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ढमोला के लिए कार्ययोजना नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Sun, 12 Jun 2016 12:50 AM IST
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प्रशासन की उदासीनता की हद हो गई। तीन साल से ढमोला नदी को लेकर हाय तौबा मची हुई है, शहर की तबाही का एक मंजर अफसर देख चुके हैं, लेकिन अफसरों ने आज तक ढमोला के लिए कोई कार्ययोजना तक तैयार नहीं की। बल्कि लोगों को सिर्फ खुद ही हट जाने या डूब जाने का इंतजार कर रहे हैं।
शहर के लिए कभी जीवनदायिनी रही ढमोला नदी वास्तव में अफसरों की उदासीनता की भेंट चढ़ गई है। ढमोला नदी को प्रशासन ने कभी गंभीरता से नहीं लिया, जिस कारण 2013 में ढमोला में आई बाढ़ से शहर को गंभीर परिणाम भुगतना पड़ा।
हद तो यह हुई कि तबाही देखने के बावजूद अफसरों ने कोई जिम्मेदारी नहीं समझी। 2013 में अतिक्रमण करने वाले सिर्फ 156 लोगों को नोटिस भेजने के सिवा कुछ भी नहीं किया। नोटिस भेजने के बाद सिंचाई विभाग भी ढमोला नदी को भूल बैठा।
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आज तक इस नदी के लिए कोई कार्ययोजना तैयार नहीं की गई। न तो इस नदी की सफाई के लिए कोई योजना बनाई गई और न ही इस प्रकार की विभीषिका से बचने के लिए ढमोला के तटबंधों को मजबूत किया गया।
अतिक्रमण हटवाने की कार्रवाई तो दूर लोगों के खुद ही अतिक्रमण हटाने का इंतजार करते रहे। प्रशासन की मंशा है कि ढमोला को किसी प्रकार का दबाव बनाकर कब्जा मुक्त कराने की बजाय, लोग या तो खुद ही अतिक्रमण हटा लेंगे या फिर बाढ़ आई तो नदी अपने-आप की कब्जामुक्त हो जाएगी। लेकिन बाढ़ आई तो चंद कब्जेधारियों के फेर में पूरा सहारनपुर ही डूब जाएगा। पिछली बार भी दर्जनों मकान गिर गए थे। शहर का अधिकांश हिस्सा जलमग्न हो गया था।
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शहर के लिए कभी जीवनदायिनी रही ढमोला नदी वास्तव में अफसरों की उदासीनता की भेंट चढ़ गई है। ढमोला नदी को प्रशासन ने कभी गंभीरता से नहीं लिया, जिस कारण 2013 में ढमोला में आई बाढ़ से शहर को गंभीर परिणाम भुगतना पड़ा।
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हद तो यह हुई कि तबाही देखने के बावजूद अफसरों ने कोई जिम्मेदारी नहीं समझी। 2013 में अतिक्रमण करने वाले सिर्फ 156 लोगों को नोटिस भेजने के सिवा कुछ भी नहीं किया। नोटिस भेजने के बाद सिंचाई विभाग भी ढमोला नदी को भूल बैठा।
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आज तक इस नदी के लिए कोई कार्ययोजना तैयार नहीं की गई। न तो इस नदी की सफाई के लिए कोई योजना बनाई गई और न ही इस प्रकार की विभीषिका से बचने के लिए ढमोला के तटबंधों को मजबूत किया गया।
अतिक्रमण हटवाने की कार्रवाई तो दूर लोगों के खुद ही अतिक्रमण हटाने का इंतजार करते रहे। प्रशासन की मंशा है कि ढमोला को किसी प्रकार का दबाव बनाकर कब्जा मुक्त कराने की बजाय, लोग या तो खुद ही अतिक्रमण हटा लेंगे या फिर बाढ़ आई तो नदी अपने-आप की कब्जामुक्त हो जाएगी। लेकिन बाढ़ आई तो चंद कब्जेधारियों के फेर में पूरा सहारनपुर ही डूब जाएगा। पिछली बार भी दर्जनों मकान गिर गए थे। शहर का अधिकांश हिस्सा जलमग्न हो गया था।