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न बैंड-बाजा न शहनाई, सादगी से शादी रचाई
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भडलिया नवमी पर बड़गांव क्षेत्र के गांव दल्हेड़ी में मास्क पहनकर सात-फेरे लेने वाले वर-वधु
- फोटो : SAHARANPUR
न बैंड-बाजा और न बरात, सादगी से रचाई शादी
सहारनपुर। कोरोना काल के बीच भडलिया नवमी पर शुभ मुहूर्त में वर-वधू एक-दूजे के हो गए। जिले भर में करीब 70 शादियां हुईं, लेकिन ज्यादातर आयोजन घरों पर ही हुए। शहर में कुछ होटल में मात्र 25-30 लोगों ने ही सामाजिक दूरी का पालन करते हुए शादी का भोजन खाया, लेकिन फेरे घर पर ही हुए। न बैंडबाजा बजा और न ही शहनाई। डीजे की धुन पर भी नाचने से परहेज किया।
भडलिया नवमी पर शादियों का शुभ मुहूर्त और विशेष संयोग होता है, लेकिन इस बार कोरोना काल के बीच आई भडलिया नवमी पर विवाह समारोह का तरीका भी बदला नजर आया। शहर के बैंक्वेट हॉल, धर्मशालाएं तो खाली पड़ी रहे, लेकिन कुछ होटलों में सिर्फ शादी का भोजन दिया गया, जिसमें घराती और बराती सहित 30 लोग तक शामिल हुए। इसके अलावा लोगों ने घरों पर ही आयोजन कर वर-वधू के सात फेरे कराए। ऐसी स्थिति देहात क्षेत्रों में भी रही है। बड़गांव के गांव दल्हेड़ी में हुई चार शादियां हुईं, जिनमें सामाजिक दूरी का पालन करने के साथ ही बराती-घराती और वर-वधू मास्क लगाकर शामिल हुए। सरसावा निवासी राजसिंह चौहान ने अपनी बेटी रूबल की शादी गांव दल्हेड़ी गांव में शिवकुमार राणा के बेटे अभिमन्यु के साथ की। परिजनों ने बताया कि धूमधाम से शादी करने की सोची थी, लेकिन लॉकडाउन बढ़ने के साथ ही शादी की तिथि आगे बढ़ती गई, लेकिन अब भडलिया नवमी पर ही शादी कर दी। दूल्हा सिर्फ 15 लोगों के साथ बरात लेकर सरसावा गया। यहां एक पैलेस में दोनों के फेरे कराकर शादी संपन्न कराई।
वर-वधू सहित सभी लोगों ने मास्क लगाए
दल्हेड़ी गांव से तीन लड़कों की बरात गई हुई थी और एक लड़की की बरात गांव में आई हुई थी। सोशल डिस्टेंस, मास्क सहित संक्रमण से बचाव के सभी इंतजाम पूरे कर ही शादी संपन्न हुई।
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तीन करोड़ के नुकसान का अनुमान
शहर में करीब 40 बैंक्वेट हाल हैं और होटल 30 से ज्यादा हैं। बैंक्वेट हाल बुक करने, फूलों की सजावट, बग्गी, कैटर्स आदि पर करीब 8 लाख रुपये का खर्च एक शादी में होता है। सहालग अच्छा होने पर दिन में दो शादी भी होती हैं। होटल कारोबारी सरदार अरविंदर सिंह और चिराग सिंह ने बताया कि भडलिया नवमी पर शादी का शुभ मुहूर्त होने पर अच्छा कारोबार होता था, लेकिन इस बार उनके होटल में सिर्फ एक ही शादी हुई। महानगर में मात्र तीन से चार होटलों में ही शादी हुई हैं। मगर, बीते वर्ष इस दिन सभी होटल, बैंक्टवेट हाल और धर्मशालाएं बुक रहती थीं। सहारनपुर बैंक्वेट एंड केटर्स एसोसिएशन के सदस्य कमल का कहना है कि कोरोना की वजह से कारोबार चौपट हो गया है। शहर के प्रमुख बैंड के संचालक कमरू, बॉबी और विमल मेहता ने बताया कि बैंड की बुकिंग नहीं हुई है। भडलिया नवमी पर भी काम ठप रहा।
छोटे आर्डर ही मिले
रायवाला निवासी कैटर्स अनिल और कोर्ट रोड के पंकज बताते हैं कि कोरोना काल में काम आधे से भी कम रह गया है। 30 से 50 लोगों के खाने की व्यवस्था करने के ही कुछ आर्डर मिले हैं। क्योंकि, कहीं भी कोई बड़ा आयोजन नहीं हो पाया है।
अब चार माह बाद शुभ मुहूर्त
