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बारिश के बाद बीमारियों का खतरा बढ़ा
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Sat, 30 Jul 2016 01:17 AM IST
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वर्षा
- फोटो : अमर उजाला
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सहारनपुर में मानसून की दस्तक के साथ बरसात ने गर्मी से तो राहत दी है। लेकिन, इस बारिश ने स्वास्थ्य विभाग के लिए खतरे की घंटी भी बजा दी है। बरसाती मौसम में ही अब मलेरिया, डेंगू और डायरिया जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ेंगी।
दिमागी बुखार से बचाव के लिए तो जिले में पहले ही जागरूकता के नाम पर खूब शोरशराबा हो रहा है। मौसम में आए बदलाव के साथ ही सरकारी और निजी चिकित्सालयों में रोजाना आने वाले रोगियों की संख्या में इजाफे की संभावना जताई जा रही है।
याद दिलाएं कि पिछले साल भी बरसात के मौसम में ही नकुड़, गंगोह, सरसावा, देवबंद और बेहट क्षेत्र में सबसे अधिक किशोरों की मौत मलेरिया, डेंगू और डायरिया के लक्षणों से हुई थी। खुद मलेरिया विभाग ने भी इस बार के लिए इन क्षेत्रों को अधिक संवेदनशील माना है।
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लेकिन, इसके बावजूद बरसाती मौसम में बीमारियों के नियंत्रण के लिए कार्ययोजना अब तक कागजों से बाहर नहीं आ पाई है। तीन साल पहले तो मलेरिया इससे भी अधिक कहर ढा चुका है।
मलेरिया के कारण तब जिले में 400 से भी अधिक मौतें हुई थीं, जबकि काफी संख्या में मलेरिया के संवेदनशील मरीज मिले थे। हैरानी की बात यह है कि इस सच को जानने के बावजूद सरकारी आंकड़ों में स्वास्थ्य विभाग मलेरिया, डेंगू या अन्य बीमारियों का असर वास्तविकता के मुकाबले महज 30 से 40 फीसदी ही दिखाता है।
जिला चिकित्सालय से लेकर सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों से लेकर लैब टैक्नीशियनों जैसे स्टाफ की कमी भी मरीजों की सेहत पर भारी पड़ सकती है। इस बारे में सीएमओ सईद मोहम्मद का कहना है कि बरसाती मौसम में रोगों पर नियंत्रण के लिए टीमों को तैयार किया जा रहा है। इसमें किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाएगी।
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दिमागी बुखार से बचाव के लिए तो जिले में पहले ही जागरूकता के नाम पर खूब शोरशराबा हो रहा है। मौसम में आए बदलाव के साथ ही सरकारी और निजी चिकित्सालयों में रोजाना आने वाले रोगियों की संख्या में इजाफे की संभावना जताई जा रही है।
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याद दिलाएं कि पिछले साल भी बरसात के मौसम में ही नकुड़, गंगोह, सरसावा, देवबंद और बेहट क्षेत्र में सबसे अधिक किशोरों की मौत मलेरिया, डेंगू और डायरिया के लक्षणों से हुई थी। खुद मलेरिया विभाग ने भी इस बार के लिए इन क्षेत्रों को अधिक संवेदनशील माना है।
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लेकिन, इसके बावजूद बरसाती मौसम में बीमारियों के नियंत्रण के लिए कार्ययोजना अब तक कागजों से बाहर नहीं आ पाई है। तीन साल पहले तो मलेरिया इससे भी अधिक कहर ढा चुका है।
मलेरिया के कारण तब जिले में 400 से भी अधिक मौतें हुई थीं, जबकि काफी संख्या में मलेरिया के संवेदनशील मरीज मिले थे। हैरानी की बात यह है कि इस सच को जानने के बावजूद सरकारी आंकड़ों में स्वास्थ्य विभाग मलेरिया, डेंगू या अन्य बीमारियों का असर वास्तविकता के मुकाबले महज 30 से 40 फीसदी ही दिखाता है।
जिला चिकित्सालय से लेकर सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों से लेकर लैब टैक्नीशियनों जैसे स्टाफ की कमी भी मरीजों की सेहत पर भारी पड़ सकती है। इस बारे में सीएमओ सईद मोहम्मद का कहना है कि बरसाती मौसम में रोगों पर नियंत्रण के लिए टीमों को तैयार किया जा रहा है। इसमें किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाएगी।