{"_id":"62bb46afbf105662b91f3d55","slug":"contaminated-water-becomes-life-threatening-in-the-district-saharanpur-news-mrt594821870","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिले में जीवन के लिए खतरा बना दूषित जल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिले में जीवन के लिए खतरा बना दूषित जल
विज्ञापन
हिंडन में बहता प्रदुषित पानी
- फोटो : SAHARANPUR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सहारनपुर। जिले के कई इलाकों में दूषित जल जीवन के लिए खतरा बन गया है। खासकर देवबंद, बड़गांव और गंगोह क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांवों का भूजल दूषित हो चुका है। यहां के हैंडपंप दूषित पानी उगल रहे हैं, जिसकी वजह से बड़ी संख्या में लोग गंभीर बीमारियों की चपेट में चुके हैं। लोगों का दावा है कि दूषित पानी की वजह से कैंसर भी फैला है और एक दशक में 350 लोगों की मौत भी हो चुकी है।
पशुओं के पीने लायक भी नहीं बचा पानी
बड़गांव क्षेत्र के गांव भगवानपुर, टपरी, सांवतखेड़ी, सहजी, अंबेहटा चांद, शब्बीरपुर, महेशपुर, शिमलाना, धूमगढ़, नूनाबड़ी, बेलड़ा, चिराऊ, बहेड़ा, रतनहेड़ी, दल्हेड़ी आदि गांवों के निकट से बहने वाली प्रदूषित हिंडन और कृष्णा नदियों से दूषित हुए भूजल से एक दशक में 350 से भी अधिक ग्रामीणों की मौत हुई है। इन ग्रामीणों को कैंसर व पीलिया जैसी गंभीर बीमारियां हुई थीं। क्षेत्र में 120 फीट की गहराई तक भूजल इतना दूषित है गया कि इसे पशु भी नहीं पी सकते हैं। गांव शिमलाना के प्रधान काका राणा का कहना है कि एक दशक में दूषित पानी की वजह से 350 से ज्यादा ग्रामीण अकाल मौत का ग्रास बन चुके हैं। जनप्रतिनिधि कई वर्षों से केवल आश्वासन देते आ रहे हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका है।
नमूने लेकर जांच हुई, नहीं हुआ समाधान
प्रदेश सरकार की ओर से वर्ष 2015 में सरकार द्वारा गठित एक समिति ने हिंडन नदी के पानी के नमूने लिए थे। वर्ष 2016 में एनजीटी की ओर से भी इस प्रदूषित नदी के पानी के नमूने लिए गए थे, लेकिन नदी आज तक साफ नहीं हो सकी। एनजीटी ने भी जिला प्रशासन को इस संबंध खराब हैंडपंप उखाड़ने या फिर बंद करने के लिए पत्र लिखे हैं। क्षेत्र के केवल तीन गांवों शब्बीरपुर, महेशपुर, अंबेहटाचांद में ही ग्रामीणों के शुद्ध पेयजल पीने के लिए पानी की टंकी का निर्माण हो पाया है। बाकी गांवों की स्थिति खराब है।
विज्ञापन
कर चुके हैं कई बार आंदोलन
बड़गांव ग्राम प्रधान शिवकुमार सिंह राणा कहते हैं कि कई बार प्रदूषित नदी को लेकर क्षेत्र की जनता आंदोलन कर चुकी है। इसके बावजूद सरकारी तंत्र पूरी तरह सोया हुआ है। उन्होंने कहा कि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो इस बार बड़ा आंदोलन होगा। ग्राम प्रधान महेशपुर कमल सिंह बताते हैं कि दशकों पूर्व किनारे बसे ग्रामीण अपनी दिनचर्या में नदी के पानी को घरेलू कार्यों के लिए इस्तेमाल करते थे, अब नदी के पानी का प्रयोग करना तो दूर की बात है, बल्कि नदी के पानी से उठने वाली दुर्गंध ने सांस लेना मुश्किल कर दिया है।
