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मदरसों को सरकारी अनुदान से दूर रखने पर उलमा सहमत
ब्यूरो/अमर उजाला, देवबंद
Updated Mon, 12 Mar 2018 11:49 PM IST
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दारूल उलूम के इजलास में प्रस्ताव पर चर्चा करते उलमा।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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दारुल उलूम में चल रहे दो दिवसीय राब्ता-ए-मदारिस-ए-इस्लामिया अरबिया के इजलास के अंतिम दिन मदरसों को सरकारी अनुदान से दूर रखने और इनको कानूनी पहलू से मजबूत बनाने समेत आठ महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। देश के कोने कोने से आए प्रमुख उलमा ने इजलास में यह भी कहा कि मदरसों के खिलाफ जारी शरीयत विरोधी पॉलिसियों पर रोक लगाई जाए।
एशिया की प्रसिद्ध मस्जिद रशीदिया में आयोजित हुई राब्ता-ए-मदारिस-ए-इस्लामिया अरबिया के अंतिम चरण की बैठक में दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी ने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि तमाम मदरसों के जिम्मेदार वर्तमान हालात में इदारों की हिफाजत और सुधार के लिए इंकलाबी कदम उठाएं।
उन्होंने कहा कि इस वक्त पूरे मुल्क में जो हालात पैदा हो गए हैं उसके मद्देनजर मदरसा संचालकों की जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं। मदरसों के खिलाफ किए जाने वाले दुष्प्रचार पर सख्त नजर रखने के साथ ही सरकारी अनुदान न लें। जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैय्यद अरशद मदनी ने मदरसों के पाठ्यक्रम और उसमें बदलाव को लेकर कहा कि मदरसों का पाठ्यक्रम जिस बुनियाद कायम है उसको इसी तरह बाकी रखना जरूरी है।
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उन्होंने कहा कि मदारिस-ए-इस्लामिया का बुनियादी मकसद शरीयत के इल्मी व दीनी विरासत को उसी शक्ल में महफूज रखना जरूरी है। जिसमें किसी भी तरह का बदलाव नहीं होना चाहिए। इस्लामिक फिकह एकेडमी के महासचिव मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने कहा कि शिक्षा के साथ साथ मदरसा छात्रों की तरबियत पर भी अधिक ध्यान देने की जरूरत है। क्योंकि यहां से निकलने वाले छात्र ही दूसरों के सामने इस्लाम की सही तस्वीर पेश करते हैं।
जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने मदरसों के अंदरूनी हालात व आर्थिक व्यवस्था को दुरुस्त बनाने पर जोर दिया। इस दौरान प्रमुख उलमा की मौजूदगी में आठ प्रस्ताव पेश किए गए।
जिस पर संगठन से जुड़े सभी सदस्यों ने हाथ उठाकर सहमति जताई। अध्यक्षता मौलान अबुल कासिम नोमानी व संचालन मौलाना शौकत अली ने किया। इस मौके पर मुफ्ती सईद अहमद पालनपुरी, मौलाना बदरुद्दीन अजमल, मौलाना हबीबुर्रहमान आजमी, मुफ्ती हबीबुर्रहमान खैराबादी, मौलाना सुफियान कासमी, मौलाना कमरुद्दीन, मौलाना कारी मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी, मौलाना अब्दुल खालिक मद्रासी, मौलाना नेमतुल्ला आजमी, मौलाना अब्दुल खालिक संभली, मौलाना रहमतुल्लाह कश्मीरी, मौलाना मुफ्ती इस्माईल मालेगांव, मौलाना इब्राहीम मलिक, मुफ्ती अहमद गुजराती, मौलाना नूरुल रहमान बिजनौरी आदि मौजूद रहे।
मौलाना महमूद खीरी, मौलाना निजामुद्दीन खामोश, मौलाना अशफाक सराय मीर, मौलाना मतीनुलहक उसामा कासमी कानपुरी, मौलाना अब्दुल कवी हैदराबाद, मौलाना सिद्दीक उल्लाह चौधरी कोलकाता आदि मौजूद रहे।
इजलास में यह प्रस्ताव हुए पारित
