{"_id":"65cbac76730d2b6c640ab9c1","slug":"corporations-cow-shed-is-becoming-an-example-other-bodies-are-learning-from-it-saharanpur-news-c-30-1-smrt1053-118222-2024-02-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Saharanpur News: नजीर बन रही निगम की गोशाला, अन्य निकाय भी ले रहे सीख","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Saharanpur News: नजीर बन रही निगम की गोशाला, अन्य निकाय भी ले रहे सीख
Tue, 13 Feb 2024 11:23 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Tue, 13 Feb 2024 11:23 PM IST
विज्ञापन
नगर निगम की गोशाला में गोबर से राखी बनाते कर्मचारी।
सहारनपुर। नगर निगम की मां शाकुंभरी कान्हा उपवन गोशाला अन्य निकायों के लिए नजीर बन रही है। उत्तर प्रदेश ही नहीं, अन्य राज्यों के निकाय भी नगर निगम की गोशाला से सीख लेकर अपने यहां लागू कर रहे हैं। हाल ही में रोहतक नगर निगम की टीम ने कान्हा उपवन गोशाला का भ्रमण करने के बाद कुछ चीजें अपनी गोशाला में लागू की हैं। अन्य निकायों से भी समय-समय पर टीम आती रही हैं।
नवादा रोड स्थित गोशाला की स्थापना 2019 में हुई थी। गोशाला प्रभारी डॉ. संदीप कुमार मिश्र ने बताया कि शुरूआत में गोशाला में करीब 150 गोवंश थे, लेकिन आज यहां 546 गोवंश हैं। गोवंश की बढ़ती संख्या को देखते हुए गोशाला का विस्तार किया गया है। 546 गोवंश में 13 गाय दुधारू हैं, जबकि 15 गर्भवती हैं। शेष बछड़े और अन्य गोवंश है। प्रत्येक गोवंश का प्रतिदिन का चारे आदि का खर्च 50 रुपये है। इस प्रकार प्रतिदिन करीब 27,000 रुपये गोवंश के पालन पोषण पर खर्च होते हैं। साथ ही नगर निगम गोशाला को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रहा है। यहां अनेक तरह के उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, जिनसे मासिक आय एक लाख रुपये तक हो रही है।
- यह उत्पाद हो रहे तैयार
गोशाला में गोमूत्र से फिनाइल तैयार करने के साथ ही गोअर्क भी बनाया जा रहा है। गोकाष्ठ का कार्य चल रहा है, जिसमें गोबर से भगवान गणेश सहित अनेक देवी देवताओं की मूर्तियां, अन्य प्रकार की कलाकृतियां, दीये, वर्मी कंपोस्ट, खाद, राखियां, ओम, स्वास्तिक आदि उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।
विज्ञापन
- कर्नाटक और तेलंगाना से आई मांग
गोशाला में बन रहे उत्पाद ऑनलाइन भी उपलब्ध हैं। अमेजन पर खाद, फिनाइल, दीये आदि सामान बेचे जा रहे हैं। बीते दिनों कर्नाटक और तेलंगाना से भी कुछ मांग आई थी। कर्नाटक में कई प्रकार के उत्पाद भेजे गए हैं। गोशाला की ख्याति के चलते बीते माह दिल्ली में हुए एक्सपो में पूरे प्रदेश से केवल सहारनपुर ने प्रतिभाग किया। वहां देश भर से आए अन्य निकायों ने भी सहारनपुर की गोशाला के बारे में जाना।
- गोशाला को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास हैं। गोवंश के बेहतर पालन पोषण के लिए अच्छी गुणवत्ता का चारा देने के साथ ही गर्मी से बचाने के लिए पंखे और सर्दी से बचाने के लिए हीटर की व्यवस्था है। गोशाला में बन रहे उत्पाद की मांग है। अन्य निकाय सहारनपुर की गोशाला से सीख ले रहे हैं। - बीके सिंह, वरिष्ठ प्रभारी गोशाला/मुख्य अभियंता निर्माण।
विज्ञापन
नवादा रोड स्थित गोशाला की स्थापना 2019 में हुई थी। गोशाला प्रभारी डॉ. संदीप कुमार मिश्र ने बताया कि शुरूआत में गोशाला में करीब 150 गोवंश थे, लेकिन आज यहां 546 गोवंश हैं। गोवंश की बढ़ती संख्या को देखते हुए गोशाला का विस्तार किया गया है। 546 गोवंश में 13 गाय दुधारू हैं, जबकि 15 गर्भवती हैं। शेष बछड़े और अन्य गोवंश है। प्रत्येक गोवंश का प्रतिदिन का चारे आदि का खर्च 50 रुपये है। इस प्रकार प्रतिदिन करीब 27,000 रुपये गोवंश के पालन पोषण पर खर्च होते हैं। साथ ही नगर निगम गोशाला को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रहा है। यहां अनेक तरह के उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, जिनसे मासिक आय एक लाख रुपये तक हो रही है।
विज्ञापन
- यह उत्पाद हो रहे तैयार
गोशाला में गोमूत्र से फिनाइल तैयार करने के साथ ही गोअर्क भी बनाया जा रहा है। गोकाष्ठ का कार्य चल रहा है, जिसमें गोबर से भगवान गणेश सहित अनेक देवी देवताओं की मूर्तियां, अन्य प्रकार की कलाकृतियां, दीये, वर्मी कंपोस्ट, खाद, राखियां, ओम, स्वास्तिक आदि उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।
विज्ञापन
- कर्नाटक और तेलंगाना से आई मांग
गोशाला में बन रहे उत्पाद ऑनलाइन भी उपलब्ध हैं। अमेजन पर खाद, फिनाइल, दीये आदि सामान बेचे जा रहे हैं। बीते दिनों कर्नाटक और तेलंगाना से भी कुछ मांग आई थी। कर्नाटक में कई प्रकार के उत्पाद भेजे गए हैं। गोशाला की ख्याति के चलते बीते माह दिल्ली में हुए एक्सपो में पूरे प्रदेश से केवल सहारनपुर ने प्रतिभाग किया। वहां देश भर से आए अन्य निकायों ने भी सहारनपुर की गोशाला के बारे में जाना।
- गोशाला को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास हैं। गोवंश के बेहतर पालन पोषण के लिए अच्छी गुणवत्ता का चारा देने के साथ ही गर्मी से बचाने के लिए पंखे और सर्दी से बचाने के लिए हीटर की व्यवस्था है। गोशाला में बन रहे उत्पाद की मांग है। अन्य निकाय सहारनपुर की गोशाला से सीख ले रहे हैं। - बीके सिंह, वरिष्ठ प्रभारी गोशाला/मुख्य अभियंता निर्माण।

नगर निगम की गोशाला में गोबर से राखी बनाते कर्मचारी।