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Saharanpur News: फर्जी मुकदमों में फंसाकर संपत्ति बेचने का आरोप
Tue, 10 Mar 2026 12:51 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Tue, 10 Mar 2026 12:51 AM IST
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मिर्जापुर। पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल की पत्नी फरीदा बेगम ने प्रधानमंत्री को प्रार्थना पत्र भेजकर पुलिस-प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2017 से उनके परिवार को सुनियोजित तरीके से फर्जी मुकदमों में फंसाया गया और गैंगस्टर एक्ट के तहत संपत्तियां संबद्ध कर अवैध रूप से बेच दी गई।
प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि परिवार के सदस्य मोहम्मद वाजिद, मोहम्मद जावेद, मोहम्मद अफजल, आलीशान तथा देवर महमूद अली सहित अन्य को अलग-अलग मामलों में जेल भेज दिया गया। इससे परिवार का कोई भी सदस्य मुकदमों की पैरवी के लिए बाहर नहीं रह सका। आरोप है कि इसी का फायदा उठाकर पुलिस प्रशासन ने गैंगस्टर एक्ट में गांव इंद्रपुर तालड़ा और नागल माफी की जमीन को संबद्ध कर दिया।
फरीदा बेगम ने आरोप लगाया कि इसके बाद पुलिस प्रशासन ने कुछ लोगों के साथ मिलकर कूटरचित दस्तावेज तैयार कर अरबों रुपये की संपत्तियों की अवैध बिक्री करा दी। आरोप लगाया कि तत्कालीन मिर्जापुर थाना के एक इंस्पेक्टर ने अपनी पत्नी के नाम करीब 60 बीघा जमीन की फर्जी रजिस्ट्री कराई। कुछ मामलों में अदालत से राहत मिलने और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कार्रवाई पर स्थगन आदेश दिए जाने के बावजूद पुलिस ने 17 फरवरी 2026 को फिर से जमीन संबद्ध कर दी। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सीबीआई से कराने की मांग की है।
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प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि परिवार के सदस्य मोहम्मद वाजिद, मोहम्मद जावेद, मोहम्मद अफजल, आलीशान तथा देवर महमूद अली सहित अन्य को अलग-अलग मामलों में जेल भेज दिया गया। इससे परिवार का कोई भी सदस्य मुकदमों की पैरवी के लिए बाहर नहीं रह सका। आरोप है कि इसी का फायदा उठाकर पुलिस प्रशासन ने गैंगस्टर एक्ट में गांव इंद्रपुर तालड़ा और नागल माफी की जमीन को संबद्ध कर दिया।
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फरीदा बेगम ने आरोप लगाया कि इसके बाद पुलिस प्रशासन ने कुछ लोगों के साथ मिलकर कूटरचित दस्तावेज तैयार कर अरबों रुपये की संपत्तियों की अवैध बिक्री करा दी। आरोप लगाया कि तत्कालीन मिर्जापुर थाना के एक इंस्पेक्टर ने अपनी पत्नी के नाम करीब 60 बीघा जमीन की फर्जी रजिस्ट्री कराई। कुछ मामलों में अदालत से राहत मिलने और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कार्रवाई पर स्थगन आदेश दिए जाने के बावजूद पुलिस ने 17 फरवरी 2026 को फिर से जमीन संबद्ध कर दी। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सीबीआई से कराने की मांग की है।
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