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सहारनपुर के स्मार्ट सिटी बनने की राह में कचरा बना बाधा
Updated Mon, 11 Sep 2017 01:27 AM IST
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सहारनपुर के स्मार्ट सिटी बनने की राह में कचरा बना बाधा
सहारनपुर। स्मार्ट सिटी योजना का चौथा चरण शुरू हो चुका है। पिछले तीन चरणों में सहारनपुर की विफलता की प्रमुख वजह कचरा बना है। हैरत की बात यह है कि नगर निगम अब भी कचरा प्रबंधन को लेकर गंभीर नहीं है। चौथे चरण में भी प्रपोजल (प्रस्ताव) तैयार करने में मात्र औपचारिकताएं निभाई जा रही हैं, जिससे आगामी चरण में भी चयन की उम्मीद कम ही है।
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना स्मार्ट सिटी के तहत पहले चरण में सौ शहरों को लिया जाना था, मगर किन्हीं कारणों से 98 शहर लिए जा सके थे। सहारनपुर के लिए अच्छी बात यह रही है कि इसका नाम पहले चरण से योजना में शामिल है। मगर पिछले तीन चरणों में सहारनपुर के प्रस्ताव को खारिज किया जाता रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह सहारनपुर के पास कचरा प्रबंधन की व्यवस्था न होना है। शहर से प्रतिदिन 272 मीट्रिक टन कचरा निकलता है, जिसे नगर निगम उठाकर शहर के बाहर खुले में फेंकता रहा है। हकीकत यह है कि कचरा शहरवासियों के साथ ही नगर निगम के लिए स्थाई समस्या बन चुका है, जिसका हल अधिकारियों की समझ में नहीं आ रहा है। चौथे चरण का प्रस्ताव 30 अक्तूबर तक सबमिट किया जाना है। जिसको तैयार करने में नगर निगम अभी मंथन कर रहा है। उधर, नगरायुक्त गौरव वर्मा ने बताया कि वह पिछली गलतियों से सबक लेकर इस बार प्रभावी प्रस्ताव तैयार करने पर विचार कर रहे हैं। उम्मीद है इस बार सहारनपुर का चयन होगा।
शासन ने दिए थे जमीन तलाशने के आदेश
सहारनपुर में कचरा प्रबंधन की व्यवस्था नहीं होने से शासन भी वाकिफ है। यही वजह है कि करीब एक साल पहले शासन ने जिला प्रशासन को कचरा प्रबंधन के लिए जमीन तलाशने के आदेश दिए थे। तत्कालीन डीएम ने नगर निगम के अधिकारियों समेत सभी एसडीएम की बैठक बुलाकर अपने-अपने क्षेत्र में जमीन तलाशने को कहा था। करीब दो महीने खाक छानने के बाद जनपद में कचरा प्रबंधन के लिए जमीन नहीं मिल सकी। इससे शासन को भी अवगत करा दिया गया।
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एनजीओ के प्रयास नाकाफी
कई साल से एक एनजीओ घर-घर से कचरा इकट्ठा कर उससे खाद तैयार कर रहा है, जो कृषि में काम आती है। मगर एनजीओ द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले कचरे की मात्रा कुल कचरे से मात्र सात से दस फीसदी है, जो काफी नहीं है। घर-घर से कचरा इकट्ठा करने की एवज में नागरिकों से शुल्क भी वसूला जा रहा है।
हिम्मत तोड़ रहे अधिकारी
स्मार्ट सिटी की टीम योजना के चौथे चरण के लिए मजबूत प्रस्ताव बनाने की तैयारी में जुट गई है। मगर नगर निगम के अधिकारियों की उल्टी सीधी बयानबाजी कर उनकी हिम्मत को तोड़ने का काम कर रही है। नगर निगम के एक जिम्मेदार अधिकारी का तो यहां तक कहना है कि सहारनपुर नगर निगम बनने के लायक नहीं था, मगर फिर भी इसे नगर निगम बनाया गया। उनका यह भी कहना है कि सहारनपुर स्मार्ट सिटी के लिए कभी चयनित नहीं हो सकेगा। इससे पहले पूर्व नगरायुक्त भी इस तरह की बात सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं।
चयन प्रक्रिया में ये कमियां भी बनीं बाधा
- कचरा प्रबंधन की व्यवस्था नहीं होना।
- सिटी के लिए यातायात की व्यवस्था दुरुस्त नहीं होना।
- सड़कों पर हुआ अतिक्र मण।
- नगर निगम की जमीनों पर हुए कब्जे।
- यातायात व्यवस्था बनाने के लिए सिंगल सिस्टम का फेल होना।
