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रोजमर्रा के सामान लेने में भी उठानी पड़ी परेशानी
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Thu, 10 Nov 2016 01:06 AM IST
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पेट्रोल लेने के लिए लगी लाइन।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर में एक हजार एवं पांच सौ के नोटों के प्रचलन पर रोक लगने से बाजारों में सन्नाटा पसर गया। बड़े नोट लेकर खरीददारी के लिए निकले लोगों से दुकानदारों ने बड़े नोट लेने से इंकार ही कर दिया।
सब्जी तक खरीदने के लिए लोग परेशान हो गए। दुकानों पर दिन भर वीरानी सी छाई रही। दुकानदारों का कारोबार पूरी तरह से ठप हो गया। छोटे नोटों की किल्लत इतनी अधिक हो गई कि पेट्रोल पंप संचालकों ने बड़े नोट लेने से इंकार तो नहीं किया लेकिन जितने का नोट दिया, उतने का ही पेट्रोल दे दिया।
सुबह सब्जी लेने गईं गीता शर्मा ने बताया कि उनके पास सौ-सौ के सिर्फ 2 ही नोट थे। जबकि दो पांच-पांच सौ के नोट थे। कुछ राशन लेना था और सब्जी लेनी थी।
उन्होंने तीन सौ बीस रुपये की सब्जी ले ली और दुकानदार को पांच सौ का नोट दिया तो उसने दूर से ही फेंकते हुए कहा कि सौ-सौ के नोट हैं तो दे दो, नहीं तो सब्जी वापस कर दो। उनके पास खुले दो सौ ही रुपये थे उसकी ही सब्जी ले ली।
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राशन की दुकान पर गईं तो सबसे पहले परचून की दुकान वाले ने यही पूछ लिया कि पांच सौ या हजार का नोट तो नहीं है, वह नहीं लिया जाएगा। ऐसे में बिना राशन लिए ही वापस लौटना पड़ा। अब तो घर में भी सिर्फ पांच सौ का ही नोट बचा है।
खुला एक रुपया भी नहीं है। जनरल स्टोर संचालक महेश का कहना था कि सुबह से शाम हो गई, लेकिन आज दुकानदारी कुछ भी नहीं हो सकी। सामान ज्यों की त्यों ही रखा है। ग्राहक तो आए, लेकिन सभी पांच सौ और हजार के नोट लेकर आए।
सौ रुपये लेकर तो दो चार लोग ही आए। पूरा दिन सूना ही रहा। सिर्फ एक दुकानदार की नहीं, शहर के हर बाजार की यही स्थिति नजर आई। दुकानदार खाली ही बैठे नजर आए।
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सब्जी तक खरीदने के लिए लोग परेशान हो गए। दुकानों पर दिन भर वीरानी सी छाई रही। दुकानदारों का कारोबार पूरी तरह से ठप हो गया। छोटे नोटों की किल्लत इतनी अधिक हो गई कि पेट्रोल पंप संचालकों ने बड़े नोट लेने से इंकार तो नहीं किया लेकिन जितने का नोट दिया, उतने का ही पेट्रोल दे दिया।
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सुबह सब्जी लेने गईं गीता शर्मा ने बताया कि उनके पास सौ-सौ के सिर्फ 2 ही नोट थे। जबकि दो पांच-पांच सौ के नोट थे। कुछ राशन लेना था और सब्जी लेनी थी।
उन्होंने तीन सौ बीस रुपये की सब्जी ले ली और दुकानदार को पांच सौ का नोट दिया तो उसने दूर से ही फेंकते हुए कहा कि सौ-सौ के नोट हैं तो दे दो, नहीं तो सब्जी वापस कर दो। उनके पास खुले दो सौ ही रुपये थे उसकी ही सब्जी ले ली।
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राशन की दुकान पर गईं तो सबसे पहले परचून की दुकान वाले ने यही पूछ लिया कि पांच सौ या हजार का नोट तो नहीं है, वह नहीं लिया जाएगा। ऐसे में बिना राशन लिए ही वापस लौटना पड़ा। अब तो घर में भी सिर्फ पांच सौ का ही नोट बचा है।
खुला एक रुपया भी नहीं है। जनरल स्टोर संचालक महेश का कहना था कि सुबह से शाम हो गई, लेकिन आज दुकानदारी कुछ भी नहीं हो सकी। सामान ज्यों की त्यों ही रखा है। ग्राहक तो आए, लेकिन सभी पांच सौ और हजार के नोट लेकर आए।
सौ रुपये लेकर तो दो चार लोग ही आए। पूरा दिन सूना ही रहा। सिर्फ एक दुकानदार की नहीं, शहर के हर बाजार की यही स्थिति नजर आई। दुकानदार खाली ही बैठे नजर आए।