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प्रशासन ने शुरू की तालाब पर कॉलोनी काटे जाने की जांच
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सहारनपुर। नवादा रोड स्थित तालाब की भूमि पर कॉलोनी काटने के मामले में सदर तहसील ने कार्रवाई शुरू कर दी है। तालाब की भूमि के कागज निकलवाए गए हैं, जिसके बाद जांच शुरू कर दी गई है। जल्द ही अधिकारी मौके पर जाकर भूमि की भौतिक जांच करेंगे। तालाब की भूमि पर कॉलोनी काटने वालों पर कार्रवाई होना तय माना जा रहा है।
नवादा रोड स्थित इस तालाब की भूमि पर करीब 12 वर्ष पूर्व से कॉलोनी काटने के मामले को अमर उजाला ने तीन जनवरी के संस्करण में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद नगरायुक्त ज्ञानेंद्र सिंह ने खबर का संज्ञान लिया था। चूंकि कॉलोनी काटने का मामला नगर निगम के गठन से पहले का है, तो नगरायुक्त ने मामले में एक पत्र सदर तहसील को लिखने के निर्देश सहायक नगरायुक्त अशोक प्रिय गौतम को दिए थे। सहायक नगरायुक्त ने सदर तहसील को पत्र लिखा है, जिसके बाद सदर तहसील प्रशासन हरकत में आया है। तहसीलदार ने तालाब के कागज निकलवाए हैं, जिसकी जांच भी शुरू कर दी है। इसी सप्ताह तहसील की टीम मौके पर जाकर तालाब की भूमि का मुआयना करेगी।
कॉलोनी काटने वालों में हड़कंप
कॉलोनी काटने का मामला 12 वर्ष से अधिक पुराना है। सूत्रों ने बताया कि तालाब की भूमि पर कॉलोनी काटने में तब के एक नेता की बड़ी भूमिका थी। दावा यह भी किया जा रहा है कि सेटिंग के जरिए ही तालाब की भूमि की चकबंदी कर भूमि एक व्यक्ति के नाम कराई गई थी। निगम अधिकारियों का कहना है कि चकबंदी में भूमि जिन लोगों के नाम हुई थी। वह भूमिधर हुए बिना बैनामे नहीं कर सकते थे। मगर सेटिंग कर पूरा खेल खेला गया। अब जांच बैठने के बाद उक्त लोगों में हड़कंप की स्थिति है।
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प्लॉट खरीदारों में भय
कॉलोनी निवासी संजय कुमार ने बताया कि जिस भूमि को अब तालाब की भूमि बताया जा रहा है। प्लॉट खरीदते समय इसकी जानकारी क्रेताओं को नहीं थी। संजय ने बताया कि उक्त भूमि पर प्लॉट खरीदने वाले ज्यादातर लोग बेहद गरीब लोग हैं, जिनमें कई मजदूर और रिक्शा चालक तक हैं। जांच की बात सामने आने के बाद से सभी लोग डरे हुए हैं।
नगर निगम की ओर से एक पत्र आया है, जिसमें नवादा रोड पर तालाब की भूमि पर कॉलोनी काटने की बात कही गई है। संबंधित भूमि के कागज निकलवाए गए हैं। जांच शुरू कर दी गई है। इसी सप्ताह टीम मौके पर जाएगी। जिन्होंने भी तालाब की भूमि के बैनामे किए हैं। उन पर कार्रवाई होगी।
- गोपेश तिवारी, तहसीलदार, सदर।
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नवादा रोड स्थित इस तालाब की भूमि पर करीब 12 वर्ष पूर्व से कॉलोनी काटने के मामले को अमर उजाला ने तीन जनवरी के संस्करण में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद नगरायुक्त ज्ञानेंद्र सिंह ने खबर का संज्ञान लिया था। चूंकि कॉलोनी काटने का मामला नगर निगम के गठन से पहले का है, तो नगरायुक्त ने मामले में एक पत्र सदर तहसील को लिखने के निर्देश सहायक नगरायुक्त अशोक प्रिय गौतम को दिए थे। सहायक नगरायुक्त ने सदर तहसील को पत्र लिखा है, जिसके बाद सदर तहसील प्रशासन हरकत में आया है। तहसीलदार ने तालाब के कागज निकलवाए हैं, जिसकी जांच भी शुरू कर दी है। इसी सप्ताह तहसील की टीम मौके पर जाकर तालाब की भूमि का मुआयना करेगी।
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कॉलोनी काटने वालों में हड़कंप
कॉलोनी काटने का मामला 12 वर्ष से अधिक पुराना है। सूत्रों ने बताया कि तालाब की भूमि पर कॉलोनी काटने में तब के एक नेता की बड़ी भूमिका थी। दावा यह भी किया जा रहा है कि सेटिंग के जरिए ही तालाब की भूमि की चकबंदी कर भूमि एक व्यक्ति के नाम कराई गई थी। निगम अधिकारियों का कहना है कि चकबंदी में भूमि जिन लोगों के नाम हुई थी। वह भूमिधर हुए बिना बैनामे नहीं कर सकते थे। मगर सेटिंग कर पूरा खेल खेला गया। अब जांच बैठने के बाद उक्त लोगों में हड़कंप की स्थिति है।
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प्लॉट खरीदारों में भय
कॉलोनी निवासी संजय कुमार ने बताया कि जिस भूमि को अब तालाब की भूमि बताया जा रहा है। प्लॉट खरीदते समय इसकी जानकारी क्रेताओं को नहीं थी। संजय ने बताया कि उक्त भूमि पर प्लॉट खरीदने वाले ज्यादातर लोग बेहद गरीब लोग हैं, जिनमें कई मजदूर और रिक्शा चालक तक हैं। जांच की बात सामने आने के बाद से सभी लोग डरे हुए हैं।
नगर निगम की ओर से एक पत्र आया है, जिसमें नवादा रोड पर तालाब की भूमि पर कॉलोनी काटने की बात कही गई है। संबंधित भूमि के कागज निकलवाए गए हैं। जांच शुरू कर दी गई है। इसी सप्ताह टीम मौके पर जाएगी। जिन्होंने भी तालाब की भूमि के बैनामे किए हैं। उन पर कार्रवाई होगी।
- गोपेश तिवारी, तहसीलदार, सदर।