{"_id":"5aef53364f1c1b62098b8a33","slug":"91525633846-saharanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आसपी सौहार्द को बरकरार रखने वाला बयान दें खट्टर: उलमा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आसपी सौहार्द को बरकरार रखने वाला बयान दें खट्टर: उलमा
Updated Mon, 07 May 2018 12:40 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आपसी सौहार्द और एकता को बरकरार रखने वाला बयान दें : उलमा
देवबंद। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के सार्वजनिक स्थानों के बजाए मस्जिद या ईदगाह में नमाज पढ़ने वाले बयान पर देवबंदी उलमा का कहना है कि इस प्रकार के बयान से अराजक तत्वों को बल मिलेगा। कहा कि मुख्यमंत्री को आपसी सौहार्द और एकता को बरकरार रखने वाला बयान देना चाहिए।
पिछले दिनों गुरु ग्राम में सार्वजनिक स्थान पर जुमा की नमाज पढ़ने की तैयारी कर रहे मुस्लिम समाज के लोगों को कुछ असामाजिक तत्वों ने नमाज पढ़ने से रोकते हुए वहां से भगा दिया था। जिस पर काफी बहस छिड़ी हुई है। तंजीम उलमा-ए-हिंद के प्रदेशाध्यक्ष व अरबी के प्रसिद्ध विद्वान मौलाना नदीमुलवाजदी का कहना है कि हिंदुस्तान एक ऐसा मुल्क है जिसमें सभी धर्मों का सम्मान होता है और सभी लोग एक दूसरे के त्योहार में शामिल होते हैं। जहां तक सार्वजनिक जगह पर नमाज पढ़ने का मसला है तो इसमें कोई बुराई नहीं है। बहुत सी जगह ऐसी होती है जहां दूर दूर तक मस्जिद नहीं होती। नमाज अदा करने में महज 10 मिनट लगते हैं। इसके साथ ही मौलाना वाजदी ने मुस्लिम समाज के लोगों से भी आह्वान किया कि उन्हें ऐसे स्थान पर नमाज अदा करने से परहेज करना चाहिए जहां भीड़भाड़ रहती हो। कोशिश करनी चाहिए कि वह मस्जिद में ही नमाज अदा करें।
विज्ञापन
देवबंद। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के सार्वजनिक स्थानों के बजाए मस्जिद या ईदगाह में नमाज पढ़ने वाले बयान पर देवबंदी उलमा का कहना है कि इस प्रकार के बयान से अराजक तत्वों को बल मिलेगा। कहा कि मुख्यमंत्री को आपसी सौहार्द और एकता को बरकरार रखने वाला बयान देना चाहिए।
पिछले दिनों गुरु ग्राम में सार्वजनिक स्थान पर जुमा की नमाज पढ़ने की तैयारी कर रहे मुस्लिम समाज के लोगों को कुछ असामाजिक तत्वों ने नमाज पढ़ने से रोकते हुए वहां से भगा दिया था। जिस पर काफी बहस छिड़ी हुई है। तंजीम उलमा-ए-हिंद के प्रदेशाध्यक्ष व अरबी के प्रसिद्ध विद्वान मौलाना नदीमुलवाजदी का कहना है कि हिंदुस्तान एक ऐसा मुल्क है जिसमें सभी धर्मों का सम्मान होता है और सभी लोग एक दूसरे के त्योहार में शामिल होते हैं। जहां तक सार्वजनिक जगह पर नमाज पढ़ने का मसला है तो इसमें कोई बुराई नहीं है। बहुत सी जगह ऐसी होती है जहां दूर दूर तक मस्जिद नहीं होती। नमाज अदा करने में महज 10 मिनट लगते हैं। इसके साथ ही मौलाना वाजदी ने मुस्लिम समाज के लोगों से भी आह्वान किया कि उन्हें ऐसे स्थान पर नमाज अदा करने से परहेज करना चाहिए जहां भीड़भाड़ रहती हो। कोशिश करनी चाहिए कि वह मस्जिद में ही नमाज अदा करें।
विज्ञापन