यमुना खादर के गांवों में भी बुरा हाल
गंगोह क्षेत्र में यमुना खादर के गांवों आलमपुर, शकरपुर, नागल राजपूत, नाई मजरा, हलवाना, फराजपुर, बानुखेड़ी, डबकोला, दौलतपुर आदि में पचास फीट तक पानी दूषित हो चुका है। यहां ज्यादातर हैंडपंप ऊपरी सतह पर ही लगे हैं। इनमें से बहुत से गांवों में टंकी नहीं लगी हैं, जिन जगहों पर टंकी लगी भी है, उससे प्रत्येक घर तक शुद्ध पेयजल की आपूर्ति नहीं हो पाती है। ऐसे में ग्रामीणों को दूषित पेयजल पीने की मजबूरी है। आलमपुर निवासी अंकुर सैनी ने बताया कि उनके गांव में टंकी नहीं है। हैंडपंपों का पानी दूषित हो चुका है। वह पीने में भी खारा लगता है। अशुद्ध पानी पीने से ग्रामीण बार-बार बीमार हो रहे हैं। ग्रामीण लंबे समय से पानी की टंकी की मांग कर रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है।
जीवन के लिए खतरा बना है दूषित जल
देवबंद क्षेत्र गांव रणखंडी निवासी छोटू राणा ने बताया कि शुगर मिल का गंदा व केमिकल युक्त पानी नाले में बहने के कारण यहां का पानी दूषित हुआ है। इसकी वजह से यहां कैंसर जैसी घातक बीमारी ने लोगों को अपनी चपेट में लिया है। लंबे समय तक मांग करने के बाद नाले की साफ सफाई कराई गई थी, जिससे कुछ हद तक स्थिति में सुधार हुआ था, लेकिन पिछले कई वर्षों से नाले की सफाई न होने से हालात पहले जैसे ही बनते जा रहे हैं।
समस्या गंभीर है। घर-घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने को कई योजनाएं संचालित हैं, जिन पर काम भी चल रहा है। जल्द ही लोगों की समस्या का पूरी तरह समाधान हो जाएगा। - अखिलेश सिंह, जिलाधिकारी
विज्ञापन
पशुओं के पीने लायक भी नहीं बचा पानी
बड़गांव क्षेत्र के गांव भगवानपुर, टपरी, सांवतखेड़ी, सहजी, अंबेहटा चांद, शब्बीरपुर, महेशपुर, शिमलाना, धूमगढ़, नूनाबड़ी, बेलड़ा, चिराऊ, बहेड़ा, रतनहेड़ी, दल्हेड़ी आदि गांवों के निकट से बहने वाली प्रदूषित हिंडन और कृष्णा नदियों से दूषित हुए भूजल से एक दशक में 350 से भी अधिक ग्रामीणों की मौत हुई है। इन ग्रामीणों को कैंसर व पीलिया जैसी गंभीर बीमारियां हुई थीं। क्षेत्र में 120 फीट की गहराई तक भूजल इतना दूषित है गया कि इसे पशु भी नहीं पी सकते हैं। गांव शिमलाना के प्रधान काका राणा का कहना है कि एक दशक में दूषित पानी की वजह से 350 से ज्यादा ग्रामीण अकाल मौत का ग्रास बन चुके हैं। जनप्रतिनिधि कई वर्षों से केवल आश्वासन देते आ रहे हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका है।
विज्ञापन
नमूने लेकर जांच हुई, नहीं हुआ समाधान
