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जेवी जैन कॉलेज से अल्पसंख्यक संस्था का दर्जा निरस्त
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सहारनपुर। जेवी जैन कॉलेज से अल्पसंख्यक संस्था होने का दर्जा वापस ले लिया गया है। अब कॉलेज फिर से सामान्य संस्था बन गया है। इस निर्णय से अल्पसंख्यक संस्था होने के खिलाफ आवाज उठाने वालों में खुशी है। वहीं कॉलेज प्रबंधन में मायूसी की स्थिति है। हालांकि वह भी आयोग के निर्णय का सम्मान करने की बात कह रहे हैं।
विगत 10 जून 2013 को जेवी जैन कॉलेज को अल्पसंख्यक संस्था का दर्जा मिला था। शुरूआत में भी कॉलेज के शिक्षक और छात्र नेता निर्णय के विरोध में उतर आए थे। छात्रों द्वारा प्रदर्शन तक किए गए थे। आरोप यह था कि आयोग को गुमराह कर अल्पसंख्यक संस्था होने का दर्जा लिया गया है। इसके खिलाफ अल्पसंख्यक आयोग में आपत्ति दर्ज कराई गई थी। उसकी पैरवी करने वाले अधिवक्ता सुशील पंवार के अनुसार वर्ष 2016 में आरसी जैन, डॉक्टर अवनीश जैन आदि द्वारा कॉलेज का अल्पसंख्यक संस्था का दर्जा निरस्त करने की मांग को लेकर अल्पसंख्यक आयोग में आपत्ति डाली थी। कुछ समय बाद आरसी जैन ने आपत्ति वापस ले ली। मगर डॉक्टर अवनीश जैन और अन्य लोग लगातार कानूनी लड़ाई लड़ते रहे। उनका दावा है कि उनकी आपत्ति के बाद मामले की सुनवाई करते हुए आयोग ने शुक्रवार को कॉलेज का अल्पसंख्यक संस्था का दर्जा निरस्त कर दिया। उधर, आयोग के निर्णय का लोगों ने स्वागत किया है। पूर्व छात्र नेता सहदेव गुर्जर ने बताया कि उन्होंने शुरू में ही आपत्ति जताई थी, मगर उनकी बात नहीं सुनी गई। आयोग का निर्णय स्वागत योग्य है, जिससे कॉलेज के शिक्षकों के साथ ही छात्रों में भी खुशी है। उधर, प्रबंध समिति सचिव मोहित जैन ने बताया कि कॉलेज से अल्पसंख्यक संस्था का दर्जा वापस लिए जाने की उन्हें जानकारी है, मगर इस मामले में उनकी ओर से डॉक्टर वकुल बंसल बात करेंगे।
छिन जाएंगे प्रबंध समिति के अधिकार
अल्पसंख्यक संस्था होने के बाद तमाम अधिकार कॉलेज प्रबंध समिति के हाथ में होते हैं। जिनमें शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारी नियुक्त करना, दाखिलों में आरक्षण नीति लागू नहीं होती। ऐसे में कॉलेज प्रबंध समिति अपनी नीति बनाती है। प्रबंध समिति को फीस तय करने का अधिकार मिल जाता है। अपने दोषी कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अधिकार भी प्रबंध समिति को रहता है। मगर कॉलेज से अल्पसंख्यक संस्था होने का दर्जा निरस्त होने पर प्रबंध समिति के यह अधिकार भी उसके हाथ में नहीं रह पाएंगे।
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कॉलेज प्रबंध समिति सचिव मोहित जैन के प्रवक्ता डॉक्टर वकुल बंसल ने बताया कि कॉलेज को अल्पसंख्यक संस्था होने का दर्जा दस जून 2013 को मिला था, मगर जैन समाज उस समय अल्पसंख्यक वर्ग का हिस्सा नहीं थे। जैन समाज केंद्र द्वारा 27 जनवरी 2014 में अल्पसंख्यक वर्ग में आए। अल्पसंख्यक आयोग ने इसी आधार पर कॉलेज का अल्पसंख्यक संस्था का दर्जा वापस लिया है। कुछ लोगों द्वारा अल्पसंख्यक संस्था का दर्जा होने के खिलाफ आपत्ति भी आयोग में जताई थी, जिसे आयोग ने काफी समय पहले ही खारिज कर दिया था।
