले जाने से इन्कार कर दिया। साथ ही अशालीन व्यवहार किया गया। सराफ ने प्रकरण में मानसिक और शारीरिक क्षतिपूर्ति समेत कुल 1.30 लाख का दावा किया था।
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बृहस्पतिवार को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष सतीश कुमार और सदस्य मनीष कुमार ने सुनवाई करते हुए परिवादी एआरएम और परिचालक पर संयुक्त रूप से 15 हजार का जुर्माना लगाया है। अधिवक्ता मनमोहन वर्मा ने बताया कि दो माह में जुर्माना अदा करने के आदेश दिए गए हैं।
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शिकायतें, नोटिस...देरी से दिया गया जवाब
मुजफ्फरनगर। पीड़ित ने अपने साथ हुए व्यवहार की शिकायत उसी दिन मोबाइल पर एआरएम से की। अगले दिन डाक से प्रकरण लिखकर भेजा गया। परिचालक के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने पर 18 जून को नोटिस भेजा गया लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद परिवाद दायर किया गया। आयोग ने 23 अगस्त 2018 को विपक्षी के साक्ष्य का अवसर समाप्त कर दिया था। ब्यूरो
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देर से ही सही इन्साफ तो मिली : जैन
सराफ अनमोल जैन ने बताया कि वह टिकट लेकर बस में सवार हुए थे लेकिन इसके बावजूद परिचालक ने अभद्रता की। बस के चालक व अन्य यात्रियों ने हस्तक्षेप किया था। अपशब्दों का प्रयोग करते हुए दुर्व्यवहार किया गया था। देर से ही सही उन्हें इन्साफ मिला है।
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डिपो से निकाला जा चुका परिचालक प्रकरण में विपक्षी बनाए गए परिचालक प्रदीप चौधरी को पांच साल पहले ही विभाग ने निकाल दिया था। अन्य किसी मामले में आरोप साबित होने पर सेवा समाप्त कर दी गई थी।

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आयोग ने यह दिया है आदेश
परिवादी दंपती ने मानसिक व शारीरिक क्षति के रूप में 50-50 हजार मय 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दिलाए जाने की बात कही। आयोग में इस धनराशि का कोई युक्ति-युक्त आधार नहीं बताया है। इसी वजह से मानसिक क्षति के रूप में पांच-पांच हजार रुपये का आदेश दिया गया। वाद व्यय की धनराशि 20 हजार रुपये मांगी गई थी, जिसे पांच हजार रुपये स्वीकार किया गया है। आर्थिक क्षति के रूप में 10 हजार रुपये मय 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज मांगा गया था लेकिन परिवादी ने कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया, जिस कारण धनराशि नहीं दी गई।
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