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सफाई कर्मचारियों के उत्पीड़न पर अफसरों को फटकार
Updated Fri, 14 Sep 2018 12:30 AM IST
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सफाई कर्मचारियों के उत्पीड़न पर अफसरों को फटकार
सहारनपुर। राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग की सदस्य मंजू दिलेर ने शहर से लेकर गांवों तक सफाई व्यवस्था में लापरवाही और कर्मचारियों के उत्पीड़न पर नाराजगी जताई। उन्होंने डीपीआरओ और नगर स्वास्थ्य अधिकारी को फटकार लगाई। इस दौरान सफाई कर्मचारियों ने अफसरों और ग्राम प्रधानों पर निजी घरों में काम करवाने, समय पर वेतन न मिलने सहित अन्य समस्याएं भी रखीं। दिलेर ने कहा कि सफाई व्यवस्था में बेहतर सहयोग और कर्मचारियों के साथ समन्वय से ही स्वच्छता मिशन बेहतर हो सकता है।
बृहस्पतिवार को सर्किट हाउस में सफाईकर्मियों और संबंधित अफसरों के साथ बैठक कर रही थीं। उन्होंने तमाम खामियों को अतिशीघ्र दूर करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। अक्तूबर में दोबारा यहां आकर समीक्षा बैठक करने की बात कही। दोबारा खामियां मिलने पर कार्रवाई की चेतावनी दी। मंजू दिलेर दोपहर साढ़े 12 बजे सर्किट हाउस पहुंचीं। उन्होंने डीएम आलोक कुमार पांडेय, एसएसपी उपेंद्र कुमार अग्रवाल, एडीएम-प्रशासन एसके दुबे, नगरायुक्त ज्ञानेंद्र सिंह के साथ सफाई कर्मचारियों, सभी नगर पंचायत और नगर पालिकाओं के ईओ और नगर निगम के अफसरों के साथ बैठक की। सबसे पहले उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र के सफाईकर्मियों से समस्याएं पूछीं।
कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें दो महीने से वेतन नहीं मिला है। सातवें वेतनमान का लाभ भी अभी तक नहीं मिला है। इस पर डीपीआरओ सतीश कुमार ने बताया कि वेतन के लिए बजट नहीं है। सोनी आजाद ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में सफाईकर्मी के रूप में कार्यरत सामान्य जाति के कर्मचारी काम नहीं करते हैं। वह वाल्मीकि समाज के सफाईकर्मियों को दो से तीन हजार रुपये देकर काम कराते हैं। इस पर मंजू दिलेर ने नाराजगी व्यक्त की और डीपीआरओ से जवाब मांगा। डीएम आलोक कुमार पांडेय को मामले की जांच कराकर जरूरी कार्रवाई करने को कहा।
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कर्मचारियों ने ग्राम प्रधानों पर उनसे अपने खेतों और घरों में काम कराने का आरोप लगाया। आयोग सदस्य ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। साथ ही सफाई कर्मियों से अपने निजी कार्य कराने वाले प्रधानों की लिखित शिकायत करने को कहा। इसके बाद नगर क्षेत्र की बारी आई। सफाई कर्मचारी नेता सोनी आजाद और अन्य ने सफाई कर्मचारियों को पूरा मानदेय नहीं देने की शिकायत की। आरोप लगाया कि ठेकेदार उन्हें निर्धारित 305 रुपये प्रतिदिन और 315 रुपये प्रतिदिन नहीं दे रहा है, जबकि ठेके में यह निर्धारित है। इस पर आयोग सदस्य ने नगर स्वास्थ्य अधिकारी से जवाब मांगा। सही जवाब नहीं मिलने पर उनको जमकर फटकार लगाई। तमाम ठेकों में नगर स्वास्थ्य अधिकारी के हस्ताक्षर होने के बावजूद कर्मचारियों को पूरा मानदेय नहीं मिलने पर नगर स्वास्थ्य अधिकारी की नीयत पर सवाल उठाए। अंत में उत्तर प्रदेशीय सफाई मजदूर संघ, जिला वाल्मीकि सभा, अखिल भारतीय सफाई मजदूर संघ और उत्तर प्रदेश चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी संघ लोक निर्माण ने भी अपनी समस्याओं से संबंधित ज्ञापन आयोग सदस्य को सौंपा।
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मैडम सफाई उपकरण और किट भी नहीं मिलते
ग्रामीण के साथ ही शहरी सफाई कर्मियों ने भी सफाई उपकरण और किट नहीं मिलने की शिकायत की। नगर स्वास्थ्य अधिकारी का कहना है कि वह सभी को उपकरण और किट उपलब्ध करा रहे हैं। इस पर कर्मचारियों ने बताया कि वह पिछले डेढ साल से उपकरण की मांग कर रहे हैं, मगर नहीं मिले हैं। सेफ्टी किट भी केवल जानवरों के अवशेष उठाने वालों को ही मिलने की बात कही। जब इस संबंध में नगर स्वास्थ्य अधिकारी से पूछा गया तो वह चुप हो गए। इस पर आयोग सदस्य ने नाराजगी व्यक्त की और सभी कर्मचारियों को उपकरण व किट देने के निर्देश दिए। देहात के सफाईकर्मियों ने भी ऐसी ही शिकायत की। डीपीआरओ को भी किट और उपकरण उपलब्ध कराने को कहा।
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मुस्कुराने का समय नहीं है मिस्टर
लगातार शिकायतों के बीच आयोग की सदस्य भड़क उठीं। वह नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एके त्रिपाठी की ओर इशारा करते हुए बोलीं, मुस्कुराने का समय नहीं है मिस्टर। या तो अपनी कार्यप्रणाली में सुधार कर लीजिए, कार्रवाई के लिए लिखना पड़ेगा। उन्होंने डीएम आलोक कुमार पांडेय को व्यवस्था में सुधार कराने के निर्देश दिए।
