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Saharanpur News: बेजुबानों के दर्द पर मरहम लगा रहे कैंसर पीड़ित सुनील

Fri, 13 Oct 2023 12:24 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर Updated Fri, 13 Oct 2023 12:24 AM IST
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Cancer patient Sunil is healing the pain of the voiceless.
सुनिल जैन राना
सहारनपुर। श्री दया सिंधु जीव रक्षा केंद्र के संचालक सुनील जैन राना घायल और बीमार पशु-पक्षियों के लिए किसी मसीहा से कम नहीं है। ब्लड कैंसर से पीड़ित होने की बावजूद सुनील 25 वर्षों से पशु-पक्षियों के दर्द पर मरहम लगा रहे हैं। निशुल्क उपचार देकर वह कई हजार पशुओं और पक्षियों को स्वस्थ कर चुके हैं।
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मोहल्ला छत्ता जंबूदास निवासी सुनील जैन राना ब्लड कैंसर से पीड़ित हैं। बचपन से ही उनको पशु-पक्षियों की सेवा करने का शौक हैं। वह स्कूल टाइम में अपना लंच भी पशु-पक्षियों को खिला देते थे। वर्तमान से सुनील जैन राना चिलकाना रोड स्थित श्री दया सिंधु जीव रक्षा केंद्र के संचालक हैं। यहां पर वह घायल कुत्तों, बिल्ली, खरगोश और कबूतरों, तोता, चील सहित सभी तरह के पक्षियों का उपचार करते हैं। सुनील जैन राना ने बताया कि लोग बीमार होने पर अपने पालतू पशु और पक्षियों को भी उनके यहां छोड़ जाते हैं, जिनका वह इलाज कर ठीक करते हैं। सुनील जैन राना रोजाना सुबह टहलने के लिए निकलते हैं। वह सड़कों पर घायल पशु को देखकर जीव रक्षा केंद्र में लाकर इलाज करते हैं। यह सिलसिला 25 वर्षों से चला आ रहा है।
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इनका चल रहा इलाज

वर्तमान श्री दया सिंधु जीव रक्षा केंद्र में कई कुत्तों, बंदर, बिल्ली, खरगोश, तोते और 500 से अधिक कबूतरों का उपचार चल रहा है। जंगली कबूतरों के ठीक होने पर उन्हें उड़ा दिया जाता है, लेकिन पालतू कबूतरों को जीव रक्षा केंद्र में ही रखा जाता है।
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बनाए हैं अलग-अलग कक्ष

लकवे से पीड़ित पक्षियों को इंजेक्शन लगाकर और दवाएं देकर ठीक किया जाता है। इसके लिए उन्होंने अलग-अलग कक्ष बनाए हैं, जब पक्षी की हालत ज्यादा गंभीर होती है तो दूसरे पक्षियों में संक्रमण फैलने का खतरा रहता है। इसलिए वह उसे इमरजेंसी कक्ष में रखते हैं। कुछ समय बाद ठीक होने पर पक्षी को दूसरे कक्ष में शिफ्ट कर देते हैं।

माल ढोने वाले पशुओं के लिए लगाते हैं शिविर

माल ढोने वाले बैल, घोड़ों और भैंसे के इलाज के लिए वह विशेष शिविर लगाते हैं। क्योंकि, बुग्गी खींचने वाले पशुओं की गर्दन पर जख्म हो जाता है। ऐसे में सुनील शिविर लगाकर उनका उपचार करते हैं। इसके साथ ही हर वर्ष पशु-पक्षी रक्षा पखवाड़े के तहत अभियान चलाकर इलाज किया जाता है।
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