अल्पसंख्यक आयोग द्वारा जेवी जैन कॉलेज से अल्पसंख्यक संस्था होने का दर्जा वापस लेने की मुझे जानकारी नहीं है। अभी में सहारनपुर से बाहर हूं। सहारनपुर पहुंचने पर प्रबंध समिति से जानकारी ली जाएगी। -- डॉक्टर आईसी जैन, अध्यक्ष, जेवी जैन कॉलेज प्रबंध समिति।
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विगत 10 जून 2013 को जेवी जैन कॉलेज को अल्पसंख्यक संस्था का दर्जा मिला था। शुरूआत में भी कॉलेज के शिक्षक और छात्र नेता निर्णय के विरोध में उतर आए थे। छात्रों द्वारा प्रदर्शन तक किए गए थे। आरोप यह था कि आयोग को गुमराह कर अल्पसंख्यक संस्था होने का दर्जा लिया गया है। इसके खिलाफ अल्पसंख्यक आयोग में आपत्ति दर्ज कराई गई थी। उसकी पैरवी करने वाले अधिवक्ता सुशील पंवार के अनुसार वर्ष 2016 में आरसी जैन, डॉक्टर अवनीश जैन आदि द्वारा कॉलेज का अल्पसंख्यक संस्था का दर्जा निरस्त करने की मांग को लेकर अल्पसंख्यक आयोग में आपत्ति डाली थी। कुछ समय बाद आरसी जैन ने आपत्ति वापस ले ली। मगर डॉक्टर अवनीश जैन और अन्य लोग लगातार कानूनी लड़ाई लड़ते रहे। उनका दावा है कि उनकी आपत्ति के बाद मामले की सुनवाई करते हुए आयोग ने शुक्रवार को कॉलेज का अल्पसंख्यक संस्था का दर्जा निरस्त कर दिया। उधर, आयोग के निर्णय का लोगों ने स्वागत किया है। पूर्व छात्र नेता सहदेव गुर्जर ने बताया कि उन्होंने शुरू में ही आपत्ति जताई थी, मगर उनकी बात नहीं सुनी गई। आयोग का निर्णय स्वागत योग्य है, जिससे कॉलेज के शिक्षकों के साथ ही छात्रों में भी खुशी है। उधर, प्रबंध समिति सचिव मोहित जैन ने बताया कि कॉलेज से अल्पसंख्यक संस्था का दर्जा वापस लिए जाने की उन्हें जानकारी है, मगर इस मामले में उनकी ओर से डॉक्टर वकुल बंसल बात करेंगे।
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छिन जाएंगे प्रबंध समिति के अधिकार
अल्पसंख्यक संस्था होने के बाद तमाम अधिकार कॉलेज प्रबंध समिति के हाथ में होते हैं। जिनमें शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारी नियुक्त करना, दाखिलों में आरक्षण नीति लागू नहीं होती। ऐसे में कॉलेज प्रबंध समिति अपनी नीति बनाती है। प्रबंध समिति को फीस तय करने का अधिकार मिल जाता है। अपने दोषी कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अधिकार भी प्रबंध समिति को रहता है। मगर कॉलेज से अल्पसंख्यक संस्था होने का दर्जा निरस्त होने पर प्रबंध समिति के यह अधिकार भी उसके हाथ में नहीं रह पाएंगे।
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कॉलेज प्रबंध समिति सचिव मोहित जैन के प्रवक्ता डॉक्टर वकुल बंसल ने बताया कि कॉलेज को अल्पसंख्यक संस्था होने का दर्जा दस जून 2013 को मिला था, मगर जैन समाज उस समय अल्पसंख्यक वर्ग का हिस्सा नहीं थे। जैन समाज केंद्र द्वारा 27 जनवरी 2014 में अल्पसंख्यक वर्ग में आए। अल्पसंख्यक आयोग ने इसी आधार पर कॉलेज का अल्पसंख्यक संस्था का दर्जा वापस लिया है। कुछ लोगों द्वारा अल्पसंख्यक संस्था का दर्जा होने के खिलाफ आपत्ति भी आयोग में जताई थी, जिसे आयोग ने काफी समय पहले ही खारिज कर दिया था।
अल्पसंख्यक आयोग द्वारा जेवी जैन कॉलेज से अल्पसंख्यक संस्था होने का दर्जा वापस लेने की मुझे जानकारी नहीं है। अभी में सहारनपुर से बाहर हूं। सहारनपुर पहुंचने पर प्रबंध समिति से जानकारी ली जाएगी। -- डॉक्टर आईसी जैन, अध्यक्ष, जेवी जैन कॉलेज प्रबंध समिति।