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तकनीक फ्रेंडली नहीं हैं स्मार्ट सिटी योजना में शामिल लिपिक
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सहारनपुर। शहर को स्मार्ट सिटी योजना में शामिल हुए तीन साल से अधिक हो चुके हैं। नगरायुक्त ज्ञानेंद्र सिंह स्मार्ट सिटी सहारनपुर के सीईओ भी हैं। हालांकि वेअधीनस्थ लिपिकों को स्मार्ट नहीं बना पाए हैं। तकनीक के इस युग में भी ज्यादातर लिपिक कंप्यूटर ऑपरेट करना नहीं जानते हैं। ऐसे में नगर निगम ने उनके सहयोग के लिए संविदा पर कंप्यूटर ऑपरेटर रखे हैं।
नगर निगम में करीब डेढ़ दर्जन लिपिक हैं। इनमें आठ से दस लिपिक ने कंप्यूटर आपरेट करने की जरूरत नहीं समझी। नगर निगम ने उनको सहयोगी के तौर पर ऑपरेटर मुहैया कराए हुए हैं। ये लिपिक नगर निगम के लगभग सभी विभागों में हैं। ये ऑपरेटर के जरिए काम चला आ रहे हैं। निगम में चर्चा है कि जिन लिपिकों को सहयोगी मिले हुए हैं वे ऐसे लिपिक हैं, जिनका कार्यालय में दबदबा या फिर काम की अधिकता है। खास बात यह है कि जिस नगर निगम के मुखिया पर शहर और शहरवासियों को स्मार्ट बनाने का जिम्मा है। उनके लिपिकों का कंप्यूटर फ्रैंडली न होना कहीं न कहीं कमजोरी को दर्शाता है। नगर निगम में कई लिपिक ऐसे हैं, जो कार्य की अधिकता के बावजूद अपने सभी कार्य खुद करते हैं।
निगम भरता है आपरेटरों का वेतन
लिपिकों के सहयोग के लिए संविदा पर रखे गए कंप्यूटर ऑपरेटरों का वेतन नगर निगम के खजाने से निकलता है। निगम के एक कर्मचारी से मिली जानकारी के अनुसार एक लाख रुपये से अधिक इन कंप्यूटर ऑपरेटरों के वेतन पर खर्च होता है।
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कर्मचारियों की है कमी
नगर निगम में अधिकारियों, लिपिकों और अन्य तरह के कर्मचारियों के ज्यादातर पद खाली हैं। नगर आयुक्त के सहयोगी के रूप में आठ अधिकारियों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में एक अपर नगरायुक्त और एक सहायक नगर आयुक्त तैनात हैं। उप नगरायुक्त के भी दो पद रिक्त हैं। संयुक्त नगर आयुक्त के पद हमेशा से खाली रहे हैं। लिपिकों के भी ज्यादातर पद खाली हैं।
ज्यादातर लिपिक अपना कार्य स्वयं करते हैं। कुछ लिपिकों को कार्य की अधिकता के चलते कंप्यूटर ऑपरेटर मुहैया कराए गए हैं। यह बात सही है कि सभी लिपिकों को कंप्यूटर चलाना आना चाहिए, जिससे जरूरत पड़ने पर खुद भी काम कर सकें।-ज्ञानेंद्र सिंह, नगरायुक्त/सीईओ स्मार्ट सिटी सहारनपुर
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नगर निगम में करीब डेढ़ दर्जन लिपिक हैं। इनमें आठ से दस लिपिक ने कंप्यूटर आपरेट करने की जरूरत नहीं समझी। नगर निगम ने उनको सहयोगी के तौर पर ऑपरेटर मुहैया कराए हुए हैं। ये लिपिक नगर निगम के लगभग सभी विभागों में हैं। ये ऑपरेटर के जरिए काम चला आ रहे हैं। निगम में चर्चा है कि जिन लिपिकों को सहयोगी मिले हुए हैं वे ऐसे लिपिक हैं, जिनका कार्यालय में दबदबा या फिर काम की अधिकता है। खास बात यह है कि जिस नगर निगम के मुखिया पर शहर और शहरवासियों को स्मार्ट बनाने का जिम्मा है। उनके लिपिकों का कंप्यूटर फ्रैंडली न होना कहीं न कहीं कमजोरी को दर्शाता है। नगर निगम में कई लिपिक ऐसे हैं, जो कार्य की अधिकता के बावजूद अपने सभी कार्य खुद करते हैं।
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निगम भरता है आपरेटरों का वेतन
लिपिकों के सहयोग के लिए संविदा पर रखे गए कंप्यूटर ऑपरेटरों का वेतन नगर निगम के खजाने से निकलता है। निगम के एक कर्मचारी से मिली जानकारी के अनुसार एक लाख रुपये से अधिक इन कंप्यूटर ऑपरेटरों के वेतन पर खर्च होता है।
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कर्मचारियों की है कमी
नगर निगम में अधिकारियों, लिपिकों और अन्य तरह के कर्मचारियों के ज्यादातर पद खाली हैं। नगर आयुक्त के सहयोगी के रूप में आठ अधिकारियों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में एक अपर नगरायुक्त और एक सहायक नगर आयुक्त तैनात हैं। उप नगरायुक्त के भी दो पद रिक्त हैं। संयुक्त नगर आयुक्त के पद हमेशा से खाली रहे हैं। लिपिकों के भी ज्यादातर पद खाली हैं।
ज्यादातर लिपिक अपना कार्य स्वयं करते हैं। कुछ लिपिकों को कार्य की अधिकता के चलते कंप्यूटर ऑपरेटर मुहैया कराए गए हैं। यह बात सही है कि सभी लिपिकों को कंप्यूटर चलाना आना चाहिए, जिससे जरूरत पड़ने पर खुद भी काम कर सकें।-ज्ञानेंद्र सिंह, नगरायुक्त/सीईओ स्मार्ट सिटी सहारनपुर