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काला अध्याय था 1984 का दंगा

Thu, 29 Nov 2018 12:13 AM IST
Updated Thu, 29 Nov 2018 12:13 AM IST
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काला अध्याय था 1984 का दंगा
सहारनपुर। 1984 के दंगे के आरोपियों की सजा बरकरार रखने पर सिख समाज ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि 1984 का दंगा काला अध्याय था। आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। तभी सिख समाज को इंसाफ मिल सकेगा। इस मामले को सरकारों को भी गंभीरता से लेना चाहिए और पीड़ितों को आर्थिक सहायता दिलाई जाए।
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1984 के दंगे को याद कर रूह कांप जाती है। अंबाला रोड स्थित उनकी इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान को जला दिया गया था। तब उन्हें भारी नुकसान हुआ था। वह दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं। दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। - सरदार कुलबीर सिंह, अध्यक्ष रंजीत अखाड़ा गतका दल
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वह दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं, लेकिन आज भी सिख समाज को न्याय नहीं मिल सका है। दंगे के दौरान बड़ी संख्या में सिख समाज के लोगों की दुकानों और घरों को जलाया गया था। जान की हानि भी हुई थी। सिख परिवार पूरी तरह टूट चुके थे। दोषियों को कड़ी सजा देने के साथ पीड़ित लोगों के परिवारों को मुआवजा दिया जाए। - सरदार जसबीर बग्गा, प्रधान श्री गुरु सिंह सभा, सहारनपुर
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1984 का दंगा काला अध्याय है, जो कांग्रेस पार्टी की देन था। सोची-समझी साजिश के तहत सिख समाज को निशाना बनाया गया था। वह न्याय पालिका के फैसले का स्वागत करते हैं। उनकी मांग है कि इस मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाकर रोजाना सुनवाई कर पीड़ितों को पूरी तरह इंसाफ दिलाया जाए। - गुरप्रीत सिंह बग्गा, प्रदेश अध्यक्ष शिरोमणि अकाली दल उत्तर प्रदेश

दोषियों की सजा बरकरार रखकर कोर्ट ने सिख समाज के साथ न्याय प्रदान किया। दंगों को यादकर सिख समाज आज भी दहशत में आ जाता है। दोषियों को कठोर सजा देने के साथ ही पीड़ितों को मुआवजा दिया जाए। दंगे के दौरान दिल्ली और उत्तर प्रदेश के सिख समाज पर सबसे ज्यादा अत्याचार हुआ था।
- सरदार बलविंद्र सिंह, निवासी सरसावा

न्यायालय पर उन्हें पूरा भरोसा है। आरोपियों की सजा बरकरार रखना सच्चाई की जीत है। 1984 में दंगा नहीं बल्कि नरसंहार था, जिसमेें साजिश के तहत सिख समाज को निशाना बनाया गया। एक-एक आरोपियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। - इंद्रजीत सिंह खालसा, निवासी गुरुद्वारा रोड


उन्होंने दंगेे के दौरान कत्लेआम देखा है। उन्हें याद है कि सहारनपुर की नेहरू मार्केट में एक-एक कर दुकानों को जलाया गया था। 1984 के दंगे का खौफ आज भी सिख समाज के लोगों के मन घर किए हुए है। दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले से सिख समाज को राहत मिली है। न्यायालय का फैसला स्वागत योग्य है। - सरदार दीपेंद्र सिंह, नेहरू मार्केट के कपड़ा कारोबारी।
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