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जहरीली होती जा रही शहर की हवा, सोए हैं विभाग
Updated Sat, 24 Feb 2018 12:05 AM IST
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सहारनपुर। पिछले दिनों दिल्ली समेत एनसीआर के अनेक शहरों में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर रहा था। सहारनपुर मंडल के मुजफ्फरनगर में भी 450 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और सहारनपुर जनपद में 350 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक रहा था। मगर हैरत की बात यह है कि प्रदूषण रोकने के लिए जिम्मेदार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समेत तमाम विभागों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए।
अकेले सहारनपुर जनपद में वायु प्रदूषण फैलाने वाले कारखानों और मिलों की संख्या सौ से अधिक है, जिनमें कई कारखाने अवैध रूप से चल रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास कारखानों की जो सूची है उनमें भी अधिकतर कारखाने नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। शहर में ही कई मिल और कारखानों की चिमनियां धुएं के रूप में लगातार जहर उगल रही हैं। इसके बावजूद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी सोए हुए हैं। इतना ही नहीं, ईंट भट्ठे भी वायु प्रदूषण की एक वजह हैं, जिनमें अत्यधिक धुआं देने वाली लकड़ियों के साथ ही पुराने टायरों की रबर तक जलाई जाती है। जनपद में पिछले वर्ष प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने करीब डेढ़ सौ ईंट भट्ठों को नोटिस जारी किए थे। मगर फिर से कई ईंट भट्ठे रबर का इस्तेमाल कर रहे हैं। सहारनपुर में बृहस्पतिवार यानी 22 फरवरी को 99.99 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर प्रदूषण था, जो सही संकेत नहीं हैं। एनजीटी की तमाम सख्ती के बावजूद अफसरों का रवैया लापरवाह है।
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मात्र एक मिल की चिमनी में लगा है ईएसपी
कारखानों की चिमनियों से निकलने वाले जहरीले धुएं में घुले खतरनाक कार्बन आदि को रोकने के लिए चिमनियों में उपकरण लगाए जाते हैं। इन उपकरणों में वेट स्क्रबर, साइक्लोन और ईएसपी यानी इलेक्ट्रोस्टेट प्रेसीपिटेटर है। शेष कारखानों में से कुछ ही ने वेबस्क्रबर या साइक्लोन लगवाए हुए हैं। अन्यथा ज्यादातर कारखानों की चिमनियों से खतरनाक धुआं निकलकर सीधे हवा में घुल रहा है।
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खटारा वाहन हवा में घोल रहे धुएं का जहर
शहर के साथ ही देहात में भी हजारों की संख्या में खटारा वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। शहर में चलने वाले खटारा वाहनों में सबसे अधिक संख्या बसों, टेंपो, ट्रक और जुगाड़ों की है। उम्र पूरी कर चुके और जर्जर हो चुके खटारा वाहनों की संख्या छह हजार से अधिक बताई जा रही है। मगर आरटीओ की ओर से ठोस कदम इन वाहनों पर कार्रवाई के लिए नहीं उठाए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, शहर में चलने वाले 80 प्रतिशत से अधिक वाहनों पर प्रदूषण सर्टिफिकेट नहीं है। कहने को जनपद में 17 प्रदूषण जांच केंद्र हैं, मगर उनका काम नजर नहीं आ रहा है।
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नगर निगम की ओर से भी कार्रवाई नहीं
कचरा जलाने से रोकने की जिम्मेदारी नगर निगम की है। मगर शहर में लगातार कचरा जलाया जा रहा है। बाजारों में दुकानों की सफाई के बाद दुकानदार कचरा और पॉलीथिन को सड़कों पर रखकर जलाते हैं। इसके अलावा पुराने शहर में कंडम टायरों की रबर उतारी जाती है। टायर से तार निकालने के लिए लोग टायरों को जलाते हैं।
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सेहत पर सीधे असर कर रहा वायु प्रदूषण
वायु प्रदूषण सेहत के लिए बेहद खतरनाक है। हवा में घुला धुएं, धूल और अन्य केमिकल्स का जहर सांस के साथ हमारे शरीर में प्रवेश कर शरीर को भीतर से नुकसान पहुंचाता है। वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. संजीव मिगलानी बताते हैं कि वायु प्रदूषण खासकर खतरनाक धुआं व धूल दमा, फेफड़े, मधुमेह, दिमाग और दिल के मरीजों के लिए बेहद खतरनाक है। इसके अलावा बच्चों और गर्भवती महिलाओं के गर्भ में पल रहे बच्चे का भी यह नुकसान पहुंचाता है।
------ धुंआ उगलने वाले वाहनों पर कार्रवाई के लिए एआरटीओ के नेतृत्व में समय-समय पर अभियान चलाया जाता है। हम खटारा और धुआं उगलने वाले वाहनों के चालान काटते हैं। जनपद में 17 प्रदूषण जांच केंद्र खुले हैं। एआरटीओ उन केंद्रों की कार्यप्रणाली की भी जांच करते हैं, जिसमें यह देखा जाता है कि वह नियमों के अनुसार काम कर रहे हैं या नहीं।
कपिल देव सिंह, आरटीओ।
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नगर निगम कचरे को जलाता नहीं है। इसके लिए हमने अपने अधिकारियों को सख्त निर्देश भी दिए हुए हैं कि कचरा जलाया न जाए। जो लोग कचरा जला रहे हैं उनको चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी।
गौरव वर्मा, नगरायुक्त।
