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सिंथेटिक कोर्ट के नाम पर खिलाड़ियों के साथ छल
Updated Wed, 21 Mar 2018 12:16 AM IST
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सहारनपुर। डॉ. भीमराव अंबेडकर स्पोर्ट्स स्टेडियम में उखड़े बास्केटबॉल कोर्ट बड़े खेल की ओर इशारा कर रहा है। कुछ समय पहले जिस बास्केटबॉल कोर्ट को सिंथेटिक से बनाने में लाखों रुपये खर्च किए गए थे, वही कोर्ट आज बेकार पड़ा है, जिस पर चढ़ाई गई सिंथेटिक की परत उखड़ी पड़ी है। वर्तमान में कोर्ट इस्तेमाल की स्थिति में नहीं हैं। एक तरह से निर्माण एजेंसी ने खिलाड़ियों के साथ छल किया है।
करीब पांच वर्ष पहले स्टेडियम में पवेलियन तैयार करने, बास्केटबॉल का सिंथेटिक कोर्ट बनाने, वालीबाल के कोर्ट के चारों ओर ऊंचा जाल लगवाने और रात के मैचों के लिए लाइट लगवाने का काम हुआ था। विभागीय सूत्रों की मानें तो 90 लाख रुपये से अधिक रुपया सहारनपुर के हिस्से में आया था। मैदान के एक कोने में बने बास्केटबॉल कोर्ट को पूरी तरह नया और सिंथेटिक बनाने के लिए करीब 28 लाख रुपये का बजट था। उधर, प्रशिक्षु खिलाड़ियों ने बताया कि सिंथेटिक कोर्ट बनने के कुछ ही दिन बाद टूटना शुरू हो गया था। वर्तमान में फर्श पर बिछाया गया सिंथेटिक उखड़ा पड़ा है, जिसपर खेल पाना भी संभव नहीं है। इससे तो बेहतर पहले साधारण कोर्ट ही था। सिंथेटिक कोर्ट का इतनी जल्दी टूट जाना निर्माण करने वाली एजेंसी/ठेकेदार और तत्कालीन खेल अधिकारियों के बीच मिलीभगत होने की ओर इशारा कर रहा है। उधर, लॉन टेनिस कोर्ट की भी हालत ठीक नहीं है। खिलाड़ियों ने बताया कि लॉन टेनिस कोर्ट को सिंथेटिक का दर्शाने के लिए फर्श पर पेंट कर दिया गया, जो कुछ ही दिन में फर्श से गायब हो गया। यह कोर्ट भी अब जगह-जगह से टूटा पड़ा है।
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दर्शक दीर्घा से कुर्सियां गायब, गलत बनाया
स्टेडियम में दर्शकों के बैठने के सीमेंट की सीढ़ियां बनाकर उन पर स्टील की कुर्सियां लगाई गई थीं। मगर कुछ ही दिन बाद कुर्सियां गायब हो गई। इतना ही नहीं, इसे बनाने में भी नियमों की अनदेखी की गई। खिलाड़ियों ने बताया कि दर्शकों के बैठने के लिए लगाई गई कुर्सियों के ऊपर टीन डाली गई है, मगर टीन डालने के लिए सीमेंट के भारी भरकम पीलर बनाकर खड़े कर दिए गए। सामने चार से पांच बड़े पीलर आने की वजह से लोगों को यहां बैठकर मैच देखने में परेशानी रहती है।
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सिंथेटिक कोर्ट प्रदेश के कई जिलों में एक साथ बनाए गए थे। सहारनपुर में बना कोर्ट का लेवल सही न होने की वजह से यह जल्दी टूट गया। रही बात दर्शकों के लिए लगाई गई कुर्सियों की तो लड़के कुर्सियों में तोड़फोड़ करते थे, जिसकी वजह से पूर्व के अधिकारियों ने उतरवाकर स्टोर में रखवाया हुआ है। जल्द ही सभी समस्याओं को दिखवाया जाएगा। सुधार के लिए शासन से बजट की मांग की जाएगी।
प्रेम कुमार, क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी।
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करीब पांच वर्ष पहले स्टेडियम में पवेलियन तैयार करने, बास्केटबॉल का सिंथेटिक कोर्ट बनाने, वालीबाल के कोर्ट के चारों ओर ऊंचा जाल लगवाने और रात के मैचों के लिए लाइट लगवाने का काम हुआ था। विभागीय सूत्रों की मानें तो 90 लाख रुपये से अधिक रुपया सहारनपुर के हिस्से में आया था। मैदान के एक कोने में बने बास्केटबॉल कोर्ट को पूरी तरह नया और सिंथेटिक बनाने के लिए करीब 28 लाख रुपये का बजट था। उधर, प्रशिक्षु खिलाड़ियों ने बताया कि सिंथेटिक कोर्ट बनने के कुछ ही दिन बाद टूटना शुरू हो गया था। वर्तमान में फर्श पर बिछाया गया सिंथेटिक उखड़ा पड़ा है, जिसपर खेल पाना भी संभव नहीं है। इससे तो बेहतर पहले साधारण कोर्ट ही था। सिंथेटिक कोर्ट का इतनी जल्दी टूट जाना निर्माण करने वाली एजेंसी/ठेकेदार और तत्कालीन खेल अधिकारियों के बीच मिलीभगत होने की ओर इशारा कर रहा है। उधर, लॉन टेनिस कोर्ट की भी हालत ठीक नहीं है। खिलाड़ियों ने बताया कि लॉन टेनिस कोर्ट को सिंथेटिक का दर्शाने के लिए फर्श पर पेंट कर दिया गया, जो कुछ ही दिन में फर्श से गायब हो गया। यह कोर्ट भी अब जगह-जगह से टूटा पड़ा है।
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दर्शक दीर्घा से कुर्सियां गायब, गलत बनाया
स्टेडियम में दर्शकों के बैठने के सीमेंट की सीढ़ियां बनाकर उन पर स्टील की कुर्सियां लगाई गई थीं। मगर कुछ ही दिन बाद कुर्सियां गायब हो गई। इतना ही नहीं, इसे बनाने में भी नियमों की अनदेखी की गई। खिलाड़ियों ने बताया कि दर्शकों के बैठने के लिए लगाई गई कुर्सियों के ऊपर टीन डाली गई है, मगर टीन डालने के लिए सीमेंट के भारी भरकम पीलर बनाकर खड़े कर दिए गए। सामने चार से पांच बड़े पीलर आने की वजह से लोगों को यहां बैठकर मैच देखने में परेशानी रहती है।
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सिंथेटिक कोर्ट प्रदेश के कई जिलों में एक साथ बनाए गए थे। सहारनपुर में बना कोर्ट का लेवल सही न होने की वजह से यह जल्दी टूट गया। रही बात दर्शकों के लिए लगाई गई कुर्सियों की तो लड़के कुर्सियों में तोड़फोड़ करते थे, जिसकी वजह से पूर्व के अधिकारियों ने उतरवाकर स्टोर में रखवाया हुआ है। जल्द ही सभी समस्याओं को दिखवाया जाएगा। सुधार के लिए शासन से बजट की मांग की जाएगी।
प्रेम कुमार, क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी।