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भइया हैं दूर, सीमाएं सील, बहनें होंगी मजबूर
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भइया हैं दूर, सीमाएं सील, बहनें होंगी मजबूर
सहारनपुर। किसी का भाई देहरादून में है तो किसी का हरियाणा के रोहतक में। कोरोना संक्रमण की वजह से बाहरी राज्यों की सीमाएं सील हैं। बगैर पास के लोग जा नहीं सकते। ऐसे में उन महिलाओं के सामने दुविधा है, जो उत्तराखंड और हरियाणा में रहने वाले अपने भाई को राखी बांधने नहीं जा पाएंगी।
सहारनपुर शहर में ऐसी महिलाएं काफी संख्या में हैं, जिनका मायका उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब सहित अन्य राज्यों के शहरों में है। हर साल रक्षाबंधन पर वह मायके में जाकर अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती रहीं हैं। इस बार तीन अगस्त को रक्षाबंधन का त्योहार है, लेकिन कोरोना के कारण हालात बदले हुए हैं। सोशल डिस्टेंस से लेकर अन्य बंदिशें लागू हैं। बाहरी राज्यों की सीमाएं सील हैं। वहीं, रक्षाबंधन से ठीक पहले शनिवार और रविवार का लॉकडाउन भी पड़ रहा है। ऐसे में बहनों के लिए भाइयों के पास जाना आसान नहीं है।
-- दूसरे राज्यों में नहीं जा पा रहीं रोडवेज बसेें
रोडवेज ने रक्षाबंधन के लिए 133 स्पेशल बस सेवाएं शुरू करने का निर्णय तो लिया है, मगर दूसरे राज्यों के लिए ये सेवाएं नहीं होंगी। रोडवेज के क्षेत्रीय सहायक प्रबंधक जगदीश सिंह बताते हैं कि कोरोना संक्रमण बढ़ने के कारण बाहरी राज्यों में बस संचालन के लिए हालात उपयुक्त नहीं हैं। यदि शासन स्तर पर ही कुछ गाइडलाइंस आईं तो अलग बात है।
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महिलाएं बोलीं, मायूसी तो हैं मगर मजबूरी है
- डीएसओ कंपाउंड की सोनिया बब्बर कहती हैं कि उनके भैया जगमोहन लांबा रोहतक हरियाणा में हैं। वह हर साल रक्षाबंधन पर जाती रही हैं। मगर इस बार कोरोना काल में बहुत बंदिशें हैं। बार्डर पर भी दिक्कतें हैं। इसलिए मायके नहीं जा पा रहीं हैं। भैया को मोबाइल पर ही आनलाइन विश करना पड़ेगा। हालांकि इसमें रियल सेलिब्रेशन की फीलिंग नहीं आती है।
- महावीर कालोनी की दीपा कहती हैं कि इस बार कोरोना संक्रमण ने सारे त्योहार फीके कर दिए हैं। रक्षाबंधन भी इसमें शामिल है। वे बड़े उत्साह से हर बार ऋषिकेश में भाई रवि और विनीत के पास जाती रही हैं। इस बार न जाने से मायूस हैं।
- सर्किट हाउस रोड निवासी रीतू कहती हैं कि उनका मायका देहरादून के पटेलनगर में है। इस बार वह नहीं जा पा रहीं हैं। मायके वाले भी कोरोना संक्रमण के कारण सफर से बचने की सलाह दे रहे हैं। मायूसी तो हो रही है मगर मजबूरी है।
- मुन्नालाल गर्ल्स कालेज की शिक्षिका डॉ. रीता बोरा कहती हैं कि उनके भैया किरण सिंह बोरा हल्द्वानी में हैं। कोराना काल में भाई और बहन दोनों की जिंदगी की सुरक्षा सबसे अधिक जरूरी है।
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- हर किसी का नहीं बन सकता पास
सहारनपुर। उत्तराखंड की सीमा सहारनपुर जनपद में बिहारीगढ़ थाना क्षेत्र, फतेहपुर के छुटमलपुर और गागलहेड़ी क्षेत्र में लगती है। उत्तराखंड बॉर्डर पर पुलिस द्वारा बाहरी राज्यों से आने वालों को रोक दिया जाता है। उसी तरह उत्तराखंड से आने वालों को भी रोका जाता है। आवागमन के लिए लोगों को पास बनवाना पड़ता है, लेकिन पास सिर्फ आपात स्थिति में जैसे किसी घायल या बीमार को ले जाना है या बेहद जरूरी कोई कार्य है, उसी को पास मिल रहा है। रक्षाबंधन के लिए पास बनवाना भी महिलाओं के लिए आसान नहीं है।
