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Saharanpur News: हाईकोर्ट पहुंचा नियुक्तियों का फर्जीवाड़ा, चार एडीओ निलंबित
Thu, 01 Aug 2024 03:41 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Thu, 01 Aug 2024 03:41 AM IST
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सहारनपुर। सहकारी समितियों में 90 नियुक्तियों का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। नए एआर को-ऑपरेटिव रवि शंकर की तरफ से हाईकोर्ट में साक्ष्य पेश किए गए हैं। वहीं, बुधवार देर शाम सहकारी समितियों में कार्यरत चार एडीओ को भी शासन ने निलंबित कर दिया है। इससे पहले मंगलवार को चार एडीसीओ का निलंबन होने की चर्चा है।
बता दें, कि इस मामले में सबसे पहली गाज तत्कालीन एआर को-ऑपरेटिव सूर्य नारायण मिश्र पर गिरी थी। उनका तबादला कर दिया गया। उनकी जगह पर आए नए एआर को-ऑपरेटिव रवि शंकर ने जांच की। जिलाधिकारी द्वारा गठित स्थानीय कमेटी और लखनऊ की टीम द्वारा छानबीन की गई। नए एआर को-ऑपरेटिव ने बुधवार को हाईकोर्ट में पक्ष रखा है। बताया है कि जांच सामने आया है कि नियुक्तियों में गड़बड़झाला हुआ है, जबकि पूर्व एआर को-ऑपरेटिव ने हाईकोर्ट में दलील दी थी कि उनको राजनीतिक षड्यंत्र के फंसाया गया है। इसके साथ ही याचिका दायर करते हुए कइयों पर आरोप भी लगाए थे। बताया था कि उनका तबादला नियम विरुद्ध किया गया है। इसी मामले में नए एआर को-ऑपरेटिव हाईकोर्ट में अभी तक हुई जांच के संबंध में जानकारी दी है। मामले में कई जनप्रतिनिधि भी फंस सकते हैं। जांच में दो विधायकों के नाम भी सामने आए हैं। रुपयों के लेनदेन के ऑडियो भी वायरल हो चुके हैं। बुधवार की शाम शासन ने एडीओ राजपाल, आलोक, दिवाकर, परवेंद्र को निलंबित कर दिया है। इनसे पहले एडीसीओ दीपक त्रिपाठी, मेहरचंद, धर्मेद्र और शमशेर के निलंबन की चर्चा है।
यह है मामला
आदर्श आचार संहिता के दौरान 46 सहकारी समितियों में 90 नियुक्तियां नियमों काे दरकिनार कर की गई थी। मामला काफी समय दबा रहा, लेकिन सहकारी समितियों के भाजपा से जुड़े सभापतियों ने मुख्यमंत्री से शिकायत की तो घोटाले की परतें खुलती चली गईं। पहली शिकायत अंबेहटा पीर सहकारी समिति के सभापति ने की थी।
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सहकारिता समितियों से जुड़े मामले में शासन ने चार एडीओ को निलंबित कर दिया है। मामले की जांच चल रही है। इसमें जो भी दोषी पाया जाएगा उस पर कार्रवाई होगी। -मनीष बंसल, जिलाधिकारी
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बता दें, कि इस मामले में सबसे पहली गाज तत्कालीन एआर को-ऑपरेटिव सूर्य नारायण मिश्र पर गिरी थी। उनका तबादला कर दिया गया। उनकी जगह पर आए नए एआर को-ऑपरेटिव रवि शंकर ने जांच की। जिलाधिकारी द्वारा गठित स्थानीय कमेटी और लखनऊ की टीम द्वारा छानबीन की गई। नए एआर को-ऑपरेटिव ने बुधवार को हाईकोर्ट में पक्ष रखा है। बताया है कि जांच सामने आया है कि नियुक्तियों में गड़बड़झाला हुआ है, जबकि पूर्व एआर को-ऑपरेटिव ने हाईकोर्ट में दलील दी थी कि उनको राजनीतिक षड्यंत्र के फंसाया गया है। इसके साथ ही याचिका दायर करते हुए कइयों पर आरोप भी लगाए थे। बताया था कि उनका तबादला नियम विरुद्ध किया गया है। इसी मामले में नए एआर को-ऑपरेटिव हाईकोर्ट में अभी तक हुई जांच के संबंध में जानकारी दी है। मामले में कई जनप्रतिनिधि भी फंस सकते हैं। जांच में दो विधायकों के नाम भी सामने आए हैं। रुपयों के लेनदेन के ऑडियो भी वायरल हो चुके हैं। बुधवार की शाम शासन ने एडीओ राजपाल, आलोक, दिवाकर, परवेंद्र को निलंबित कर दिया है। इनसे पहले एडीसीओ दीपक त्रिपाठी, मेहरचंद, धर्मेद्र और शमशेर के निलंबन की चर्चा है।
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यह है मामला
आदर्श आचार संहिता के दौरान 46 सहकारी समितियों में 90 नियुक्तियां नियमों काे दरकिनार कर की गई थी। मामला काफी समय दबा रहा, लेकिन सहकारी समितियों के भाजपा से जुड़े सभापतियों ने मुख्यमंत्री से शिकायत की तो घोटाले की परतें खुलती चली गईं। पहली शिकायत अंबेहटा पीर सहकारी समिति के सभापति ने की थी।
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सहकारिता समितियों से जुड़े मामले में शासन ने चार एडीओ को निलंबित कर दिया है। मामले की जांच चल रही है। इसमें जो भी दोषी पाया जाएगा उस पर कार्रवाई होगी। -मनीष बंसल, जिलाधिकारी