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सहारनपुर। राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग की सदस्य मंजू दिलेर ने शहर से लेकर गांवों तक सफाई व्यवस्था में लापरवाही और कर्मचारियों के उत्पीड़न पर नाराजगी जताई। उन्होंने डीपीआरओ और नगर स्वास्थ्य अधिकारी को फटकार लगाई। इस दौरान सफाई कर्मचारियों ने अफसरों और ग्राम प्रधानों पर निजी घरों में काम करवाने, समय पर वेतन न मिलने सहित अन्य समस्याएं भी रखीं। दिलेर ने कहा कि सफाई व्यवस्था में बेहतर सहयोग और कर्मचारियों के साथ समन्वय से ही स्वच्छता मिशन बेहतर हो सकता है।
बृहस्पतिवार को सर्किट हाउस में सफाईकर्मियों और संबंधित अफसरों के साथ बैठक कर रही थीं। उन्होंने तमाम खामियों को अतिशीघ्र दूर करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। अक्तूबर में दोबारा यहां आकर समीक्षा बैठक करने की बात कही। दोबारा खामियां मिलने पर कार्रवाई की चेतावनी दी। मंजू दिलेर दोपहर साढ़े 12 बजे सर्किट हाउस पहुंचीं। उन्होंने डीएम आलोक कुमार पांडेय, एसएसपी उपेंद्र कुमार अग्रवाल, एडीएम-प्रशासन एसके दुबे, नगरायुक्त ज्ञानेंद्र सिंह के साथ सफाई कर्मचारियों, सभी नगर पंचायत और नगर पालिकाओं के ईओ और नगर निगम के अफसरों के साथ बैठक की। सबसे पहले उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र के सफाईकर्मियों से समस्याएं पूछीं।
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कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें दो महीने से वेतन नहीं मिला है। सातवें वेतनमान का लाभ भी अभी तक नहीं मिला है। इस पर डीपीआरओ सतीश कुमार ने बताया कि वेतन के लिए बजट नहीं है। सोनी आजाद ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में सफाईकर्मी के रूप में कार्यरत सामान्य जाति के कर्मचारी काम नहीं करते हैं। वह वाल्मीकि समाज के सफाईकर्मियों को दो से तीन हजार रुपये देकर काम कराते हैं। इस पर मंजू दिलेर ने नाराजगी व्यक्त की और डीपीआरओ से जवाब मांगा। डीएम आलोक कुमार पांडेय को मामले की जांच कराकर जरूरी कार्रवाई करने को कहा।
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कर्मचारियों ने ग्राम प्रधानों पर उनसे अपने खेतों और घरों में काम कराने का आरोप लगाया। आयोग सदस्य ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। साथ ही सफाई कर्मियों से अपने निजी कार्य कराने वाले प्रधानों की लिखित शिकायत करने को कहा। इसके बाद नगर क्षेत्र की बारी आई। सफाई कर्मचारी नेता सोनी आजाद और अन्य ने सफाई कर्मचारियों को पूरा मानदेय नहीं देने की शिकायत की। आरोप लगाया कि ठेकेदार उन्हें निर्धारित 305 रुपये प्रतिदिन और 315 रुपये प्रतिदिन नहीं दे रहा है, जबकि ठेके में यह निर्धारित है। इस पर आयोग सदस्य ने नगर स्वास्थ्य अधिकारी से जवाब मांगा। सही जवाब नहीं मिलने पर उनको जमकर फटकार लगाई। तमाम ठेकों में नगर स्वास्थ्य अधिकारी के हस्ताक्षर होने के बावजूद कर्मचारियों को पूरा मानदेय नहीं मिलने पर नगर स्वास्थ्य अधिकारी की नीयत पर सवाल उठाए। अंत में उत्तर प्रदेशीय सफाई मजदूर संघ, जिला वाल्मीकि सभा, अखिल भारतीय सफाई मजदूर संघ और उत्तर प्रदेश चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी संघ लोक निर्माण ने भी अपनी समस्याओं से संबंधित ज्ञापन आयोग सदस्य को सौंपा।
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मैडम सफाई उपकरण और किट भी नहीं मिलते
ग्रामीण के साथ ही शहरी सफाई कर्मियों ने भी सफाई उपकरण और किट नहीं मिलने की शिकायत की। नगर स्वास्थ्य अधिकारी का कहना है कि वह सभी को उपकरण और किट उपलब्ध करा रहे हैं। इस पर कर्मचारियों ने बताया कि वह पिछले डेढ साल से उपकरण की मांग कर रहे हैं, मगर नहीं मिले हैं। सेफ्टी किट भी केवल जानवरों के अवशेष उठाने वालों को ही मिलने की बात कही। जब इस संबंध में नगर स्वास्थ्य अधिकारी से पूछा गया तो वह चुप हो गए। इस पर आयोग सदस्य ने नाराजगी व्यक्त की और सभी कर्मचारियों को उपकरण व किट देने के निर्देश दिए। देहात के सफाईकर्मियों ने भी ऐसी ही शिकायत की। डीपीआरओ को भी किट और उपकरण उपलब्ध कराने को कहा।
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मुस्कुराने का समय नहीं है मिस्टर
लगातार शिकायतों के बीच आयोग की सदस्य भड़क उठीं। वह नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एके त्रिपाठी की ओर इशारा करते हुए बोलीं, मुस्कुराने का समय नहीं है मिस्टर। या तो अपनी कार्यप्रणाली में सुधार कर लीजिए, कार्रवाई के लिए लिखना पड़ेगा। उन्होंने डीएम आलोक कुमार पांडेय को व्यवस्था में सुधार कराने के निर्देश दिए।
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