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Saharanpur News: अत्यंत कुपोषण के शिकंजे में जनपद के 3026 नौनिहाल
Mon, 09 Sep 2024 12:42 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Mon, 09 Sep 2024 12:42 AM IST
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सहारनपुर। राष्ट्रीय पोषण माह चल रहा है। जिले में सैम श्रेणी में आने वाले अत्यंत कुपोषित बच्चों की संख्या 3026 है। मैम श्रेणी में 11253 कुपोषित बच्चे हैं। इनके स्वास्थ्य में सुधार लाने की कवायद की जा रही है, लेकिन अत्यंत कुपोषित बच्चों के लिए जिला अस्पताल में बने पोषण पुनर्वास केंद्र में मात्र दस बेड आरक्षित हैं। ऐसे में सभी अत्यंत कुपोषित बच्चों को कैसे इलाज मिले।
दरअसल, एक सितंबर से राष्ट्रीय पोषण माह की शुरुआत हुई है, जो पूरे माह चलेगा। जिले में 3410 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इस वर्ष अत्यंत कुपोषित 3026 और कुपोषित बच्चों की संख्या 11253 है। इन बच्चों को कुपोषण से बाहर लाने की कवायद चल रही है। इसके तहत पुष्टाहार में दाल, दलिया और रिफाइंड दिया जा रहा है, लेकिन बच्चों की हालत में सुधार कम हुआ है। अत्यंत कुपोषित बच्चों को 14 दिन के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती करना होता है, लेकिन यहां दस बेड ही आरक्षित हैं। ऐसे में सभी अत्यंत कुपोषित बच्चों को कैसे इलाज मिले।
- ये हैं कुपोषण लक्षण
- बच्चे का वजन नहीं बढ़ता है। जन्म के समय दो किलो से कम वजन वाला बच्चा कुपोषण की श्रेणी में आता है।
- उम्र बढ़ने के साथ ही बच्चे की लंबाई नहीं बढ़ती है। बच्चे में सुस्ती रहती है।
- अति कुपोषित बच्चे बैठ नहीं पाते हैं। खेलकूद में भी उनकी रुचि नहीं होती है।
- कुपोषित बच्चे जल्द संक्रमित होकर बीमारी के शिकंजे में आते हैं।
-- - ऐसे करें अभिभावक बचाव
- रोजाना डेढ़ से दो कटोरी दाल व दलिया दिया जाए।
- मिले जुले अनाज की रोटी बनाकर खिलाई जाए।
- जन्म से लेकर दो साल तक बच्चे रोज चार कप दूध पिलाएं।
- छह माह की आयु तक बच्चे को मां का दूध पिलाएं।
- बच्चे को उबला हुआ पानी दें। ताकि किसी तरह संक्रमण न फैले।
- बच्चे को मौसमी फल का सेवन कराएं।
- वर्जन :
अत्यंत कुपोषित और कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार हुआ है। विभाग का प्रयास है कि बच्चों को स्वस्थ बनाया जाए। इसके लिए पुष्टाहार वितरित करने के साथ इलाज भी दिलाया जा रहा है। - नंद लाल प्रसाद, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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दरअसल, एक सितंबर से राष्ट्रीय पोषण माह की शुरुआत हुई है, जो पूरे माह चलेगा। जिले में 3410 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इस वर्ष अत्यंत कुपोषित 3026 और कुपोषित बच्चों की संख्या 11253 है। इन बच्चों को कुपोषण से बाहर लाने की कवायद चल रही है। इसके तहत पुष्टाहार में दाल, दलिया और रिफाइंड दिया जा रहा है, लेकिन बच्चों की हालत में सुधार कम हुआ है। अत्यंत कुपोषित बच्चों को 14 दिन के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती करना होता है, लेकिन यहां दस बेड ही आरक्षित हैं। ऐसे में सभी अत्यंत कुपोषित बच्चों को कैसे इलाज मिले।
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- ये हैं कुपोषण लक्षण
- बच्चे का वजन नहीं बढ़ता है। जन्म के समय दो किलो से कम वजन वाला बच्चा कुपोषण की श्रेणी में आता है।
- उम्र बढ़ने के साथ ही बच्चे की लंबाई नहीं बढ़ती है। बच्चे में सुस्ती रहती है।
- अति कुपोषित बच्चे बैठ नहीं पाते हैं। खेलकूद में भी उनकी रुचि नहीं होती है।
- कुपोषित बच्चे जल्द संक्रमित होकर बीमारी के शिकंजे में आते हैं।
- रोजाना डेढ़ से दो कटोरी दाल व दलिया दिया जाए।
- मिले जुले अनाज की रोटी बनाकर खिलाई जाए।
- जन्म से लेकर दो साल तक बच्चे रोज चार कप दूध पिलाएं।
- छह माह की आयु तक बच्चे को मां का दूध पिलाएं।
- बच्चे को उबला हुआ पानी दें। ताकि किसी तरह संक्रमण न फैले।
- बच्चे को मौसमी फल का सेवन कराएं।
- वर्जन :
अत्यंत कुपोषित और कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार हुआ है। विभाग का प्रयास है कि बच्चों को स्वस्थ बनाया जाए। इसके लिए पुष्टाहार वितरित करने के साथ इलाज भी दिलाया जा रहा है। - नंद लाल प्रसाद, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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