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हजरत अब्बास अलमदार अलैहिस्लाम की शहादत का फलसफा किया ब्यां
Updated Thu, 20 Sep 2018 12:13 AM IST
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हजरत अब्बास अलमदार अलैहिस्सलाम की शहादत का फलसफा किया बयान
सहारनपुर। मोहर्रम की आठ तारीख पर हुई मजलिसों में हजरत अब्बास अलमदार अलैहिस्लाम की शहादत का फलसफा बयान किया गया।
पहली मजलिस इमाम बारगाह सामानियान मोहल्ला कायस्थान में हुई, जिसमें ईरान से मौलाना फतेह मोहम्मद जैदी ने खिताब फरमाया। मोहल्ला अंसारियान में फरहत मेंहदी के आवास पर हुई मजलिस में आजमगढ़ से आए डा. आजमी ने फलसफा बयां किया। बड़ी इमाम बारगाह जाफर नवाज में हुई मजलिस में ईरान से आए मौलाना किफायत हुसैन साहब और छोटी इमाम बारगाह में इकरोटिया जिला संभल से आए मौलाना मोहम्मद अब्बास बाकरी करबला की शहीदों पर रोशनी डाली। शिया विद्वानों ने इमाम हुसैन के भाई व इमाम हुसैन के लश्कर के सिपहसालार हजरत अब्बास अलमदार की शहादत पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि हजरत अब्बास मैदान के करीब बह रही नहर फरात से पानी लेने गये थे। उनके काफिले में छोटे-छोटे बच्चे प्यास से तड़प रहे थे। तब हजरत अब्बास बच्चों की प्यास को देख नहीं पाए। यजीदी लशकर ने जब हजरत अब्बास को पानी लेकर जाते हुए देखा तो हमला कर दिया। हजरत अब्बास के बाजू कलम कर दिए गए। हजरत अब्बास इमाम हुसैन उन हाशमी जवानों में से थे, जिनके नाम से भी यजीदी लश्कर कांपने लगता था। नोहाख्वानी सलीस हैदर काजमी, अनवर अब्बास जैदी, आसिफ रजा, मिर्जा मेहरबान, मिर्जा अयाज, मिर्जा नईम ने की। घरों मे नियाजों का अहतेमाम किया गया। ख्वाजा खुर्शीद अख्तर, प्यारे मियां, आईएम जैदी, रियाज हैदर, मोहम्मद अली हवारी, ताजिम जैदी, अली अथर जैदी मौजूद रहे।
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सहारनपुर। मोहर्रम की आठ तारीख पर हुई मजलिसों में हजरत अब्बास अलमदार अलैहिस्लाम की शहादत का फलसफा बयान किया गया।
पहली मजलिस इमाम बारगाह सामानियान मोहल्ला कायस्थान में हुई, जिसमें ईरान से मौलाना फतेह मोहम्मद जैदी ने खिताब फरमाया। मोहल्ला अंसारियान में फरहत मेंहदी के आवास पर हुई मजलिस में आजमगढ़ से आए डा. आजमी ने फलसफा बयां किया। बड़ी इमाम बारगाह जाफर नवाज में हुई मजलिस में ईरान से आए मौलाना किफायत हुसैन साहब और छोटी इमाम बारगाह में इकरोटिया जिला संभल से आए मौलाना मोहम्मद अब्बास बाकरी करबला की शहीदों पर रोशनी डाली। शिया विद्वानों ने इमाम हुसैन के भाई व इमाम हुसैन के लश्कर के सिपहसालार हजरत अब्बास अलमदार की शहादत पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि हजरत अब्बास मैदान के करीब बह रही नहर फरात से पानी लेने गये थे। उनके काफिले में छोटे-छोटे बच्चे प्यास से तड़प रहे थे। तब हजरत अब्बास बच्चों की प्यास को देख नहीं पाए। यजीदी लशकर ने जब हजरत अब्बास को पानी लेकर जाते हुए देखा तो हमला कर दिया। हजरत अब्बास के बाजू कलम कर दिए गए। हजरत अब्बास इमाम हुसैन उन हाशमी जवानों में से थे, जिनके नाम से भी यजीदी लश्कर कांपने लगता था। नोहाख्वानी सलीस हैदर काजमी, अनवर अब्बास जैदी, आसिफ रजा, मिर्जा मेहरबान, मिर्जा अयाज, मिर्जा नईम ने की। घरों मे नियाजों का अहतेमाम किया गया। ख्वाजा खुर्शीद अख्तर, प्यारे मियां, आईएम जैदी, रियाज हैदर, मोहम्मद अली हवारी, ताजिम जैदी, अली अथर जैदी मौजूद रहे।