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कहीं जर्जर तो कहीं किराए पर चल रहा आंगनबाड़ी केंद्र

Tue, 05 Oct 2021 11:45 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 05 Oct 2021 11:45 PM IST
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Anganwadi centers running on rent somewhere in a dilapidated place
गांव कहादपुर में खड़हर हुआ आंगनबाड़ी केंद्र - फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। सरकार की योजना आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री-प्राइमरी के रूप में संचालित करने की है, लेकिन संसाधनों के लिहाज से इसमें कई बाधाएं हैं। क्योंकि जिले में कहीं पर तो आंगनबाड़ी केंद्र किराए के भवन में संचालित हो रहा है तो कहीं जर्जर भवन में। दरअसल, जनपद में 3410 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इनमें से 385 किराए पर चल रहे हैं और 185 जर्जर स्थिति में हैं। हालांकि कई भवन अच्छे भी हैं, लेकिन जो जर्जर हैं उन्हें सुधारने की दिशा में काम नहीं हो रहा है। ग्राम पंचायत निधि से इनका सुधार होना है, लेकिन लंबे समय से स्थिति बदतर ही है। ऐसे में केंद्रों को प्री प्राइमरी के रूप में विकसित करना काफी मुश्किल होगा।
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भवन खराब, पेड़ के नीचे चलता है केंद्र
नागल क्षेत्र के गांव इसहाकपुर में आंगनबाड़ी केंद्र का भवन की हालत दयनीय है। ऐसे में पेड़ के नीचे और बारिश होने की दशा में प्राथमिक विद्यालय के कमरे का इस्तेमाल करना पड़ता है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता लक्ष्मी दीक्षित ने बताया कि व्यवस्था दुरुस्त न होने की वजह से दिक्कत आती है।
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भर जाता है बरसात का पानी
गांव नथमलपुर में आंगनबाड़ी केंद्र गांव के बाहर ऐसे स्थान पर बना हुआ है, जहां बरसात में पानी भर जाता है, जिससे केंद्र पर जाने के लिए रास्ता बंद हो जाता है।
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नहीं हो सका मरम्मत कार्य
देवबंद ब्लॉक क्षेत्र के 15 आंगनबाड़ी केंद्र किराए पर चल रहे हैं, लेकिन इनका किराया भी पिछले करीब एक साल से स्वीकृत नहीं हुआ। सीडीपीओ शिमला चौधरी ने बताया कि ग्राम पंचायत निधि से आंगनबाड़ी केंद्रों की मरम्मत और निर्माण होना है। कई बार पत्र लिखने के बावजूद सुनवाई नहीं होती है।
किराए का पैसा भी नहीं मिल रहा
गांव तिड़फुवा में किराए के भवन में केंद्र बना है, जो कोरोना काल से बंद पड़ा है। कार्यकर्ता ललतेश देवी का कहना है कि व्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा है, जिससे दिक्कत आती है। भवन स्वामी खुर्शीद का कहना है कि उन्हें किराया ही नहीं मिल रहा है।
भवन बना और होता जा रहा खंडहर में तब्दील
साढ़ौली कदीम के गांव कवादपुर में पिछले चार वर्ष पूर्व आंगनबाड़ी केंद्र बनकर तैयार हुआ, लेकिन महिला कार्यकर्ता की नियुक्ति आज तक नहीं हो पाई है, जिसके चलते भवन खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। यहां के बच्चे पास के गांव रसूलपुर में जाते हैं।

एक नजर आंकड़ों पर
- 3410 आंगनबाड़ी केंद्र और 3346 हैं कार्यकर्ता
- 385 केंद्र किराए के भवनों में चल रहे और 185 जर्जर
- कुपोषित बच्चों की संख्या 20 हजार और अत्यंत कुपोषित 1246
- 30 हजार गर्भवती महिलाएं और 33 हजार धात्री।

गांव इस्हाकपुर में खंडहर हुआ आंगनबाड़ी केंद्र

गांव इस्हाकपुर में खंडहर हुआ आंगनबाड़ी केंद्र- फोटो : SAHARANPUR

गांव तिड़फवा में किराए के भवन में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र

गांव तिड़फवा में किराए के भवन में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र- फोटो : SAHARANPUR

आंगनबाड़ी केंद्र गांव नथमलपुर

आंगनबाड़ी केंद्र गांव नथमलपुर- फोटो : SAHARANPUR

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