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सात साल बाद फिर एक होगा काजी परिवार
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सात साल बाद फिर एक होगा काजी परिवार
सहारनपुर। राजनीति में दोस्ती और दुश्मनी स्थायी नहीं होती। जो कभी दोस्त होते हैं, वह राजनीतिक दुश्मन भी बन सकते हैं और दुश्मनी को भूलकर दोस्त बनते हुए देर भी नहीं लगती है। ऐसा ही होने जा रहा है सहारनपुर की राजनीति में। आगामी लोकसभा चुनाव के लिए काजी परिवार फिर से एक हो रहा है। इसकी विधिवत घोषणा सोमवार को हो जाएगी। बीते सात साल से काजी परिवार की राहें जुदा थीं, लेकिन आगामी चुनाव में यह परिवार एक मंच पर नजर आएगा। इसमें इमरान मसूद के चुनाव लड़ने की स्थिति के बारे में भी निर्णय लिया जा सकता है।
बता दें कि पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री काजी रशीद मसूद का सहारनपुर की राजनीति में लंबा सफर रहा है। वह 1977 से 2004 तक पांच बार सहारनपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए। 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव तक काजी रशीद मसूद और उनके भतीजे इमरान मसूद एक साथ थे। लेकिन उसके बाद दोनों की सियासी राहें अलग हो गई थीं। तब से अब तक सात साल बीत चुके हैं। काजी रशीद मसूद और इमरान मसूद अलग ही पार्टी में रहे, जिसका खामियाजा खुद इस परिवार को भुगतना पड़ा क्योंकि 2012 के विधानसभा चुनाव, फिर 2014 के लोकसभा चुनाव और 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में हर बार चुनाव लड़ा गया, लेकिन जीत हासिल नहीं हो सकी थी।
ऐसे जुदा हुई थीं राहें
वर्ष 2009 में काजी रशीद मसूद सपा में थे और सहारनपुर सीट से चुनाव लड़कर दूसरे नंबर पर रहे थे। इसके बाद वह कांग्रेस में शामिल हो गए थे। वर्ष 2012 में काजी रशीद मसूद और इमरान मसूद कांग्रेस में थे। तब नकुड़ विधानसभा सीट से इमरान ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन वह चुनाव हार गए थे। इसके बाद इमरान मसूद ने अपना अलग राजनीतिक वजूद बनाने के लिए समाजवादी पार्टी ज्वाइन कर ली थी। इसके बाद जब 2014 का लोकसभा चुनाव आया, तब तक सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने काजी रशीद मसूद को सपा ज्वाइन करा दी थी। ऐसे में इमरान मसूद ने सपा छोड़कर कांग्रेस ज्वाइन कर ली। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में इमरान मसूद ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा तो काजी रशीद मसूद के बेटे शाजान मसूद ने सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा। उस चुनाव में इमरान मसूद दूसरे नंबर पर रहे थे, जबकि शाजान मसूद चौथे नंबर पर। इस स्थिति में भी काजी परिवार एक नहीं हुआ था।
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- बदले हालात तो एक होने की शुरू हुई कोशिश
मौजूदा समय में काजी रशीद मसूद और उनके बेटे शाजान मसूद बहुजन समाज पार्टी में हैं। दो साल पूर्व जब सहारनपुर नगर निगम का चुनाव हुआ था तो शाजान मसूद भी बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते थे। लेकिन ऐन वक्त पर बसपा ने फजलुर्रहमान को प्रत्याशी बना दिया था। अब आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर भी काजी रशीद मसूद तथा उनके बेटे शाजान मसूद बसपा के टिकट की दावेदारी में रहे। इस चुनाव में बसपा-सपा गठबंधन है। इसमें सहारनपुर लोकसभा सीट बसपा के खाते में गई है। बसपा की तरफ से टिकट की हरी झंडी न मिलने की वजह से भी काजी रशीद मसूद और उनके बेटे शाजान मसूद नाराज दिखाई दे रहे थे। नाराजगी इस हद तक पहुंच गई थी कि वह बसपा के प्रमुख कार्यक्रमों से भी किनारा करने लगे थे। इन हालात में अब काजी परिवार फिर से एक होने की कोशिश कर रहा है।
