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अमर उजाला अभियान: जल भराव
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सहारनपुर। तीन साल पहले डेंगू और मलेरिया के कारण 18 लोगों को खो चुके गांव चकदेवली के लोगों को फिर से बीमारी के फैलने का खतरा सता रहा है। इसकी प्रमुख वजह गांव के एक साइड में जलभराव है। निकासी के लिए लाखों रुपये की लागत से नाला बनवाकर भी नगर निगम के अधिकारी लोगों को जलभराव की समस्या से निजात नहीं दिला सके हैं। ऐसे में निगम को यहां पंपिंग सेट लगाना पड़ा है, जो जलभराव वाले स्थल से पानी को खींचकर नाले में डाल रहा है, लेकिन पंपिंग सेट के कभी-कभी चलने के कारण 24 घंटे जलभराव रहता है।
महानगर के वार्ड आठ में शामिल चकदेवली गांव बेहट रोड पर पड़ता है। गांव के पीछे का हिस्से का स्तर नीचा है, जिसकी वजह से बाहर बने मुख्य नाले में पानी नहीं आ पाता है। ऐसे में यहां का पानी मोहल्ले के बाहर खाली पड़े प्लॉट में भरता है, जबकि कुछ पानी गली की सड़क पर रहता है। जलभराव के कारण लोग उक्त मार्ग से निकल भी नहीं पाते हैं। तीन साल पहले गांव में मलेरिया और डेंगू ने तबाही मचाई थी, जिसके कारण गांव के 18 लोगों की जान एक महीने के भीतर चली गई थी। तत्कालीन नगरायुक्त, सीएमओ सहित तमाम अधिकारियों ने गांव पहुंचकर समस्या देखी थी। जलभराव की समस्या को दूर करने के लिए नगर निगम ने लाखों रुपये की लागत से आरसीसी नाला बनवाया है, लेकिन नाला जलभराव वाले स्थल के स्तर से करीब एक फीट ऊंचा बना दिया गया है, जिसके बाद समस्या कम होने की बजाय और बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक नाला नहीं बना था तो पानी कहीं न कहीं से निकल जाता था, लेकिन अब नाला बनाकर स्थिति और खराब कर दी गई है।
तालाबों की खोदाई कराई जाए
ग्रामीणों ने बताया कि गांव के जिस हिस्से में जलभराव की समस्या है। उस हिस्से में दो तालाब थे, जिनमें गांव का पानी चला जाता था, लेकिन तालाब के आसपास के जमींदारो ने उक्त तालाबों को पाटकर खेत में मिला लिया। यदि नगर निगम पानी की निकासी का रास्ता नहीं निकाल पा रहा है, तो तालाबों की पुन: खोदाई कराकर पानी वहां छोड़ा जाए, जिसके बाद ही समाधान संभव है।
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स्थानीय लोगों की बात
-ग्रामीण शिवलाल ने बताया कि जलभराव की समस्या करीब दस साल से है। तीन साल पहले डेंगू और मलेरिया फैला था, जिसमें डेढ़ दर्जन से अधिक लोगों की जान चली गई थी। उसके बाद से लगातार अधिकारी आ रहे हैं, लेकिन समस्या का समाधान कोई नहीं कर पा रहा है।
-गुड्डी ने बताया कि कहने को उनका गांव शहर में आ गया है, लेकिन गांव में बदलाव कुछ नहीं दिख रहा है। पानी की निकासी के लिए नाला ऊंचा बना दिया गया है, जो समाधान की बजाय समस्या खड़ी कर रहा है। हमें स्थायी समाधान चाहिए।
-तीन साल पहले डेंगू से जवान बेटे को खो चुकी नरेशो ने बताया कि जलभराव के कारण प्रत्येक वर्ष बीमारियां फैलती हैं। नगर निगम जलभराव की समस्या दूर कर पा रहा है। पानी निकासी की व्यवस्था होनी चाहिए।
- सरोज का कहना है कि अधिकारी हर साल गांव में आकर समस्या देखते हैं और समाधान कराने का आश्वासन देकर चले जाते हैं, लेकिन समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है। शहर में शामिल होने के बाद भी अगर यही हाल रहना था तो इससे बेहतर गांव ही था।
-जलभराव वाले जिन क्षेत्रों में स्थायी समाधान की योजना बनाई जा रही है उनमें चकदेवली भी शामिल है। फिलहाल वहां पंपिंग सेट से जलभराव की समस्या दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। 15वें वित्त से जलभराव वाले सभी कॉलोनियों में काम कराए जाएंगेे। प्रयास यही रहेगा कि जलभराव की समस्या को जल्द से जल्द दूर किया जा सके।
