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Saharanpur News: सात किमी की दूरी, फाइल को पहुंचने में लगे छह माह
Sun, 05 Jul 2026 01:12 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sun, 05 Jul 2026 01:12 AM IST
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सहारनपुर। आठ साल पहले राजकीय मेडिकल कॉलेज में हुए 51 लाख रुपये के स्टेशनरी घोटाले की जांच अभी थमी नहीं है। शहर से करीब सात किलोमीटर दूर मेडिकल कॉलेज से घोटाले की मूल पत्रावली को एडी हेल्थ कार्यालय आने में छह महीने लग गए। अब जांच रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजी जाएगी। वहां से आगे की कार्रवाई होगी।
अंबाला रोड स्थित शेखुल हिंद मौलाना महमूद हसन मेडिकल कॉलेज में नवंबर 2018 में करीब 51 लाख रुपये की स्टेशनरी और कंटीजेंसी के सामान खरीदने के ऑर्डर कर खरीद हुआ था। स्टेशनरी खरीद की जांच हुई तो पता चला कि लिफाफे से लेकर अन्य सामान कई गुना कीमत पर खरीदा गया। इस मामले की जांच के लिए शासन ने तत्कालीन मंडलायुक्त को नामित किया था। समिति बनाकर जांच कराई थी। टीम ने मेडिकल कॉलेज से स्टेशनरी खरीद की मूल पत्रावलियां मांगी गई थी, जो उपलब्ध कराई थी।
इस मामले में शासन ने दोबारा अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को जांच सौंपी। जनवरी 2026 में मेडिकल कॉलेज से घोटाले की मूल पत्रावली मंगाने के लिए एडी हेल्थ की ओर से पत्र लिखा गया था, लेकिन कई महीने तक मूल पत्रावली उपलब्ध नहीं कराई गई। इस पर रिमाइंडर भेजे गए। अब रिमाइंडर नोटिस का ही असर है कि करीब छह महीने बाद मूल पत्रावली आ सकी, जबकि शहर से मेडिकल कॉलेज की दूरी करीब सात किलोमीटर की है। इससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिम्मेदार घाेटाले की मूल पत्रावली उपलब्ध कराने को लेकर कितने गंभीर थे।
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-- प्रथम दृष्टया दो डॉक्टर माने गए थे दोषी
स्टेशनरी घोटाले में राजकीय मेडिकल कॉलेज के दो इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. नितिन जैन व मैनपाल को प्रथम दृष्टया दोषी माना गया था। जांच के आधार पर दोनों चिकित्सकों के बयान दर्ज हुए थे और अपना-अपना पक्ष एडी हेल्थ के समक्ष रखा था।
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-- एक रुपये के लिफाफे का 246 हुआ था भुगतान
स्टेशनरी घोटाले में एक रुपये के लिफाफे के लिए 246 रुपये और छोटे लिफाफे के लिए 123 रुपये का भुगतान किया गया था। इसके अलावा कागज का रिम, कार्बन पेपर का पैकेट, स्टांप पैड इंक, कंप्यूटर पेपरों आदि की खरीदारी भी कई गुना रेट खरीदी गई थी।
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स्टेशनरी घोटाले से संबंधित मूल पत्रावली राजकीय मेडिकल कॉलेज से मांगी गई थी, जिसमें एक पत्रावली आ गई है। जल्द ही पत्रावली की जांच कर रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
डॉ. कुमुद रानी, एडी हेल्थ
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अंबाला रोड स्थित शेखुल हिंद मौलाना महमूद हसन मेडिकल कॉलेज में नवंबर 2018 में करीब 51 लाख रुपये की स्टेशनरी और कंटीजेंसी के सामान खरीदने के ऑर्डर कर खरीद हुआ था। स्टेशनरी खरीद की जांच हुई तो पता चला कि लिफाफे से लेकर अन्य सामान कई गुना कीमत पर खरीदा गया। इस मामले की जांच के लिए शासन ने तत्कालीन मंडलायुक्त को नामित किया था। समिति बनाकर जांच कराई थी। टीम ने मेडिकल कॉलेज से स्टेशनरी खरीद की मूल पत्रावलियां मांगी गई थी, जो उपलब्ध कराई थी।
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इस मामले में शासन ने दोबारा अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को जांच सौंपी। जनवरी 2026 में मेडिकल कॉलेज से घोटाले की मूल पत्रावली मंगाने के लिए एडी हेल्थ की ओर से पत्र लिखा गया था, लेकिन कई महीने तक मूल पत्रावली उपलब्ध नहीं कराई गई। इस पर रिमाइंडर भेजे गए। अब रिमाइंडर नोटिस का ही असर है कि करीब छह महीने बाद मूल पत्रावली आ सकी, जबकि शहर से मेडिकल कॉलेज की दूरी करीब सात किलोमीटर की है। इससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिम्मेदार घाेटाले की मूल पत्रावली उपलब्ध कराने को लेकर कितने गंभीर थे।
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स्टेशनरी घोटाले में राजकीय मेडिकल कॉलेज के दो इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. नितिन जैन व मैनपाल को प्रथम दृष्टया दोषी माना गया था। जांच के आधार पर दोनों चिकित्सकों के बयान दर्ज हुए थे और अपना-अपना पक्ष एडी हेल्थ के समक्ष रखा था।
स्टेशनरी घोटाले में एक रुपये के लिफाफे के लिए 246 रुपये और छोटे लिफाफे के लिए 123 रुपये का भुगतान किया गया था। इसके अलावा कागज का रिम, कार्बन पेपर का पैकेट, स्टांप पैड इंक, कंप्यूटर पेपरों आदि की खरीदारी भी कई गुना रेट खरीदी गई थी।
स्टेशनरी घोटाले से संबंधित मूल पत्रावली राजकीय मेडिकल कॉलेज से मांगी गई थी, जिसमें एक पत्रावली आ गई है। जल्द ही पत्रावली की जांच कर रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
डॉ. कुमुद रानी, एडी हेल्थ