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उपलों के जलने से निकलने वाला धुआं फैला रहा अस्थमा
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सहारनपुर। ग्रामीण क्षेत्रों में भोजन तैयार करने के लिए चूल्हा जलाने का सबसे बड़ा साधन उपले हैं। लेकिन ग्रामीण लोग उपलों के जलने से निकलने वाले धुएं के नुकसान के बारे में नहीं जानते हैं। ऐसे में वह जाने अनजाने में अस्थमा जैसी जानलेवा बीमारी का शिकार हो जाते हैं। इसके अलावा वाहनों, ईंट भट्ठों की चिमनियों आदि से निकलने वाला धुआं भी बेहद घातक रहता है।
वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. संजीव मिगलानी ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में उपलों को जलाकर भोजन तैयार किया जाता है। लेकिन उपलों के जलने से निकलने वाले धुएं में 543 प्रकार के हानिकारक तत्व होते हैं। उपलों के जलने से निकलने वाली गैसों में कार्बन मोनो ऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड आदि गैस सांस की नली को सिकोड़ देती हैं। उपलों का धुआं अस्थमा की एक वजह है। यदि कोई पहले से अस्थमा का मरीज है तो उसके लिए भी उपलों से निकलने वाला धुआं परेशानी को और बढ़ाता है। एसबीडी जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. अनिल वोहरा ने बताया कि ईंट भट्ठों की चिमनियों से निकलने वाला धुआं बेहद खतरनाक होता। इसीलिए भट्ठों को रिहायशी इलाकों से दूर करने के आदेश एनजीटी ने भी दिए हैं। यह भी बताया कि अधिक प्रदूषण की वजह से ही दिल्ली जैसे महानगरों में रहने वाले अस्थमा मरीजों को वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण की वजह से अधिक परेशानी रहती है।
अस्थमा के लक्षण
खांसी का बने रहना और सांस लेने में आवाज का आना
छाती में जकड़न रहना और सीटी बजने जैसी आवाज आना।
घुटन महसूस होना और सोते समय सांस का फूलना।
सुबह के समय अधिक खांसी होना।
अस्थमा होने के कारण
आनुवंशिक या मानसिक तनाव।
धूम्रपान या खांसी की अनदेखी करना।
सीलन वाले मकानों में रहना।
वाहनों और फैक्टरियों से निकलने वाला धुआं।
बचाव को यह करें
- धूम्रपान, धूल, धुएं, परफ्यूम आदि से बचें।
- तला, भुना भोजन ना करें।
- लक्षण आने पर तुरंत इलाज कराएं और इनहेलर का इस्तेमाल करें।
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वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. संजीव मिगलानी ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में उपलों को जलाकर भोजन तैयार किया जाता है। लेकिन उपलों के जलने से निकलने वाले धुएं में 543 प्रकार के हानिकारक तत्व होते हैं। उपलों के जलने से निकलने वाली गैसों में कार्बन मोनो ऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड आदि गैस सांस की नली को सिकोड़ देती हैं। उपलों का धुआं अस्थमा की एक वजह है। यदि कोई पहले से अस्थमा का मरीज है तो उसके लिए भी उपलों से निकलने वाला धुआं परेशानी को और बढ़ाता है। एसबीडी जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. अनिल वोहरा ने बताया कि ईंट भट्ठों की चिमनियों से निकलने वाला धुआं बेहद खतरनाक होता। इसीलिए भट्ठों को रिहायशी इलाकों से दूर करने के आदेश एनजीटी ने भी दिए हैं। यह भी बताया कि अधिक प्रदूषण की वजह से ही दिल्ली जैसे महानगरों में रहने वाले अस्थमा मरीजों को वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण की वजह से अधिक परेशानी रहती है।
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अस्थमा के लक्षण
खांसी का बने रहना और सांस लेने में आवाज का आना
छाती में जकड़न रहना और सीटी बजने जैसी आवाज आना।
घुटन महसूस होना और सोते समय सांस का फूलना।
सुबह के समय अधिक खांसी होना।
अस्थमा होने के कारण
आनुवंशिक या मानसिक तनाव।
धूम्रपान या खांसी की अनदेखी करना।
सीलन वाले मकानों में रहना।
वाहनों और फैक्टरियों से निकलने वाला धुआं।
बचाव को यह करें
- धूम्रपान, धूल, धुएं, परफ्यूम आदि से बचें।
- तला, भुना भोजन ना करें।
- लक्षण आने पर तुरंत इलाज कराएं और इनहेलर का इस्तेमाल करें।