1. मदरसों के अंदरूनी निजाम को बेहतर से बेहतर बनाने, शूरा की व्यवस्था को सुदृढ़ करने, मदरसे के आय व्यय का ऑडिट कराने।
2. मदरसों को कानूनी पहलू से मजबूत बनाया जाने, मदरसों की संपत्ति के कागजात दरुस्त रखे जाएं, रजिस्ट्रेशन अवश्य कराएं और कोई ऐसी कमी न छोड़े जिससे सरकार को हस्तक्षेप का मौका मिले।
3. संस्था में आने वालों पर सख्ती से निगाह रखने, मदरसे की मद्द करने वाले व्यक्ति के बारे में जानकारी हासिल किए जाने।
4. मदरसों को हर प्रकार की सरकारी मदद से दूर रखा जाए।
5. मदरसों के समस्त कार्यों में शरई उसूलों को बरकरार रखना।
6. दूसरे धर्म के लोगों से करीबियां बढ़ाने और उनको दीनी इदारों के साफ सुथरे किरदार से रुबरु कराएं।
7. मदरसे एक दूसरे की मदद करें और प्रतिस्पर्धा न रखें।
8. समाज सुधार के लिए लगातार कार्य किए जाएं।
मदरसों के खिलाफ दुष्प्रचार करने वाले देश के दुश्मन : चौधरी
देवबंद। ममता बनर्जी सरकार के मंत्री व जमीयत उलमा-ए-हिंद के पश्चिम बंगाल के अध्यक्ष मौलाना सिद्दीक उल्लाह चौधरी ने कहा कि सरकार की विरोधी नीतियां और इस्लाम दुश्मन ताकतों के दुष्प्रचार के खिलाफ सभी मदरसा संचालकों को एकजुट होना चाहिए। राब्ता-ए-मदारिस-ए-इस्लामिया अरबिया के इजलास में शामिल होने देवबंद पहुंचे मौलाना सिद्दीक उल्लाह चौधरी ने कहा कि इस वक्त पूरे देश में मुसलमानों को निशाना जा रहा है।
जिसकी वजह से पूरे मुल्क में अफरा तफरी का माहौल है। असामाजिक तत्व माहौल खराब करने की नीयत से अल्पसंख्यकों को निशाना बना रहे हैं। आरोप लगाया कि पुलिस भी भेदभाव पूर्ण रवैया अपनाते हुए बेकसूर लोगों को झूठे मुकदमों में फंसाकर जेल भेज रही है। ऐसे में सबकी जिम्मेदारी है कि भेदभाव किए बिना निर्दोष लोगों की मद्द की जाए। उन्होंने कहा कि मदरसे के छात्र व टोपी-दाढ़ी वाले लोग असामाजिक तत्वों के निशाने पर हैं।
जिनसे बचने के लिए ठोस रणनीति बनाए जाने की जरूरत है। भारतीय मुसलमानों को बड़ी बड़ी हस्तियां डराने धमकाने पर तुली हुई हैं और पूरे मुल्क के माहौल को खराब करने की कोशिशें की जा रही हैं। मौलाना सिद्दीक उल्लाह चौधरी ने कहा कि आजादी की तहरीक (आंदोलन) में मदारिस-ए-इस्लामिया और उलमा ने बेहिसाब कुर्बानियां दी हैं।
इसके अलावा तमाम मदरसे आजादी के बाद भी देश को अमन पसंद बनाने की दिशा में अहम किरदार अदा कर रहे हैं। मदरसों के खिलाफ दुष्प्रचार करने वाले मुसलमानों के ही नहीं बल्कि देश के भी दुश्मन हैं।
अयोध्या पर भैया जी जोशी का बयान निंदनीय : इस्माईल
देवबंद। दारुल उलूम की सुप्रीम पावर मजलिस-ए-शूरा के वरिष्ठ सदस्य मौलाना इस्माईल मालेगांव ने बाबरी मस्जिद मुद्दे पर संघ के सरकार्यवाह सुरेश भैया जी जोशी के बयान की निंदा करते हुए उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग की।
सोमवार को पत्रकारों से बात करते हुए मौलाना इस्माईल मालेगांव ने कहा कि बाबरी मस्जिद का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। इसलिए इसका फैसला आने तक इंतजार किया जाना चाहिए। बाबरी मस्जिद जैसे नाजुक मामले में सियासत करने से बचने का मशविरा देते हुए मौलाना इस्माईल ने कहा कि हिंदुस्तान के अदालती निजाम पर जिन लोगों को भरोसा है उन्हें अदालत के फैसले का इंतजार करना चाहिए।
भैया जी जोशी का बयान अदालत को चैलेंज करने वाला है। कोर्ट के इस मामले पर खुद संज्ञान लेते हुए ऐसी बयानबाजी और मीडिया डिबेट पर रोक लगानी चाहिए। कहा कि सरकार से हमारी शिकायतें अपनी जगह हैं, लेकिन आज हमारे सामने सबसे बड़ा चैलेंज ये है कि हम अपने अधिकारों का बेहतर तरीके से इस्तेमाल नहीं करते।