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वायु प्रदूषण को रोकने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पूरी गंभीरता के साथ काम कर रहा है। मगर जब तक धुआं उगलने वाले वाहनों को सड़कों से हटाया नहीं जाएगा या जब तक कचरा जलाया जाता रहेगा। तब तक वायु प्रदूूषण पर नियंत्रण पाना संभव नहीं है। यही वजह है कि वायु प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है।
विवेक रॉय, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
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अकेले सहारनपुर जनपद में वायु प्रदूषण फैलाने वाले कारखानों और मिलों की संख्या सौ से अधिक है, जिनमें कई कारखाने अवैध रूप से चल रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास कारखानों की जो सूची है उनमें भी अधिकतर कारखाने नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। शहर में ही कई मिल और कारखानों की चिमनियां धुएं के रूप में लगातार जहर उगल रही हैं। इसके बावजूद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी सोए हुए हैं। इतना ही नहीं, ईंट भट्ठे भी वायु प्रदूषण की एक वजह हैं, जिनमें अत्यधिक धुआं देने वाली लकड़ियों के साथ ही पुराने टायरों की रबर तक जलाई जाती है। जनपद में पिछले वर्ष प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने करीब डेढ़ सौ ईंट भट्ठों को नोटिस जारी किए थे। मगर फिर से कई ईंट भट्ठे रबर का इस्तेमाल कर रहे हैं। सहारनपुर में बृहस्पतिवार यानी 22 फरवरी को 99.99 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर प्रदूषण था, जो सही संकेत नहीं हैं। एनजीटी की तमाम सख्ती के बावजूद अफसरों का रवैया लापरवाह है।
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मात्र एक मिल की चिमनी में लगा है ईएसपी
कारखानों की चिमनियों से निकलने वाले जहरीले धुएं में घुले खतरनाक कार्बन आदि को रोकने के लिए चिमनियों में उपकरण लगाए जाते हैं। इन उपकरणों में वेट स्क्रबर, साइक्लोन और ईएसपी यानी इलेक्ट्रोस्टेट प्रेसीपिटेटर है। शेष कारखानों में से कुछ ही ने वेबस्क्रबर या साइक्लोन लगवाए हुए हैं। अन्यथा ज्यादातर कारखानों की चिमनियों से खतरनाक धुआं निकलकर सीधे हवा में घुल रहा है।
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खटारा वाहन हवा में घोल रहे धुएं का जहर
शहर के साथ ही देहात में भी हजारों की संख्या में खटारा वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। शहर में चलने वाले खटारा वाहनों में सबसे अधिक संख्या बसों, टेंपो, ट्रक और जुगाड़ों की है। उम्र पूरी कर चुके और जर्जर हो चुके खटारा वाहनों की संख्या छह हजार से अधिक बताई जा रही है। मगर आरटीओ की ओर से ठोस कदम इन वाहनों पर कार्रवाई के लिए नहीं उठाए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, शहर में चलने वाले 80 प्रतिशत से अधिक वाहनों पर प्रदूषण सर्टिफिकेट नहीं है। कहने को जनपद में 17 प्रदूषण जांच केंद्र हैं, मगर उनका काम नजर नहीं आ रहा है।
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नगर निगम की ओर से भी कार्रवाई नहीं
कचरा जलाने से रोकने की जिम्मेदारी नगर निगम की है। मगर शहर में लगातार कचरा जलाया जा रहा है। बाजारों में दुकानों की सफाई के बाद दुकानदार कचरा और पॉलीथिन को सड़कों पर रखकर जलाते हैं। इसके अलावा पुराने शहर में कंडम टायरों की रबर उतारी जाती है। टायर से तार निकालने के लिए लोग टायरों को जलाते हैं।
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सेहत पर सीधे असर कर रहा वायु प्रदूषण
वायु प्रदूषण सेहत के लिए बेहद खतरनाक है। हवा में घुला धुएं, धूल और अन्य केमिकल्स का जहर सांस के साथ हमारे शरीर में प्रवेश कर शरीर को भीतर से नुकसान पहुंचाता है। वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. संजीव मिगलानी बताते हैं कि वायु प्रदूषण खासकर खतरनाक धुआं व धूल दमा, फेफड़े, मधुमेह, दिमाग और दिल के मरीजों के लिए बेहद खतरनाक है। इसके अलावा बच्चों और गर्भवती महिलाओं के गर्भ में पल रहे बच्चे का भी यह नुकसान पहुंचाता है।
------ धुंआ उगलने वाले वाहनों पर कार्रवाई के लिए एआरटीओ के नेतृत्व में समय-समय पर अभियान चलाया जाता है। हम खटारा और धुआं उगलने वाले वाहनों के चालान काटते हैं। जनपद में 17 प्रदूषण जांच केंद्र खुले हैं। एआरटीओ उन केंद्रों की कार्यप्रणाली की भी जांच करते हैं, जिसमें यह देखा जाता है कि वह नियमों के अनुसार काम कर रहे हैं या नहीं।
कपिल देव सिंह, आरटीओ।
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नगर निगम कचरे को जलाता नहीं है। इसके लिए हमने अपने अधिकारियों को सख्त निर्देश भी दिए हुए हैं कि कचरा जलाया न जाए। जो लोग कचरा जला रहे हैं उनको चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी।
गौरव वर्मा, नगरायुक्त।
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वायु प्रदूषण को रोकने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पूरी गंभीरता के साथ काम कर रहा है। मगर जब तक धुआं उगलने वाले वाहनों को सड़कों से हटाया नहीं जाएगा या जब तक कचरा जलाया जाता रहेगा। तब तक वायु प्रदूूषण पर नियंत्रण पाना संभव नहीं है। यही वजह है कि वायु प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है।
विवेक रॉय, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।