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Saharanpur News: स्वच्छता पर 37 करोड़ खर्च, फिर भी चिढ़ा रहे कूड़े के ढेर

Mon, 10 Feb 2025 12:03 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 10 Feb 2025 12:03 AM IST
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37 crores spent on sanitation, still piles of irritating garbage
- जगह-जगह लगे हैं गांवों में कूड़े के ढेर, कूड़ा ढोने वाले ई-रिक्शा भी हुए गायब
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फोटो-13 से 17 तक
संवाद न्यूज एजेंसी

बड़गांव। जिले के गांवों में स्वच्छता के लिए करोड़ों रुपये खर्च हो गए। इसके बावजूद भी गांवों में गंदगी ही दिखाई देती है। यह किसी एक गांव की स्थिति नहीं है, बल्कि अधिकतर गांवों में ऐसा ही हाल है। अब ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर स्वच्छता के लिए आए करोड़ों रुपये खर्च कहा हुए हैं।

दरअसल, स्वच्छ भारत मिशन फेज-टू के तहत गांवों को ओडीएफ प्लस बनाने के लिए वर्ष 2024-25 में जिले की 468 ग्राम पंचायतों में करीब 37 करोड़ रुपये आवंटित हुए थे। इनसे गांवों में खाद के गड्ढे, आरसीसी सेंटर, शॉकपिट, पानी निकासी की नाली, नाले, कूड़ा एकत्र करने को ई-रिक्शा खरीदने समेत अन्य कार्य कराए जाने थे, जिससे स्वच्छता बनी रहे। यह बजट अधिकतर जगह खर्च कर दिया गया है। बावजूद इसके गांवों में हालात नहीं सुधरे हैं। जगह-जगह गंदगी और जलभराव की समस्या है।
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- यह बोले ग्रामीण और प्रधान

-दल्हेड़ी गांव के कर्म सिंह कश्यप का कहना है कि गांव में सड़क किनारे गंदगी के बड़े-बड़े ढेर लगे हैं। इससे वहां से निकलने तक में परेशानी होती है, जहां विभाग द्वारा कूड़ेदान बनाए हैं वहां बाहर तक कूड़े के ढेर लगे हैं।
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-बड़गांव के पूर्व प्रधान सुखपाल शर्मा बताते हैं कि किसी भी गांव में कूड़ा ढोने के लिए विभाग द्वारा खरीदी गई ई-रिक्शाएं दिखाई नहीं देतीं हैं। इसकी पड़ताल होनी चाहिए।

-दल्हेड़ी के प्रधान सुरेंद्र प्रजापति का कहना है कि उनके गांव में जितना भी बजट आया था, उससे कुछ खाद के गड्ढे बनवाए थे। गांव में सफाई भी नियमित कराई जाती है।
-बड़गांव के प्रधान शिव कुमार राणा कहते हैं कि गांव में सफाई कर्मचारियों की तैनाती आबादी के हिसाब से बहुत ही कम है, जिस कारण पूरे गांव की सफाई नहीं हो पा रही है।


- गांवों में यदि अब भी गंदगी और जलभराव की कोई समस्या है तो उसका निदान कराया जाएगा। यदि कहीं अनियमितता हुई है तो उसकी जांच की जाएगी। - आलोक शर्मा, जिला पंचायत राज अधिकारी
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