चुनावी समीकरणों में आएगा बदलाव
आगामी लोकसभा चुनाव में सपा और बसपा गठबंधन के प्रत्याशी को एससी-एसटी और मुस्लिम मतदाताओं की संख्या के लिहाज से मजबूत माना जा रहा है। जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे ही समीकरणों में बदलाव भी होने लगा है। का जी परिवार एक मंच पर आने से सहारनपुर लोकसभा सीट का चुनाव दिलचस्प हो जाएगा। सहारनपुर सीट के साथ ही इसका असर कैराना लोकसभा सीट पर भी पड़ सकता है, क्योंकि कैराना लोकसभा क्षेत्र में सहारनपुर जिले के नकुड़ और गंगोह विधानसभा क्षेत्र जुड़े हुए हैं। इन दोनों विधानसभा क्षेत्र में काजी परिवार का अच्छा असर बताया जाता है।
लोकसभा चुनाव 2014 का परिणाम
-- प्रत्याशी -------------- पार्टी ------ प्राप्त वोट
राघव लखनपाल शर्मा --- भाजपा -- 4,72,999
इमरान मसूद --------- कांग्रेस ----- 4,07,909
जगदीश सिंह राणा---- बसपा ------ 2,35,033
शाजान मसूद -------- सपा -------- 52,765
लोकसभा चुनाव 2009 परिणाम
-- प्रत्याशी --------------- पार्टी ---------- प्राप्त वोट
जगदीश सिंह राणा ---- बसपा ----------- 3,54,807
रशीद मसूद ------------ सपा ------------ 2,69,934
जसवंत सिंह सैनी ----- भाजपा---------- 99,894
गजे सिंह -------------- कांग्रेस ---------- 62,593
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सहारनपुर। राजनीति में दोस्ती और दुश्मनी स्थायी नहीं होती। जो कभी दोस्त होते हैं, वह राजनीतिक दुश्मन भी बन सकते हैं और दुश्मनी को भूलकर दोस्त बनते हुए देर भी नहीं लगती है। ऐसा ही होने जा रहा है सहारनपुर की राजनीति में। आगामी लोकसभा चुनाव के लिए काजी परिवार फिर से एक हो रहा है। इसकी विधिवत घोषणा सोमवार को हो जाएगी। बीते सात साल से काजी परिवार की राहें जुदा थीं, लेकिन आगामी चुनाव में यह परिवार एक मंच पर नजर आएगा। इसमें इमरान मसूद के चुनाव लड़ने की स्थिति के बारे में भी निर्णय लिया जा सकता है।
बता दें कि पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री काजी रशीद मसूद का सहारनपुर की राजनीति में लंबा सफर रहा है। वह 1977 से 2004 तक पांच बार सहारनपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए। 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव तक काजी रशीद मसूद और उनके भतीजे इमरान मसूद एक साथ थे। लेकिन उसके बाद दोनों की सियासी राहें अलग हो गई थीं। तब से अब तक सात साल बीत चुके हैं। काजी रशीद मसूद और इमरान मसूद अलग ही पार्टी में रहे, जिसका खामियाजा खुद इस परिवार को भुगतना पड़ा क्योंकि 2012 के विधानसभा चुनाव, फिर 2014 के लोकसभा चुनाव और 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में हर बार चुनाव लड़ा गया, लेकिन जीत हासिल नहीं हो सकी थी।
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ऐसे जुदा हुई थीं राहें
