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Saharanpur News: जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी शासन में तलब
Fri, 18 Jul 2025 12:59 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Fri, 18 Jul 2025 12:59 AM IST
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सहारनपुर। जिला पंचायत एक बार फिर चर्चाओं में है। जिलाधिकारी की तरफ से पिछले माह भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर शासन ने सहारनपुर के तत्कालीन अपर मुख्य अधिकारी (एएमए) उपेंद्र कुमार को तलब किया है। विभिन्न आरोपों पर एएमए से जवाब मांगा गया है। फिलहाल वह कासगंज में तैनात हैं, जिनका जून माह में यहां से तबादला हो गया था।
दरअसल, जिला पंचायत के तत्कालीन एएमए को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। विकास कार्यों के टेंडर जारी हो गए, लेकिन उनके वर्क ऑर्डर जारी नहीं किए गए, कार्यालय में उपस्थित न रहना आदि शिकायतें थीं। इस पर जिलाधिकारी मनीष बंसल की तरफ से शासन को पत्र भेजा गया था। 9 जून को भेजे गए पत्र में बताया गया था कि एएमए अधिकांश समय अपने कार्यालय से अनुपस्थित रहते थे, जिससे जिला पंचायत के दैनिक कार्य और जन शिकायतों का निस्तारण समय से नहीं हो रहा। 23 मई से 6 जून तक की सीसीटीवी फुटेज निकलवाई गई।
इस दौरान एएमए की उपस्थिति संतोषजनक नहीं मिली थी। जिला पंचायत सदस्यों ने भी प्रदर्शन कर विरोध जताया था। निरीक्षण के दौरान अव्यवस्था, अनुशासनहीनता आदि की कमी मिली थी, जो शासन-प्रशासन की छवि धूमिल करने वाली है। जिलाधिकारी की तरफ से भेजे गए पत्र को आधार मानते हुए तत्कालीन अपर मुख्य अधिकारी को प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया। शासन की तरफ से तत्कालीन एएमए से जवाब मांगा है।
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दरअसल, जिला पंचायत के तत्कालीन एएमए को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। विकास कार्यों के टेंडर जारी हो गए, लेकिन उनके वर्क ऑर्डर जारी नहीं किए गए, कार्यालय में उपस्थित न रहना आदि शिकायतें थीं। इस पर जिलाधिकारी मनीष बंसल की तरफ से शासन को पत्र भेजा गया था। 9 जून को भेजे गए पत्र में बताया गया था कि एएमए अधिकांश समय अपने कार्यालय से अनुपस्थित रहते थे, जिससे जिला पंचायत के दैनिक कार्य और जन शिकायतों का निस्तारण समय से नहीं हो रहा। 23 मई से 6 जून तक की सीसीटीवी फुटेज निकलवाई गई।
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इस दौरान एएमए की उपस्थिति संतोषजनक नहीं मिली थी। जिला पंचायत सदस्यों ने भी प्रदर्शन कर विरोध जताया था। निरीक्षण के दौरान अव्यवस्था, अनुशासनहीनता आदि की कमी मिली थी, जो शासन-प्रशासन की छवि धूमिल करने वाली है। जिलाधिकारी की तरफ से भेजे गए पत्र को आधार मानते हुए तत्कालीन अपर मुख्य अधिकारी को प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया। शासन की तरफ से तत्कालीन एएमए से जवाब मांगा है।
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