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मुस्लिम समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर मंथन
Updated Wed, 27 Sep 2017 12:28 AM IST
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सहारनपुर। मुस्लिम समाज से जुड़े विभिन्न संगठनों द्वारा गांव हलालपुर में अमन-ए-आलम कांफ्रेंस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न मुद्दों पर सर्व सम्मति से प्रस्ताव पास कर राष्ट्रपति को भेजे जाने निर्णय लिया गया।
मंगलवार को आयोजित कांफ्रेंस की अध्यक्षता मुफ्ती शरीफ अहमद खान अध्यक्ष मुत्ताहिदा मजलिस-ए-अमन व मोहतमिम दारुल उलूम जकरिया देवबंद ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ नाते-ए-पाक से डा. आबिद हसन वफा ने किया। संचालन मौलाना शाहिद मजाहिरी मोहतमिम जामिया फलाह-ए-दारैन, प्रोफेसर शेरशाह आजम अध्यक्ष मुस्लिम इत्तहाद कांफ्रेंस व मौलाना अतहर हक्कानी सचिव तंजीम दावतुल हक ने संयुक्त रूप से किया। संयुक्त राष्ट संघ और भारत सरकार से मांग को लेकर भेजे जाने वाले प्रस्ताव को कांफ्रेंस के संयोजक व जामिया हुदल लिल आलमीन के मोहतमिम कारी सईद अहमद ने पढ़कर सुनाए। जिन्हें सर्व सम्मति से कार्यक्रम में मौजूद मुस्लिम विद्वानों ने पास किया। मोहतमिम दारुल उलूम के प्रतिनिधि मौलाना मोहम्मद यामीन, मौलाना अताउर्रहमान वजदी अमीर वहदत-ए-इस्लामी हिंद व संरक्षक मुत्ताहिदा मजलिस-ए-अमल, मौलाना मोहम्मद ताहिर शेखुल हदीस खानकाह रायपुर, मौलाना अख्तर मोहतमिम जामिया रीढ़ी ताजपुरा, मौलाना अब्दुल रशीद मिर्जापुर, मौलाना जहूर अहमद कांसी, मौलाना मोहम्मद हाशिम, मौलाना निस्तार अहमद मजाहिर, मौलाना असद, मुफ्ती अताउर्रहमान कासमी, कारी शब्बीर अहमद आदि सहित सैकड़ों मुस्लिम विद्वानों ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए।
यह प्रस्ताव किए पास
सहारनपुर। कांफ्रेंस में रोहिंग्या मुसलमानों को उनके शहरी अधिकारों, कूफी अनान आयोग की सिफारिशें लागू कर रोहिंग्या मुसलमानों को शहरी अधिकार दिए जाने और संयुक्त राष्ट्र संघ के संरक्षण में इन दस्तावेजों को जल्द उपलब्ध कराए जाने की मांग की गई। रोहिंग्या मुसलमानों सुरक्षा के तहत जल्द उनके घरों को भेजने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ कदम उठाए। म्यांमार में हो रहे अत्याचारों और बर्बरता की जांच के लिए अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल बनाया जाए। जिन देशों में शरणार्थी रह रहे हैं, उन देशों पर दबाव बनाया जाए कि इन पीड़ितों को जबरन बाहर न निकाला जाए। भारत में जिस प्रकार दूसरे देशों के लोग रह रहे हैं, उसी तरह रोहिंग्या मुसलमानों को भी रहने दिया जाए। मजलूम लोगों की सरकार मदद करे और इस मसले को सियासी चश्मे से न देखे। इसी तरह विभिन्न मुद्दों पर प्रस्ताव पास किए गए।
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मंगलवार को आयोजित कांफ्रेंस की अध्यक्षता मुफ्ती शरीफ अहमद खान अध्यक्ष मुत्ताहिदा मजलिस-ए-अमन व मोहतमिम दारुल उलूम जकरिया देवबंद ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ नाते-ए-पाक से डा. आबिद हसन वफा ने किया। संचालन मौलाना शाहिद मजाहिरी मोहतमिम जामिया फलाह-ए-दारैन, प्रोफेसर शेरशाह आजम अध्यक्ष मुस्लिम इत्तहाद कांफ्रेंस व मौलाना अतहर हक्कानी सचिव तंजीम दावतुल हक ने संयुक्त रूप से किया। संयुक्त राष्ट संघ और भारत सरकार से मांग को लेकर भेजे जाने वाले प्रस्ताव को कांफ्रेंस के संयोजक व जामिया हुदल लिल आलमीन के मोहतमिम कारी सईद अहमद ने पढ़कर सुनाए। जिन्हें सर्व सम्मति से कार्यक्रम में मौजूद मुस्लिम विद्वानों ने पास किया। मोहतमिम दारुल उलूम के प्रतिनिधि मौलाना मोहम्मद यामीन, मौलाना अताउर्रहमान वजदी अमीर वहदत-ए-इस्लामी हिंद व संरक्षक मुत्ताहिदा मजलिस-ए-अमल, मौलाना मोहम्मद ताहिर शेखुल हदीस खानकाह रायपुर, मौलाना अख्तर मोहतमिम जामिया रीढ़ी ताजपुरा, मौलाना अब्दुल रशीद मिर्जापुर, मौलाना जहूर अहमद कांसी, मौलाना मोहम्मद हाशिम, मौलाना निस्तार अहमद मजाहिर, मौलाना असद, मुफ्ती अताउर्रहमान कासमी, कारी शब्बीर अहमद आदि सहित सैकड़ों मुस्लिम विद्वानों ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए।
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यह प्रस्ताव किए पास
सहारनपुर। कांफ्रेंस में रोहिंग्या मुसलमानों को उनके शहरी अधिकारों, कूफी अनान आयोग की सिफारिशें लागू कर रोहिंग्या मुसलमानों को शहरी अधिकार दिए जाने और संयुक्त राष्ट्र संघ के संरक्षण में इन दस्तावेजों को जल्द उपलब्ध कराए जाने की मांग की गई। रोहिंग्या मुसलमानों सुरक्षा के तहत जल्द उनके घरों को भेजने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ कदम उठाए। म्यांमार में हो रहे अत्याचारों और बर्बरता की जांच के लिए अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल बनाया जाए। जिन देशों में शरणार्थी रह रहे हैं, उन देशों पर दबाव बनाया जाए कि इन पीड़ितों को जबरन बाहर न निकाला जाए। भारत में जिस प्रकार दूसरे देशों के लोग रह रहे हैं, उसी तरह रोहिंग्या मुसलमानों को भी रहने दिया जाए। मजलूम लोगों की सरकार मदद करे और इस मसले को सियासी चश्मे से न देखे। इसी तरह विभिन्न मुद्दों पर प्रस्ताव पास किए गए।
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