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चुनाव दर चुनाव बदल जाते हैं सियासी समीकरण
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Sat, 14 Jan 2017 12:04 AM IST
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सहारनपुर में विधानसभा चुनाव की घोषणा होते ही सियासी दल अपने सियासी समीकरण बनाने में जुट गए हैं। मतदाताओं को रिझाने के लिए राजनीतिक पार्टियां दांव पेंच में लगी हैं।
मगर, लोकसभा चुनाव के मुकाबले विधानसभा चुनाव अलग होगा। दो साल में ही मतदाताओं के रुझान के चलते विधानसभा चुनाव में ज्यादातर सीटों पर अपनी जमानत गंवाने वाली भाजपा ने लोकसभा चुनाव में जबरदस्त प्रदर्शन किया।
अब विधानसभा चुनाव को लेकर सभी दल मैदान में आने की तैयारी में हैं। 2012 के विधानसभा चुनाव में बेहट, रामपुर मनिहारान, नकुड़ और सहारनपुर देहात सीट पर बसपा ने कब्जा जमाया था।
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जबकि सहारनपुर नगर सीट पर भाजपा, देवबंद पर सपा और गंगोह सीट पर कांग्रेस को जीत मिली थी। इसके दो साल बाद हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा ने लोकसभा सीट पर कब्जा जमाया।
भाजपा ने शहर, देवबंद, नकुड़, गंगोह और रामपुर मनिहारान सीट पर जबरदस्त बढ़त ली थी। जबकि कांग्रेस ने बेहट और देहात सीट पर सर्वाधिक मत हासिल करने में सफलता पाई।
विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटे नेता और जानकार मानते हैं कि विधानसभा और लोकसभा चुनाव के समीकरण अगल-अलग होते हैं। ऐसे में विधानसभा वार अपनी जमीन तैयार करने में जुट गए हैं।
विधानसभा चुनाव में बसपा ने सात विधानसभा सीटों में चार पर जीत दर्ज कर बढ़त बनाई। मगर, लोकसभा चुनाव में बसपा किसी भी विधानसभा सीट पर दूसरे दलों के मुकाबले आगे नहीं निकल पाई।
ऐसे ही विधानसभा चुनाव में अपनी जमानत नहीं बचा पाने वाली विधानसभाओं में भाजपा ने लोकसभा चुनाव में जबरदस्त प्रदर्शन किया। लोकसभा चुनाव में सपा किसी सहारनपुर लोकसभा क्षेत्र की पांच सीटों पर अपनी जमानत नहीं बचा पाई थी।
जबकि नकुड़ और गंगोह सीट पर वह दूसरे पायदान पर रही। ऐसे ही कांग्रेस ने देवबंद के अलावा पांच सीटों पर विधानसभा चुनाव में दूसरे नंबर पर थी और गंगोह जीत ली थी। लोकसभा चुुनाव में कांग्रेस के समर्थन से मैदान में उतरी रालोद को गंगोह और नकुड़ में दस हजार का आंकड़ा भी नहीं पा सकी थी।
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मगर, लोकसभा चुनाव के मुकाबले विधानसभा चुनाव अलग होगा। दो साल में ही मतदाताओं के रुझान के चलते विधानसभा चुनाव में ज्यादातर सीटों पर अपनी जमानत गंवाने वाली भाजपा ने लोकसभा चुनाव में जबरदस्त प्रदर्शन किया।
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अब विधानसभा चुनाव को लेकर सभी दल मैदान में आने की तैयारी में हैं। 2012 के विधानसभा चुनाव में बेहट, रामपुर मनिहारान, नकुड़ और सहारनपुर देहात सीट पर बसपा ने कब्जा जमाया था।
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जबकि सहारनपुर नगर सीट पर भाजपा, देवबंद पर सपा और गंगोह सीट पर कांग्रेस को जीत मिली थी। इसके दो साल बाद हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा ने लोकसभा सीट पर कब्जा जमाया।
भाजपा ने शहर, देवबंद, नकुड़, गंगोह और रामपुर मनिहारान सीट पर जबरदस्त बढ़त ली थी। जबकि कांग्रेस ने बेहट और देहात सीट पर सर्वाधिक मत हासिल करने में सफलता पाई।
विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटे नेता और जानकार मानते हैं कि विधानसभा और लोकसभा चुनाव के समीकरण अगल-अलग होते हैं। ऐसे में विधानसभा वार अपनी जमीन तैयार करने में जुट गए हैं।
विधानसभा चुनाव में बसपा ने सात विधानसभा सीटों में चार पर जीत दर्ज कर बढ़त बनाई। मगर, लोकसभा चुनाव में बसपा किसी भी विधानसभा सीट पर दूसरे दलों के मुकाबले आगे नहीं निकल पाई।
ऐसे ही विधानसभा चुनाव में अपनी जमानत नहीं बचा पाने वाली विधानसभाओं में भाजपा ने लोकसभा चुनाव में जबरदस्त प्रदर्शन किया। लोकसभा चुनाव में सपा किसी सहारनपुर लोकसभा क्षेत्र की पांच सीटों पर अपनी जमानत नहीं बचा पाई थी।
जबकि नकुड़ और गंगोह सीट पर वह दूसरे पायदान पर रही। ऐसे ही कांग्रेस ने देवबंद के अलावा पांच सीटों पर विधानसभा चुनाव में दूसरे नंबर पर थी और गंगोह जीत ली थी। लोकसभा चुुनाव में कांग्रेस के समर्थन से मैदान में उतरी रालोद को गंगोह और नकुड़ में दस हजार का आंकड़ा भी नहीं पा सकी थी।