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सहारनपुर। किसी का भाई देहरादून में है तो किसी का हरियाणा के रोहतक में। कोरोना संक्रमण की वजह से बाहरी राज्यों की सीमाएं सील हैं। बगैर पास के लोग जा नहीं सकते। ऐसे में उन महिलाओं के सामने दुविधा है, जो उत्तराखंड और हरियाणा में रहने वाले अपने भाई को राखी बांधने नहीं जा पाएंगी।
सहारनपुर शहर में ऐसी महिलाएं काफी संख्या में हैं, जिनका मायका उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब सहित अन्य राज्यों के शहरों में है। हर साल रक्षाबंधन पर वह मायके में जाकर अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती रहीं हैं। इस बार तीन अगस्त को रक्षाबंधन का त्योहार है, लेकिन कोरोना के कारण हालात बदले हुए हैं। सोशल डिस्टेंस से लेकर अन्य बंदिशें लागू हैं। बाहरी राज्यों की सीमाएं सील हैं। वहीं, रक्षाबंधन से ठीक पहले शनिवार और रविवार का लॉकडाउन भी पड़ रहा है। ऐसे में बहनों के लिए भाइयों के पास जाना आसान नहीं है।
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-- दूसरे राज्यों में नहीं जा पा रहीं रोडवेज बसेें
रोडवेज ने रक्षाबंधन के लिए 133 स्पेशल बस सेवाएं शुरू करने का निर्णय तो लिया है, मगर दूसरे राज्यों के लिए ये सेवाएं नहीं होंगी। रोडवेज के क्षेत्रीय सहायक प्रबंधक जगदीश सिंह बताते हैं कि कोरोना संक्रमण बढ़ने के कारण बाहरी राज्यों में बस संचालन के लिए हालात उपयुक्त नहीं हैं। यदि शासन स्तर पर ही कुछ गाइडलाइंस आईं तो अलग बात है।
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महिलाएं बोलीं, मायूसी तो हैं मगर मजबूरी है
- डीएसओ कंपाउंड की सोनिया बब्बर कहती हैं कि उनके भैया जगमोहन लांबा रोहतक हरियाणा में हैं। वह हर साल रक्षाबंधन पर जाती रही हैं। मगर इस बार कोरोना काल में बहुत बंदिशें हैं। बार्डर पर भी दिक्कतें हैं। इसलिए मायके नहीं जा पा रहीं हैं। भैया को मोबाइल पर ही आनलाइन विश करना पड़ेगा। हालांकि इसमें रियल सेलिब्रेशन की फीलिंग नहीं आती है।
- महावीर कालोनी की दीपा कहती हैं कि इस बार कोरोना संक्रमण ने सारे त्योहार फीके कर दिए हैं। रक्षाबंधन भी इसमें शामिल है। वे बड़े उत्साह से हर बार ऋषिकेश में भाई रवि और विनीत के पास जाती रही हैं। इस बार न जाने से मायूस हैं।
- सर्किट हाउस रोड निवासी रीतू कहती हैं कि उनका मायका देहरादून के पटेलनगर में है। इस बार वह नहीं जा पा रहीं हैं। मायके वाले भी कोरोना संक्रमण के कारण सफर से बचने की सलाह दे रहे हैं। मायूसी तो हो रही है मगर मजबूरी है।
- मुन्नालाल गर्ल्स कालेज की शिक्षिका डॉ. रीता बोरा कहती हैं कि उनके भैया किरण सिंह बोरा हल्द्वानी में हैं। कोराना काल में भाई और बहन दोनों की जिंदगी की सुरक्षा सबसे अधिक जरूरी है।
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- हर किसी का नहीं बन सकता पास
सहारनपुर। उत्तराखंड की सीमा सहारनपुर जनपद में बिहारीगढ़ थाना क्षेत्र, फतेहपुर के छुटमलपुर और गागलहेड़ी क्षेत्र में लगती है। उत्तराखंड बॉर्डर पर पुलिस द्वारा बाहरी राज्यों से आने वालों को रोक दिया जाता है। उसी तरह उत्तराखंड से आने वालों को भी रोका जाता है। आवागमन के लिए लोगों को पास बनवाना पड़ता है, लेकिन पास सिर्फ आपात स्थिति में जैसे किसी घायल या बीमार को ले जाना है या बेहद जरूरी कोई कार्य है, उसी को पास मिल रहा है। रक्षाबंधन के लिए पास बनवाना भी महिलाओं के लिए आसान नहीं है।