- पुलिस, शिक्षा, विद्युत समेत तमाम विभागों से सूचना न मिलना आदि।
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सहारनपुर। स्मार्ट सिटी योजना का चौथा चरण शुरू हो चुका है। पिछले तीन चरणों में सहारनपुर की विफलता की प्रमुख वजह कचरा बना है। हैरत की बात यह है कि नगर निगम अब भी कचरा प्रबंधन को लेकर गंभीर नहीं है। चौथे चरण में भी प्रपोजल (प्रस्ताव) तैयार करने में मात्र औपचारिकताएं निभाई जा रही हैं, जिससे आगामी चरण में भी चयन की उम्मीद कम ही है।
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना स्मार्ट सिटी के तहत पहले चरण में सौ शहरों को लिया जाना था, मगर किन्हीं कारणों से 98 शहर लिए जा सके थे। सहारनपुर के लिए अच्छी बात यह रही है कि इसका नाम पहले चरण से योजना में शामिल है। मगर पिछले तीन चरणों में सहारनपुर के प्रस्ताव को खारिज किया जाता रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह सहारनपुर के पास कचरा प्रबंधन की व्यवस्था न होना है। शहर से प्रतिदिन 272 मीट्रिक टन कचरा निकलता है, जिसे नगर निगम उठाकर शहर के बाहर खुले में फेंकता रहा है। हकीकत यह है कि कचरा शहरवासियों के साथ ही नगर निगम के लिए स्थाई समस्या बन चुका है, जिसका हल अधिकारियों की समझ में नहीं आ रहा है। चौथे चरण का प्रस्ताव 30 अक्तूबर तक सबमिट किया जाना है। जिसको तैयार करने में नगर निगम अभी मंथन कर रहा है। उधर, नगरायुक्त गौरव वर्मा ने बताया कि वह पिछली गलतियों से सबक लेकर इस बार प्रभावी प्रस्ताव तैयार करने पर विचार कर रहे हैं। उम्मीद है इस बार सहारनपुर का चयन होगा।
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शासन ने दिए थे जमीन तलाशने के आदेश
सहारनपुर में कचरा प्रबंधन की व्यवस्था नहीं होने से शासन भी वाकिफ है। यही वजह है कि करीब एक साल पहले शासन ने जिला प्रशासन को कचरा प्रबंधन के लिए जमीन तलाशने के आदेश दिए थे। तत्कालीन डीएम ने नगर निगम के अधिकारियों समेत सभी एसडीएम की बैठक बुलाकर अपने-अपने क्षेत्र में जमीन तलाशने को कहा था। करीब दो महीने खाक छानने के बाद जनपद में कचरा प्रबंधन के लिए जमीन नहीं मिल सकी। इससे शासन को भी अवगत करा दिया गया।
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एनजीओ के प्रयास नाकाफी
कई साल से एक एनजीओ घर-घर से कचरा इकट्ठा कर उससे खाद तैयार कर रहा है, जो कृषि में काम आती है। मगर एनजीओ द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले कचरे की मात्रा कुल कचरे से मात्र सात से दस फीसदी है, जो काफी नहीं है। घर-घर से कचरा इकट्ठा करने की एवज में नागरिकों से शुल्क भी वसूला जा रहा है।
हिम्मत तोड़ रहे अधिकारी
स्मार्ट सिटी की टीम योजना के चौथे चरण के लिए मजबूत प्रस्ताव बनाने की तैयारी में जुट गई है। मगर नगर निगम के अधिकारियों की उल्टी सीधी बयानबाजी कर उनकी हिम्मत को तोड़ने का काम कर रही है। नगर निगम के एक जिम्मेदार अधिकारी का तो यहां तक कहना है कि सहारनपुर नगर निगम बनने के लायक नहीं था, मगर फिर भी इसे नगर निगम बनाया गया। उनका यह भी कहना है कि सहारनपुर स्मार्ट सिटी के लिए कभी चयनित नहीं हो सकेगा। इससे पहले पूर्व नगरायुक्त भी इस तरह की बात सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं।
चयन प्रक्रिया में ये कमियां भी बनीं बाधा
- कचरा प्रबंधन की व्यवस्था नहीं होना।
- सिटी के लिए यातायात की व्यवस्था दुरुस्त नहीं होना।
- सड़कों पर हुआ अतिक्र मण।
- नगर निगम की जमीनों पर हुए कब्जे।
- यातायात व्यवस्था बनाने के लिए सिंगल सिस्टम का फेल होना।
- पुलिस, शिक्षा, विद्युत समेत तमाम विभागों से सूचना न मिलना आदि।