जबकि दूसरे लोग सरकार के सामने सीना तानकर अपनी बात कहने से कोई गुरेज नहीं करते। जो लोग मुसलमानों को पाकिस्तान भेजने की बात करते हैं वो शायद भूल गए हैं कि इस मुल्क की आजादी से लेकर आज तक मुसलमानों ने ही कुर्बानियां दी हैं। उन्होंने कहा कि हम अपनी विचारधारा, आस्था और धर्म की हिफाजत के लिए हर तरह की कुर्बानियां देने को तैयार हैं।
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एशिया की प्रसिद्ध मस्जिद रशीदिया में आयोजित हुई राब्ता-ए-मदारिस-ए-इस्लामिया अरबिया के अंतिम चरण की बैठक में दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी ने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि तमाम मदरसों के जिम्मेदार वर्तमान हालात में इदारों की हिफाजत और सुधार के लिए इंकलाबी कदम उठाएं।
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उन्होंने कहा कि इस वक्त पूरे मुल्क में जो हालात पैदा हो गए हैं उसके मद्देनजर मदरसा संचालकों की जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं। मदरसों के खिलाफ किए जाने वाले दुष्प्रचार पर सख्त नजर रखने के साथ ही सरकारी अनुदान न लें। जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैय्यद अरशद मदनी ने मदरसों के पाठ्यक्रम और उसमें बदलाव को लेकर कहा कि मदरसों का पाठ्यक्रम जिस बुनियाद कायम है उसको इसी तरह बाकी रखना जरूरी है।
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उन्होंने कहा कि मदारिस-ए-इस्लामिया का बुनियादी मकसद शरीयत के इल्मी व दीनी विरासत को उसी शक्ल में महफूज रखना जरूरी है। जिसमें किसी भी तरह का बदलाव नहीं होना चाहिए। इस्लामिक फिकह एकेडमी के महासचिव मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने कहा कि शिक्षा के साथ साथ मदरसा छात्रों की तरबियत पर भी अधिक ध्यान देने की जरूरत है। क्योंकि यहां से निकलने वाले छात्र ही दूसरों के सामने इस्लाम की सही तस्वीर पेश करते हैं।
जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने मदरसों के अंदरूनी हालात व आर्थिक व्यवस्था को दुरुस्त बनाने पर जोर दिया। इस दौरान प्रमुख उलमा की मौजूदगी में आठ प्रस्ताव पेश किए गए।
जिस पर संगठन से जुड़े सभी सदस्यों ने हाथ उठाकर सहमति जताई। अध्यक्षता मौलान अबुल कासिम नोमानी व संचालन मौलाना शौकत अली ने किया। इस मौके पर मुफ्ती सईद अहमद पालनपुरी, मौलाना बदरुद्दीन अजमल, मौलाना हबीबुर्रहमान आजमी, मुफ्ती हबीबुर्रहमान खैराबादी, मौलाना सुफियान कासमी, मौलाना कमरुद्दीन, मौलाना कारी मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी, मौलाना अब्दुल खालिक मद्रासी, मौलाना नेमतुल्ला आजमी, मौलाना अब्दुल खालिक संभली, मौलाना रहमतुल्लाह कश्मीरी, मौलाना मुफ्ती इस्माईल मालेगांव, मौलाना इब्राहीम मलिक, मुफ्ती अहमद गुजराती, मौलाना नूरुल रहमान बिजनौरी आदि मौजूद रहे।
मौलाना महमूद खीरी, मौलाना निजामुद्दीन खामोश, मौलाना अशफाक सराय मीर, मौलाना मतीनुलहक उसामा कासमी कानपुरी, मौलाना अब्दुल कवी हैदराबाद, मौलाना सिद्दीक उल्लाह चौधरी कोलकाता आदि मौजूद रहे।
इजलास में यह प्रस्ताव हुए पारित
1. मदरसों के अंदरूनी निजाम को बेहतर से बेहतर बनाने, शूरा की व्यवस्था को सुदृढ़ करने, मदरसे के आय व्यय का ऑडिट कराने।
2. मदरसों को कानूनी पहलू से मजबूत बनाया जाने, मदरसों की संपत्ति के कागजात दरुस्त रखे जाएं, रजिस्ट्रेशन अवश्य कराएं और कोई ऐसी कमी न छोड़े जिससे सरकार को हस्तक्षेप का मौका मिले।
3. संस्था में आने वालों पर सख्ती से निगाह रखने, मदरसे की मद्द करने वाले व्यक्ति के बारे में जानकारी हासिल किए जाने।
