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Saharanpur News: 28 सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों के पास न शिक्षक न संसाधन, मान्यता पर खतरा
Sun, 14 Jun 2026 01:09 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sun, 14 Jun 2026 01:09 AM IST
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सहारनपुर। स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू करने से पहले मां शाकुंभरी विश्वविद्यालय ने सभी सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों से उनके यहां तैनात प्राचार्यों, शिक्षकों और संसाधनों को लेकर ब्योरा तलब किया था। कुल 194 कॉलेजों में से 166 कॉलेजों ने ब्योरा दे दिया है, जबकि 28 ने कोई जवाब नहीं दिया है। माना जा रहा है कि ऐसे कॉलेज शर्तों को पूरा नहीं कर रहे हैं। ऐसे कॉलेजों की मान्यता जा सकती है।
ज्यादातर सेल्फ फाइनेंस कॉलेज वह हैं, जो पहले चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से संबद्ध थे, लेकिन मां शाकुंभरी विश्वविद्यालय बनने के बाद सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और शामली के सभी राजकीय, एडेड और सेल्फ फाइनेंस कॉलेज मां शाकुंभरी विश्वविद्यालय से संबद्ध हो गए। बीते पांच साल से अक्सर विद्यार्थी सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों की शिकायत लेकर विश्वविद्यालय पहुंचते रहे हैं। उनकी शिकायत रहती है कि पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं हैं। प्राचार्य तक की कुर्सी खाली है। प्रैक्टिकल के लिए लैब नहीं, पढ़ने को लाइब्रेरी नहीं और अन्य प्रकार की सुविधाएं भी नहीं हैं।
ऐसे में कुलपति प्रो. विमला वाई ने प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने से पहले यह साफ करने का निर्णय लिया कि किन कॉलेजों के पास संसाधन नहीं हैं और कितने कॉलेज शर्तों का पालन नहीं कर रहे हैं। विश्वविद्यालय द्वारा सभी कॉलेजों को नोटिस जारी कर उनसे ब्योरा तलब किया गया। ब्योरा देने में कॉलेजों ने एक महीने से अधिक का समय लगा दिया। हालांकि अभी तक 166 ही कॉलेज ब्योरा दे सके हैं। अब भी 28 कॉलेज ऐसे हैं, जिन्होंने न तो ब्योरा दिया और न ही कोई जवाब। विश्वविद्यालय द्वारा बार-बार मौका देने के बाद भी उनकी चुप्पी मानक पूरे न होने की ओर इशारा कर रही है। विश्वविद्यालय ऐसे कॉलेजों की मान्यताहरण कर सकता है।
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ज्यादातर सेल्फ फाइनेंस कॉलेज वह हैं, जो पहले चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से संबद्ध थे, लेकिन मां शाकुंभरी विश्वविद्यालय बनने के बाद सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और शामली के सभी राजकीय, एडेड और सेल्फ फाइनेंस कॉलेज मां शाकुंभरी विश्वविद्यालय से संबद्ध हो गए। बीते पांच साल से अक्सर विद्यार्थी सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों की शिकायत लेकर विश्वविद्यालय पहुंचते रहे हैं। उनकी शिकायत रहती है कि पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं हैं। प्राचार्य तक की कुर्सी खाली है। प्रैक्टिकल के लिए लैब नहीं, पढ़ने को लाइब्रेरी नहीं और अन्य प्रकार की सुविधाएं भी नहीं हैं।
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ऐसे में कुलपति प्रो. विमला वाई ने प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने से पहले यह साफ करने का निर्णय लिया कि किन कॉलेजों के पास संसाधन नहीं हैं और कितने कॉलेज शर्तों का पालन नहीं कर रहे हैं। विश्वविद्यालय द्वारा सभी कॉलेजों को नोटिस जारी कर उनसे ब्योरा तलब किया गया। ब्योरा देने में कॉलेजों ने एक महीने से अधिक का समय लगा दिया। हालांकि अभी तक 166 ही कॉलेज ब्योरा दे सके हैं। अब भी 28 कॉलेज ऐसे हैं, जिन्होंने न तो ब्योरा दिया और न ही कोई जवाब। विश्वविद्यालय द्वारा बार-बार मौका देने के बाद भी उनकी चुप्पी मानक पूरे न होने की ओर इशारा कर रही है। विश्वविद्यालय ऐसे कॉलेजों की मान्यताहरण कर सकता है।
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