वर्ष 2009 में काजी रशीद मसूद सपा में थे और सहारनपुर सीट से चुनाव लड़कर दूसरे नंबर पर रहे थे। इसके बाद वह कांग्रेस में शामिल हो गए थे। वर्ष 2012 में काजी रशीद मसूद और इमरान मसूद कांग्रेस में थे। तब नकुड़ विधानसभा सीट से इमरान ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन वह चुनाव हार गए थे। इसके बाद इमरान मसूद ने अपना अलग राजनीतिक वजूद बनाने के लिए समाजवादी पार्टी ज्वाइन कर ली थी। इसके बाद जब 2014 का लोकसभा चुनाव आया, तब तक सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने काजी रशीद मसूद को सपा ज्वाइन करा दी थी। ऐसे में इमरान मसूद ने सपा छोड़कर कांग्रेस ज्वाइन कर ली। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में इमरान मसूद ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा तो काजी रशीद मसूद के बेटे शाजान मसूद ने सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा। उस चुनाव में इमरान मसूद दूसरे नंबर पर रहे थे, जबकि शाजान मसूद चौथे नंबर पर। इस स्थिति में भी काजी परिवार एक नहीं हुआ था।
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- बदले हालात तो एक होने की शुरू हुई कोशिश
मौजूदा समय में काजी रशीद मसूद और उनके बेटे शाजान मसूद बहुजन समाज पार्टी में हैं। दो साल पूर्व जब सहारनपुर नगर निगम का चुनाव हुआ था तो शाजान मसूद भी बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते थे। लेकिन ऐन वक्त पर बसपा ने फजलुर्रहमान को प्रत्याशी बना दिया था। अब आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर भी काजी रशीद मसूद तथा उनके बेटे शाजान मसूद बसपा के टिकट की दावेदारी में रहे। इस चुनाव में बसपा-सपा गठबंधन है। इसमें सहारनपुर लोकसभा सीट बसपा के खाते में गई है। बसपा की तरफ से टिकट की हरी झंडी न मिलने की वजह से भी काजी रशीद मसूद और उनके बेटे शाजान मसूद नाराज दिखाई दे रहे थे। नाराजगी इस हद तक पहुंच गई थी कि वह बसपा के प्रमुख कार्यक्रमों से भी किनारा करने लगे थे। इन हालात में अब काजी परिवार फिर से एक होने की कोशिश कर रहा है।
चुनावी समीकरणों में आएगा बदलाव
आगामी लोकसभा चुनाव में सपा और बसपा गठबंधन के प्रत्याशी को एससी-एसटी और मुस्लिम मतदाताओं की संख्या के लिहाज से मजबूत माना जा रहा है। जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे ही समीकरणों में बदलाव भी होने लगा है। का जी परिवार एक मंच पर आने से सहारनपुर लोकसभा सीट का चुनाव दिलचस्प हो जाएगा। सहारनपुर सीट के साथ ही इसका असर कैराना लोकसभा सीट पर भी पड़ सकता है, क्योंकि कैराना लोकसभा क्षेत्र में सहारनपुर जिले के नकुड़ और गंगोह विधानसभा क्षेत्र जुड़े हुए हैं। इन दोनों विधानसभा क्षेत्र में काजी परिवार का अच्छा असर बताया जाता है।
लोकसभा चुनाव 2014 का परिणाम
-- प्रत्याशी -------------- पार्टी ------ प्राप्त वोट
राघव लखनपाल शर्मा --- भाजपा -- 4,72,999
इमरान मसूद --------- कांग्रेस ----- 4,07,909
जगदीश सिंह राणा---- बसपा ------ 2,35,033
शाजान मसूद -------- सपा -------- 52,765
लोकसभा चुनाव 2009 परिणाम
-- प्रत्याशी --------------- पार्टी ---------- प्राप्त वोट
जगदीश सिंह राणा ---- बसपा ----------- 3,54,807
रशीद मसूद ------------ सपा ------------ 2,69,934
जसवंत सिंह सैनी ----- भाजपा---------- 99,894
गजे सिंह -------------- कांग्रेस ---------- 62,593