UP: मां शाकुंभरी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह, राज्यपाल का बड़ा संदेश, डिग्री अंत नहीं नई शिक्षा की शुरुआत
मां शाकुंभरी विश्वविद्यालय के चौथे दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि दीक्षांत समारोह शिक्षा का अंत नहीं, नई शिक्षा की शुरुआत है। युवाओं से माता-पिता की उपेक्षा न करने का आह्वान किया।
विस्तार
सहारनपुर में मां शाकुंभरी विश्वविद्यालय के चौथे दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल और कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा कि दीक्षांत समारोह का अर्थ दीक्षा का अंत नहीं, बल्कि नई शिक्षा का आरंभ है। युवाओं को शिक्षा के साथ संस्कार, चरित्र और राष्ट्रसेवा की भावना को भी जीवन में अपनाना चाहिए। राज्यपाल ने युवाओं से माता-पिता की उपेक्षा न करने का आह्वान किया और स्थानीय उद्योगों को अनुसंधान से जोड़कर रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर जोर दिया।
डिग्री अंत नहीं, नई शिक्षा की शुरुआत
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने मंगलवार को जनमंच में आयोजित मां शाकुंभरी विश्वविद्यालय के चौथे दीक्षांत समारोह को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह को दीक्षा उत्सव के रूप में देखा जाना चाहिए। शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्राप्त करना नहीं, बल्कि ऐसे चरित्र का निर्माण करना है, जो राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित हो।
उन्होंने कहा कि जिन विद्यार्थियों की डिग्रियां डिजिटल लॉकर में दर्ज की गई हैं, वे वहां से अपनी डिग्री डाउनलोड कर सकते हैं। जिन विद्यार्थियों को पदक नहीं मिल सका, उन्हें निराश नहीं होना चाहिए। प्रतियोगिता दूसरों से नहीं, बल्कि स्वयं से होती है।
यह भी पढ़ें: Meerut: किसानों ने किया कमिश्नरी का घेराव, गेट पर लगा ताला, सड़क पर हुक्का और ट्रैक्टर पर डीजे से प्रदर्शन
माता-पिता की उपेक्षा न करें युवा
राज्यपाल ने देश में वृद्धाश्रमों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने माता-पिता की उपेक्षा न करें। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य ज्ञान के साथ संस्कारवान नागरिक तैयार करना भी है।
राज्यपाल ने कहा कि मां शाकुंभरी विश्वविद्यालय का नाम आस्था, प्रकृति और संरक्षण का प्रतीक है। इसमें लोककल्याण की भावना भी दिखाई देती है। विद्यार्थियों को इसी भावना के साथ अपनी शिक्षा का उपयोग देश और समाज के हित में करना चाहिए।
स्थानीय उद्योगों को अनुसंधान से जोड़ने पर जोर
राज्यपाल ने सहारनपुर की प्रसिद्ध लकड़ी की नक्काशी का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां की काष्ठ नक्काशी विश्वभर में प्रसिद्ध है। इसके अलावा चीनी उद्योग, चावल और होजरी उद्योग की भी अपनी विशिष्ट पहचान है। उन्होंने युवाओं से स्थानीय रोजगार के क्षेत्र में नवाचार करने और स्थानीय उद्योगों को अनुसंधान से जोड़ने के लिए प्रेरित किया, ताकि क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकें।शिक्षा बजट के
उपयोग पर अधिकारियों से पूछे सवाल
राज्यपाल ने शिक्षा बजट के प्रभावी उपयोग पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष शिक्षा का बजट 1.39 लाख करोड़ रुपये है। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि इस बजट से कितनी प्रयोगशालाएं बनीं, कितनी स्मार्ट कक्षाएं तैयार हुईं और कितने छात्रावासों का निर्माण किया गया। उन्होंने बजट का समयबद्ध और सही उपयोग सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
मंडल की 700 आंगनबाड़ियों को मिली किट
दीक्षांत समारोह के दौरान सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और शामली जिलों की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को किट वितरित की गईं। राज्यपाल ने बताया कि सामूहिक प्रयासों से अब तक मंडल में 66 हजार किट वितरित की जा चुकी हैं। मंगलवार को मंडल की 700 आंगनबाड़ियों को भी किट प्रदान की गईं।