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रमजान में जकात निकालने का 70 गुना सवाब : मुजम्मिल अली
Wed, 27 Mar 2024 02:30 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Wed, 27 Mar 2024 02:30 AM IST
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देवबंद। मदरसा जामिया तुश शेख हुसैन अहमद अल मदनी के मोहतमिम मौलाना मुजम्मिल अली ने कहा कि पवित्र रमजान माह अहमियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस माह में जकात निकालने पर अल्लाह ताआला आम दिनों से 70 गुना सवाब देता है।
मुकद्दस रमजान के महीने की फजीलतों पर रोशनी डालते हुए मौलाना मुजम्मिल ने कहा कि पूरे साल में किसी भी महीने और किसी भी दिन जकात निकाली जा सकती है, लेकिन अगर यही काम रमजान के महीने में किया जाए तो अल्लाह ताआला अपने बंदों को इस अमल के लिए 70 गुना सवाब देगा। उन्होंने कहा कि हराम माल में जकात वाजिब नहीं होगी। अगर किसी के पास हलाल व हराम माल मिला जुला है तो उसमें से हराम माल अलग करके देखा जाएगा, जिसके बाद जकात अदा की जाएगी।
मौलाना मुजम्मिल ने कहा कि अगर किसी औरत के पास निसाब के बराबर जेवरात हों या नकद रुपये हों तो इस पर जकात है। क्योंकि वह जेवरात की मालिक है इसके लिए उसे शौहर की इजाजत या मर्जी जरूरी नहीं है। उसे ये जकात अपने पास से अदा करनी चाहिए। अगर देने के लिए पैसे नहीं हैं तो जेवर बेचे, लेकिन जकात जरूर अदा करें। हां अगर शौहर बीवी की तरफ से दे दे या बीवी अपने शौहर से लेकर दे दे तो जकात अदा हो जाएगी।
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मुकद्दस रमजान के महीने की फजीलतों पर रोशनी डालते हुए मौलाना मुजम्मिल ने कहा कि पूरे साल में किसी भी महीने और किसी भी दिन जकात निकाली जा सकती है, लेकिन अगर यही काम रमजान के महीने में किया जाए तो अल्लाह ताआला अपने बंदों को इस अमल के लिए 70 गुना सवाब देगा। उन्होंने कहा कि हराम माल में जकात वाजिब नहीं होगी। अगर किसी के पास हलाल व हराम माल मिला जुला है तो उसमें से हराम माल अलग करके देखा जाएगा, जिसके बाद जकात अदा की जाएगी।
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मौलाना मुजम्मिल ने कहा कि अगर किसी औरत के पास निसाब के बराबर जेवरात हों या नकद रुपये हों तो इस पर जकात है। क्योंकि वह जेवरात की मालिक है इसके लिए उसे शौहर की इजाजत या मर्जी जरूरी नहीं है। उसे ये जकात अपने पास से अदा करनी चाहिए। अगर देने के लिए पैसे नहीं हैं तो जेवर बेचे, लेकिन जकात जरूर अदा करें। हां अगर शौहर बीवी की तरफ से दे दे या बीवी अपने शौहर से लेकर दे दे तो जकात अदा हो जाएगी।
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