श्री बालाजी धाम के संस्थापक अतुल जोशी महाराज, तहसील शिव मंदिर के अधिष्ठाता पंडित अभिषेक कृष्णात्रेय और ज्योतिषाचार्य आचार्य रोहित वशिष्ठ ने बताया कि अब चार माह बाद शादी के लिए शुभ मुहूर्त है।
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सहारनपुर। कोरोना काल के बीच भडलिया नवमी पर शुभ मुहूर्त में वर-वधू एक-दूजे के हो गए। जिले भर में करीब 70 शादियां हुईं, लेकिन ज्यादातर आयोजन घरों पर ही हुए। शहर में कुछ होटल में मात्र 25-30 लोगों ने ही सामाजिक दूरी का पालन करते हुए शादी का भोजन खाया, लेकिन फेरे घर पर ही हुए। न बैंडबाजा बजा और न ही शहनाई। डीजे की धुन पर भी नाचने से परहेज किया।
भडलिया नवमी पर शादियों का शुभ मुहूर्त और विशेष संयोग होता है, लेकिन इस बार कोरोना काल के बीच आई भडलिया नवमी पर विवाह समारोह का तरीका भी बदला नजर आया। शहर के बैंक्वेट हॉल, धर्मशालाएं तो खाली पड़ी रहे, लेकिन कुछ होटलों में सिर्फ शादी का भोजन दिया गया, जिसमें घराती और बराती सहित 30 लोग तक शामिल हुए। इसके अलावा लोगों ने घरों पर ही आयोजन कर वर-वधू के सात फेरे कराए। ऐसी स्थिति देहात क्षेत्रों में भी रही है। बड़गांव के गांव दल्हेड़ी में हुई चार शादियां हुईं, जिनमें सामाजिक दूरी का पालन करने के साथ ही बराती-घराती और वर-वधू मास्क लगाकर शामिल हुए। सरसावा निवासी राजसिंह चौहान ने अपनी बेटी रूबल की शादी गांव दल्हेड़ी गांव में शिवकुमार राणा के बेटे अभिमन्यु के साथ की। परिजनों ने बताया कि धूमधाम से शादी करने की सोची थी, लेकिन लॉकडाउन बढ़ने के साथ ही शादी की तिथि आगे बढ़ती गई, लेकिन अब भडलिया नवमी पर ही शादी कर दी। दूल्हा सिर्फ 15 लोगों के साथ बरात लेकर सरसावा गया। यहां एक पैलेस में दोनों के फेरे कराकर शादी संपन्न कराई।
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वर-वधू सहित सभी लोगों ने मास्क लगाए
दल्हेड़ी गांव से तीन लड़कों की बरात गई हुई थी और एक लड़की की बरात गांव में आई हुई थी। सोशल डिस्टेंस, मास्क सहित संक्रमण से बचाव के सभी इंतजाम पूरे कर ही शादी संपन्न हुई।
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तीन करोड़ के नुकसान का अनुमान
शहर में करीब 40 बैंक्वेट हाल हैं और होटल 30 से ज्यादा हैं। बैंक्वेट हाल बुक करने, फूलों की सजावट, बग्गी, कैटर्स आदि पर करीब 8 लाख रुपये का खर्च एक शादी में होता है। सहालग अच्छा होने पर दिन में दो शादी भी होती हैं। होटल कारोबारी सरदार अरविंदर सिंह और चिराग सिंह ने बताया कि भडलिया नवमी पर शादी का शुभ मुहूर्त होने पर अच्छा कारोबार होता था, लेकिन इस बार उनके होटल में सिर्फ एक ही शादी हुई। महानगर में मात्र तीन से चार होटलों में ही शादी हुई हैं। मगर, बीते वर्ष इस दिन सभी होटल, बैंक्टवेट हाल और धर्मशालाएं बुक रहती थीं। सहारनपुर बैंक्वेट एंड केटर्स एसोसिएशन के सदस्य कमल का कहना है कि कोरोना की वजह से कारोबार चौपट हो गया है। शहर के प्रमुख बैंड के संचालक कमरू, बॉबी और विमल मेहता ने बताया कि बैंड की बुकिंग नहीं हुई है। भडलिया नवमी पर भी काम ठप रहा।
छोटे आर्डर ही मिले
रायवाला निवासी कैटर्स अनिल और कोर्ट रोड के पंकज बताते हैं कि कोरोना काल में काम आधे से भी कम रह गया है। 30 से 50 लोगों के खाने की व्यवस्था करने के ही कुछ आर्डर मिले हैं। क्योंकि, कहीं भी कोई बड़ा आयोजन नहीं हो पाया है।
अब चार माह बाद शुभ मुहूर्त
श्री बालाजी धाम के संस्थापक अतुल जोशी महाराज, तहसील शिव मंदिर के अधिष्ठाता पंडित अभिषेक कृष्णात्रेय और ज्योतिषाचार्य आचार्य रोहित वशिष्ठ ने बताया कि अब चार माह बाद शादी के लिए शुभ मुहूर्त है।