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गोल्डन कार्ड पर निजी अस्पतालों में कोरोना का इलाज नहीं
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जगदीप कुमार
सहारनपुर। आयुष्मान भारत योजना और मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान के गोल्डन कार्ड धारकों को कोरोना संक्रमित होने पर निजी अस्पतालों में इलाज नहीं मिल पा रहा है। इसकी प्रमुख वजह निजी कोविड अस्पतालों में कोविड मरीजों के इलाज का शुल्क कार्ड धारकों के लिए निर्धारित शुल्क से चार गुना अधिक होना है।
गोल्डन कार्ड धारकों के लिए यह व्यवस्था है कि यदि उन्हें कोई ऐसी बीमारी है, जिसके इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती होना जरूरी है तो वह गोल्डन कार्ड लेकर सीधे योजना से संबद्ध निजी अस्पताल में जाकर इलाज पा सकते हैं। मगर कोरोना संक्रमित होने पर ऐसा नहीं है। कोरोना संक्रमण गंभीर होने के बाद भी उन्हें सरकारी अस्पताल ही जाना होगा। यदि सरकारी अस्पताल में बेड नहीं है या जो जरूरी सुविधाएं मरीज को चाहिए वह नहीं हैं तो सरकारी अस्पताल ही मरीज को रेफर कर सकता है। यही वजह है कि दूसरी लहर में एक भी गोल्डन कार्ड धारक कोरोना मरीज ने निजी कोविड अस्पताल में योजना के तहत इलाज नहीं लिया है।
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गोल्डन कार्ड धारकों के लिए निर्धारित इलाज शुल्क
-- जनरल वार्ड प्रतिदिन 1800 रुपये
--एचडीयू (हाई डेफिनेशन यूनिट) प्रतिदिन 2700 रुपये
-- आईसीयू प्रतिदिन 3600 रुपये
-- वेंटिलेटर के साथ आईसीयू 4500 रुपये
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कोविड मरीजों के लिए निजी अस्पताल में निर्धारित शुल्क
-- आइसोलेशन वार्ड प्रतिदिन 6400 रुपये
-- आईसीयू प्रतिदिन 10400 रुपये
-- वेंटिलेटर के साथ आईसीयू प्रतिदिन 12000 रुपये
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आयुष्मान भारत योजना एवं मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान
लाभार्थी परिवारों की संख्या -- 137110
लाभार्थी व्यक्तियों की संख्या --- 685000 से अधिक
अनुबंधित चिकित्सालय 45, जिनमें 24 राजकीय और 21 निजी अस्पताल शामिल हैं।
--- वर्जन
यदि आयुष्मान भारत योजना और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना का कोई पात्र व्यक्ति कोरोना संक्रमित होता है तो वह सीधे निजी कोविड अस्पताल में इलाज नहीं करा सकता। उसे सरकारी कोविड अस्पताल में भर्ती होना होगा। यदि बेड और जरूरी सुविधाएं नहीं होंगी तो ही उसे रेफर किया जा सकता है। वैसे जिले के सरकारी कोविड अस्पतालों में तमाम सुविधाएं हैं।
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डॉ. सुशील गुप्ता, जिला कार्यक्रम संयोजक, आयुष्मान भारत योजना।
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सहारनपुर। आयुष्मान भारत योजना और मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान के गोल्डन कार्ड धारकों को कोरोना संक्रमित होने पर निजी अस्पतालों में इलाज नहीं मिल पा रहा है। इसकी प्रमुख वजह निजी कोविड अस्पतालों में कोविड मरीजों के इलाज का शुल्क कार्ड धारकों के लिए निर्धारित शुल्क से चार गुना अधिक होना है।
गोल्डन कार्ड धारकों के लिए यह व्यवस्था है कि यदि उन्हें कोई ऐसी बीमारी है, जिसके इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती होना जरूरी है तो वह गोल्डन कार्ड लेकर सीधे योजना से संबद्ध निजी अस्पताल में जाकर इलाज पा सकते हैं। मगर कोरोना संक्रमित होने पर ऐसा नहीं है। कोरोना संक्रमण गंभीर होने के बाद भी उन्हें सरकारी अस्पताल ही जाना होगा। यदि सरकारी अस्पताल में बेड नहीं है या जो जरूरी सुविधाएं मरीज को चाहिए वह नहीं हैं तो सरकारी अस्पताल ही मरीज को रेफर कर सकता है। यही वजह है कि दूसरी लहर में एक भी गोल्डन कार्ड धारक कोरोना मरीज ने निजी कोविड अस्पताल में योजना के तहत इलाज नहीं लिया है।
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गोल्डन कार्ड धारकों के लिए निर्धारित इलाज शुल्क
-- जनरल वार्ड प्रतिदिन 1800 रुपये
--एचडीयू (हाई डेफिनेशन यूनिट) प्रतिदिन 2700 रुपये
-- आईसीयू प्रतिदिन 3600 रुपये
-- वेंटिलेटर के साथ आईसीयू 4500 रुपये
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कोविड मरीजों के लिए निजी अस्पताल में निर्धारित शुल्क
-- आइसोलेशन वार्ड प्रतिदिन 6400 रुपये
-- आईसीयू प्रतिदिन 10400 रुपये
-- वेंटिलेटर के साथ आईसीयू प्रतिदिन 12000 रुपये
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आयुष्मान भारत योजना एवं मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान
लाभार्थी परिवारों की संख्या -- 137110
लाभार्थी व्यक्तियों की संख्या --- 685000 से अधिक
अनुबंधित चिकित्सालय 45, जिनमें 24 राजकीय और 21 निजी अस्पताल शामिल हैं।
--- वर्जन
यदि आयुष्मान भारत योजना और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना का कोई पात्र व्यक्ति कोरोना संक्रमित होता है तो वह सीधे निजी कोविड अस्पताल में इलाज नहीं करा सकता। उसे सरकारी कोविड अस्पताल में भर्ती होना होगा। यदि बेड और जरूरी सुविधाएं नहीं होंगी तो ही उसे रेफर किया जा सकता है। वैसे जिले के सरकारी कोविड अस्पतालों में तमाम सुविधाएं हैं।
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डॉ. सुशील गुप्ता, जिला कार्यक्रम संयोजक, आयुष्मान भारत योजना।