प्रदेश सरकार की ओर से वर्ष 2015 में सरकार द्वारा गठित एक समिति ने हिंडन नदी के पानी के नमूने लिए थे। वर्ष 2016 में एनजीटी की ओर से भी इस प्रदूषित नदी के पानी के नमूने लिए गए थे, लेकिन नदी आज तक साफ नहीं हो सकी। एनजीटी ने भी जिला प्रशासन को इस संबंध खराब हैंडपंप उखाड़ने या फिर बंद करने के लिए पत्र लिखे हैं। क्षेत्र के केवल तीन गांवों शब्बीरपुर, महेशपुर, अंबेहटाचांद में ही ग्रामीणों के शुद्ध पेयजल पीने के लिए पानी की टंकी का निर्माण हो पाया है। बाकी गांवों की स्थिति खराब है।
विज्ञापन
कर चुके हैं कई बार आंदोलन
बड़गांव ग्राम प्रधान शिवकुमार सिंह राणा कहते हैं कि कई बार प्रदूषित नदी को लेकर क्षेत्र की जनता आंदोलन कर चुकी है। इसके बावजूद सरकारी तंत्र पूरी तरह सोया हुआ है। उन्होंने कहा कि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो इस बार बड़ा आंदोलन होगा। ग्राम प्रधान महेशपुर कमल सिंह बताते हैं कि दशकों पूर्व किनारे बसे ग्रामीण अपनी दिनचर्या में नदी के पानी को घरेलू कार्यों के लिए इस्तेमाल करते थे, अब नदी के पानी का प्रयोग करना तो दूर की बात है, बल्कि नदी के पानी से उठने वाली दुर्गंध ने सांस लेना मुश्किल कर दिया है।
यमुना खादर के गांवों में भी बुरा हाल
गंगोह क्षेत्र में यमुना खादर के गांवों आलमपुर, शकरपुर, नागल राजपूत, नाई मजरा, हलवाना, फराजपुर, बानुखेड़ी, डबकोला, दौलतपुर आदि में पचास फीट तक पानी दूषित हो चुका है। यहां ज्यादातर हैंडपंप ऊपरी सतह पर ही लगे हैं। इनमें से बहुत से गांवों में टंकी नहीं लगी हैं, जिन जगहों पर टंकी लगी भी है, उससे प्रत्येक घर तक शुद्ध पेयजल की आपूर्ति नहीं हो पाती है। ऐसे में ग्रामीणों को दूषित पेयजल पीने की मजबूरी है। आलमपुर निवासी अंकुर सैनी ने बताया कि उनके गांव में टंकी नहीं है। हैंडपंपों का पानी दूषित हो चुका है। वह पीने में भी खारा लगता है। अशुद्ध पानी पीने से ग्रामीण बार-बार बीमार हो रहे हैं। ग्रामीण लंबे समय से पानी की टंकी की मांग कर रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है।
जीवन के लिए खतरा बना है दूषित जल
देवबंद क्षेत्र गांव रणखंडी निवासी छोटू राणा ने बताया कि शुगर मिल का गंदा व केमिकल युक्त पानी नाले में बहने के कारण यहां का पानी दूषित हुआ है। इसकी वजह से यहां कैंसर जैसी घातक बीमारी ने लोगों को अपनी चपेट में लिया है। लंबे समय तक मांग करने के बाद नाले की साफ सफाई कराई गई थी, जिससे कुछ हद तक स्थिति में सुधार हुआ था, लेकिन पिछले कई वर्षों से नाले की सफाई न होने से हालात पहले जैसे ही बनते जा रहे हैं।
समस्या गंभीर है। घर-घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने को कई योजनाएं संचालित हैं, जिन पर काम भी चल रहा है। जल्द ही लोगों की समस्या का पूरी तरह समाधान हो जाएगा। - अखिलेश सिंह, जिलाधिकारी

गंदे नाले में तब्दील हुई हिंडन- फोटो : SAHARANPUR

काका राणा- फोटो : SAHARANPUR

शिव कुमार सिंह- फोटो : SAHARANPUR

कमल सिंह- फोटो : SAHARANPUR

अंकुर सैनी- फोटो : SAHARANPUR

छोटू राणा- फोटो : SAHARANPUR