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एएलएम मीट प्लांट पर प्रशासन की सील
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Sat, 19 Mar 2016 01:07 AM IST
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के बाद शासन ने सहारनपुर के एएलएम मीट प्लांट को सील करा दिया है। शुक्रवार की सुबह दस बजे प्रशासनिक अधिकारियों और विभागीय टीम ने प्लांट पर जाकर सील किया। इस दौरान विरोध भी हुआ, लेकिन सख्ती के सामने विरोध करने वालों की एक न चली।
स्थानीय लोगों द्वारा एएलएम मीट प्लांट की शिकायतें लगातार प्रदूषण कंट्रोल विभाग और प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड लखनऊ को की जा रही थी। लोगों की शिकायत थी कि प्लांट में निर्धारित संख्या से अधिक पशु काटे जा रहे हैं। प्लांट से निकलने वाले पानी को जमीन में उतारा जा रहा है, जिसकी वजह से भूजल तो प्रदूषित हो ही रहा है, साथ ही मृदा प्रदूषण भी हो रहा है।
दुर्गंध से आसपास के लोग परेशान हैं, जिनमें गंभीर बीमारियां फैल रही हैं। प्लांट की वजह से आसपास के कुत्ते आदमखोर हो गए हैं, जो स्थानीय लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं।
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यह भी आरोप था कि पशुओं को काटने से पहले उनका एंटीमार्टम और बाद में पोस्टमार्टम नहीं कराया जाता था। ऐसे में यहां से एक्सपोर्ट होने वाले मीट पर भी संदेह था। शिकायतों के बाद पिछले सप्ताह प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लखनऊ की टीम ने स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर प्लांट पर छापा मारा था।
उस दौरान टीम ने कई खामियां पायी गई थी। इस पर टीम ने अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी थी। रिपोर्ट के आधार पर शासन ने प्लांट को सील करने के लिखित आदेश जारी किए थे, जो बृहस्पतिवार की रात प्रशासनिक अधिकारियों को मिल गए थे।
इसके बाद प्रशासन ने शुक्रवार की सुबह तहसीलदार सदर के नेतृत्व में एक टीम सुबह दस बजे प्लांट को सील करने पहुंची थी, जिसमें प्रदूषण नियंत्रा विभाग के अधिकारी भी शामिल थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मौके पर मौजूद लोगों ने टीम का विरोध करने का प्रयास किया, मगर सफल नहीं हो सके।
अधिकारी कहिन
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में प्लांट पर नियमों का उल्लंघन करने की बात कही गई थी, जिसके बाद शासन ने प्लांट को बंद कराने के आदेश जारी किए, जिसकी प्रति बृहस्पतिवार की रात एक बजे प्राप्त हुई। शुक्रवार की सुबह प्लांट को सील करा दिया गया।
- ओपी वर्मा, एडीएम (प्रशासन)
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स्थानीय लोगों द्वारा एएलएम मीट प्लांट की शिकायतें लगातार प्रदूषण कंट्रोल विभाग और प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड लखनऊ को की जा रही थी। लोगों की शिकायत थी कि प्लांट में निर्धारित संख्या से अधिक पशु काटे जा रहे हैं। प्लांट से निकलने वाले पानी को जमीन में उतारा जा रहा है, जिसकी वजह से भूजल तो प्रदूषित हो ही रहा है, साथ ही मृदा प्रदूषण भी हो रहा है।
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दुर्गंध से आसपास के लोग परेशान हैं, जिनमें गंभीर बीमारियां फैल रही हैं। प्लांट की वजह से आसपास के कुत्ते आदमखोर हो गए हैं, जो स्थानीय लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं।
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यह भी आरोप था कि पशुओं को काटने से पहले उनका एंटीमार्टम और बाद में पोस्टमार्टम नहीं कराया जाता था। ऐसे में यहां से एक्सपोर्ट होने वाले मीट पर भी संदेह था। शिकायतों के बाद पिछले सप्ताह प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लखनऊ की टीम ने स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर प्लांट पर छापा मारा था।
उस दौरान टीम ने कई खामियां पायी गई थी। इस पर टीम ने अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी थी। रिपोर्ट के आधार पर शासन ने प्लांट को सील करने के लिखित आदेश जारी किए थे, जो बृहस्पतिवार की रात प्रशासनिक अधिकारियों को मिल गए थे।
इसके बाद प्रशासन ने शुक्रवार की सुबह तहसीलदार सदर के नेतृत्व में एक टीम सुबह दस बजे प्लांट को सील करने पहुंची थी, जिसमें प्रदूषण नियंत्रा विभाग के अधिकारी भी शामिल थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मौके पर मौजूद लोगों ने टीम का विरोध करने का प्रयास किया, मगर सफल नहीं हो सके।
अधिकारी कहिन
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में प्लांट पर नियमों का उल्लंघन करने की बात कही गई थी, जिसके बाद शासन ने प्लांट को बंद कराने के आदेश जारी किए, जिसकी प्रति बृहस्पतिवार की रात एक बजे प्राप्त हुई। शुक्रवार की सुबह प्लांट को सील करा दिया गया।
- ओपी वर्मा, एडीएम (प्रशासन)