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Saharanpur News: पिता की छड़ी बनी अमीषा, अब बना रहीं भाई-बहनों की राह
Sun, 06 Jul 2025 12:41 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sun, 06 Jul 2025 12:41 AM IST
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हमारी बेटियां- अमीषा
नकुड़। गांव ढकदेई निवासी अमीषा के पिता दाहिने हाथ से दिव्यांग थे। बेटी अमीषा ने अपने पिता को उनकी दिव्यांगता का कभी अहसास नहीं होने दिया। पढ़ाई जारी रखने के साथ अमीषा ने खेत के काम में पिता का हाथ बंटाया और उनके निधन के बाद सिलाई करके और ट्यूशन पढ़ाकर परिवार का आर्थिक सहयोग भी किया। अमीषा ने बताया कि वह छह बहनें व सबसे छोटा एक भाई है। उनके पिता बिरम सिंह दाहिने हाथ से दिव्यांग थे। इसके अलावा पांचवें नंबर की छोटी बहन और भाई भी एक-एक आंख से दिव्यांग हैं। पिता के पास करीब पंद्रह बीघा कृषि भूमि है, जिससे घर का गुजारा नहीं होता था। पिछले साल आठ नवंबर को बीमारी के कारण उनके पिता का निधन हो गया था, जिसके बाद परिवार आर्थिक रूप से संकट में आ गया, लेकिन अमीषा ने हार नहीं मानी।
पढ़ाई के साथ-साथ लोगों के कपड़ों की सिलाई करके व बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर अपनी व अपने भाई-बहनों की पढ़ाई जारी रखी। बताया कि पिता के सामने ही उसकी बड़ी बहन की शादी हो गई थी। बड़ी बहन की शादी के बाद अगला नंबर उसी का था, लेकिन उसने घर की जिम्मेदारी अपने हाथों में लेते हुए कुछ माह पूर्व ही अपनी छोटी बहन की शादी धूमधाम से कराई। अमीषा बीए, बीएड करने के बाद एमए व बीएलएड की पढ़ाई कर रही है। करीब एक माह पूर्व ही उसकी जवाहर नवोदय विद्यालय, बटोत रामबन जम्मू-कश्मीर में नौकरी लग गई है।
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पढ़ाई के साथ-साथ लोगों के कपड़ों की सिलाई करके व बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर अपनी व अपने भाई-बहनों की पढ़ाई जारी रखी। बताया कि पिता के सामने ही उसकी बड़ी बहन की शादी हो गई थी। बड़ी बहन की शादी के बाद अगला नंबर उसी का था, लेकिन उसने घर की जिम्मेदारी अपने हाथों में लेते हुए कुछ माह पूर्व ही अपनी छोटी बहन की शादी धूमधाम से कराई। अमीषा बीए, बीएड करने के बाद एमए व बीएलएड की पढ़ाई कर रही है। करीब एक माह पूर्व ही उसकी जवाहर नवोदय विद्यालय, बटोत रामबन जम्मू-कश्मीर में नौकरी लग गई है।
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