4. मदरसों को हर प्रकार की सरकारी मदद से दूर रखा जाए।
5. मदरसों के समस्त कार्यों में शरई उसूलों को बरकरार रखना।
6. दूसरे धर्म के लोगों से करीबियां बढ़ाने और उनको दीनी इदारों के साफ सुथरे किरदार से रुबरु कराएं।
7. मदरसे एक दूसरे की मदद करें और प्रतिस्पर्धा न रखें।
8. समाज सुधार के लिए लगातार कार्य किए जाएं।
मदरसों के खिलाफ दुष्प्रचार करने वाले देश के दुश्मन : चौधरी
देवबंद। ममता बनर्जी सरकार के मंत्री व जमीयत उलमा-ए-हिंद के पश्चिम बंगाल के अध्यक्ष मौलाना सिद्दीक उल्लाह चौधरी ने कहा कि सरकार की विरोधी नीतियां और इस्लाम दुश्मन ताकतों के दुष्प्रचार के खिलाफ सभी मदरसा संचालकों को एकजुट होना चाहिए। राब्ता-ए-मदारिस-ए-इस्लामिया अरबिया के इजलास में शामिल होने देवबंद पहुंचे मौलाना सिद्दीक उल्लाह चौधरी ने कहा कि इस वक्त पूरे देश में मुसलमानों को निशाना जा रहा है।
जिसकी वजह से पूरे मुल्क में अफरा तफरी का माहौल है। असामाजिक तत्व माहौल खराब करने की नीयत से अल्पसंख्यकों को निशाना बना रहे हैं। आरोप लगाया कि पुलिस भी भेदभाव पूर्ण रवैया अपनाते हुए बेकसूर लोगों को झूठे मुकदमों में फंसाकर जेल भेज रही है। ऐसे में सबकी जिम्मेदारी है कि भेदभाव किए बिना निर्दोष लोगों की मद्द की जाए। उन्होंने कहा कि मदरसे के छात्र व टोपी-दाढ़ी वाले लोग असामाजिक तत्वों के निशाने पर हैं।
जिनसे बचने के लिए ठोस रणनीति बनाए जाने की जरूरत है। भारतीय मुसलमानों को बड़ी बड़ी हस्तियां डराने धमकाने पर तुली हुई हैं और पूरे मुल्क के माहौल को खराब करने की कोशिशें की जा रही हैं। मौलाना सिद्दीक उल्लाह चौधरी ने कहा कि आजादी की तहरीक (आंदोलन) में मदारिस-ए-इस्लामिया और उलमा ने बेहिसाब कुर्बानियां दी हैं।
इसके अलावा तमाम मदरसे आजादी के बाद भी देश को अमन पसंद बनाने की दिशा में अहम किरदार अदा कर रहे हैं। मदरसों के खिलाफ दुष्प्रचार करने वाले मुसलमानों के ही नहीं बल्कि देश के भी दुश्मन हैं।
अयोध्या पर भैया जी जोशी का बयान निंदनीय : इस्माईल
देवबंद। दारुल उलूम की सुप्रीम पावर मजलिस-ए-शूरा के वरिष्ठ सदस्य मौलाना इस्माईल मालेगांव ने बाबरी मस्जिद मुद्दे पर संघ के सरकार्यवाह सुरेश भैया जी जोशी के बयान की निंदा करते हुए उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग की।
सोमवार को पत्रकारों से बात करते हुए मौलाना इस्माईल मालेगांव ने कहा कि बाबरी मस्जिद का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। इसलिए इसका फैसला आने तक इंतजार किया जाना चाहिए। बाबरी मस्जिद जैसे नाजुक मामले में सियासत करने से बचने का मशविरा देते हुए मौलाना इस्माईल ने कहा कि हिंदुस्तान के अदालती निजाम पर जिन लोगों को भरोसा है उन्हें अदालत के फैसले का इंतजार करना चाहिए।
भैया जी जोशी का बयान अदालत को चैलेंज करने वाला है। कोर्ट के इस मामले पर खुद संज्ञान लेते हुए ऐसी बयानबाजी और मीडिया डिबेट पर रोक लगानी चाहिए। कहा कि सरकार से हमारी शिकायतें अपनी जगह हैं, लेकिन आज हमारे सामने सबसे बड़ा चैलेंज ये है कि हम अपने अधिकारों का बेहतर तरीके से इस्तेमाल नहीं करते।
जबकि दूसरे लोग सरकार के सामने सीना तानकर अपनी बात कहने से कोई गुरेज नहीं करते। जो लोग मुसलमानों को पाकिस्तान भेजने की बात करते हैं वो शायद भूल गए हैं कि इस मुल्क की आजादी से लेकर आज तक मुसलमानों ने ही कुर्बानियां दी हैं। उन्होंने कहा कि हम अपनी विचारधारा, आस्था और धर्म की हिफाजत के लिए हर तरह की कुर्बानियां देने को तैयार हैं।