गजल भारद्वाज, नगरायुक्त।
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महानगर के वार्ड आठ में शामिल चकदेवली गांव बेहट रोड पर पड़ता है। गांव के पीछे का हिस्से का स्तर नीचा है, जिसकी वजह से बाहर बने मुख्य नाले में पानी नहीं आ पाता है। ऐसे में यहां का पानी मोहल्ले के बाहर खाली पड़े प्लॉट में भरता है, जबकि कुछ पानी गली की सड़क पर रहता है। जलभराव के कारण लोग उक्त मार्ग से निकल भी नहीं पाते हैं। तीन साल पहले गांव में मलेरिया और डेंगू ने तबाही मचाई थी, जिसके कारण गांव के 18 लोगों की जान एक महीने के भीतर चली गई थी। तत्कालीन नगरायुक्त, सीएमओ सहित तमाम अधिकारियों ने गांव पहुंचकर समस्या देखी थी। जलभराव की समस्या को दूर करने के लिए नगर निगम ने लाखों रुपये की लागत से आरसीसी नाला बनवाया है, लेकिन नाला जलभराव वाले स्थल के स्तर से करीब एक फीट ऊंचा बना दिया गया है, जिसके बाद समस्या कम होने की बजाय और बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक नाला नहीं बना था तो पानी कहीं न कहीं से निकल जाता था, लेकिन अब नाला बनाकर स्थिति और खराब कर दी गई है।
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तालाबों की खोदाई कराई जाए
ग्रामीणों ने बताया कि गांव के जिस हिस्से में जलभराव की समस्या है। उस हिस्से में दो तालाब थे, जिनमें गांव का पानी चला जाता था, लेकिन तालाब के आसपास के जमींदारो ने उक्त तालाबों को पाटकर खेत में मिला लिया। यदि नगर निगम पानी की निकासी का रास्ता नहीं निकाल पा रहा है, तो तालाबों की पुन: खोदाई कराकर पानी वहां छोड़ा जाए, जिसके बाद ही समाधान संभव है।
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स्थानीय लोगों की बात
-ग्रामीण शिवलाल ने बताया कि जलभराव की समस्या करीब दस साल से है। तीन साल पहले डेंगू और मलेरिया फैला था, जिसमें डेढ़ दर्जन से अधिक लोगों की जान चली गई थी। उसके बाद से लगातार अधिकारी आ रहे हैं, लेकिन समस्या का समाधान कोई नहीं कर पा रहा है।
-गुड्डी ने बताया कि कहने को उनका गांव शहर में आ गया है, लेकिन गांव में बदलाव कुछ नहीं दिख रहा है। पानी की निकासी के लिए नाला ऊंचा बना दिया गया है, जो समाधान की बजाय समस्या खड़ी कर रहा है। हमें स्थायी समाधान चाहिए।
-तीन साल पहले डेंगू से जवान बेटे को खो चुकी नरेशो ने बताया कि जलभराव के कारण प्रत्येक वर्ष बीमारियां फैलती हैं। नगर निगम जलभराव की समस्या दूर कर पा रहा है। पानी निकासी की व्यवस्था होनी चाहिए।
- सरोज का कहना है कि अधिकारी हर साल गांव में आकर समस्या देखते हैं और समाधान कराने का आश्वासन देकर चले जाते हैं, लेकिन समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है। शहर में शामिल होने के बाद भी अगर यही हाल रहना था तो इससे बेहतर गांव ही था।
-जलभराव वाले जिन क्षेत्रों में स्थायी समाधान की योजना बनाई जा रही है उनमें चकदेवली भी शामिल है। फिलहाल वहां पंपिंग सेट से जलभराव की समस्या दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। 15वें वित्त से जलभराव वाले सभी कॉलोनियों में काम कराए जाएंगेे। प्रयास यही रहेगा कि जलभराव की समस्या को जल्द से जल्द दूर किया जा सके।
गजल भारद्वाज, नगरायुक्त।

चक देवली में पानी निकालने के लिए लगाया गया पंपिंग सेट।- फोटो : SAHARANPUR

चक देवली में रास्ते पर हुआ जलभराव।- फोटो : SAHARANPUR

सरोज।- फोटो : SAHARANPUR

सुरेशो।- फोटो : SAHARANPUR

शिवलाल।- फोटो : SAHARANPUR