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स्थानीय लोगों की मदद से आतंकी करते हैं हमला
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सहारनपुर। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकी हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ जवानों के मामले में पूर्व सैनिकों ने अपना अनुभव साझा किया। उनका कहना है कि आतंकी इस तरह की घटना को स्थानीय लोगों की मदद से अंजाम देते हैं। तंग इलाके का चयन करने के बाद ही हमला किया जाता है। ताकि हमले के दौरान सैनिक कुछ समझ न पाएं और वह घेरकर उनको मार दें। सेना के काफिले के आवागमन से पहले रोड ओपनिंग पार्टी रास्ता सुरक्षित और साफ होने की रिपोर्ट देती है। ऐसे में अचानक हमला होने की मुख्य वजह स्थानीय लोगों की आतंकियों के साथ संलिप्तता रहती है।
जम्मू-कश्मीर में तैनात रह चुके पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल व जिला सैनिक कल्याण बोर्ड अध्यक्ष मोहर सिंह का कहना है मुखबिरी के बाद ही ऐसी घटना को अंजाम दिया जाता है। सेना के काफिले के आवागमन से पहले मार्ग को आरओपी टीम सर्च करती है। इसके बाद ही काफिला निकलता है। आतंकी ऐसी जगह का चयन करते हैं, जहां एक तरफ पहाड़ हो और दूसरी तरफ खाई। इस घटना में भी ऐसी जगह पर हमला किया गया। मार्ग क्लियर होने के बाद अचानक आतंकियों की गाड़ी सीआरपीएफ के काफिले से टकराई और धमाका हुआ। इसके बाद आतंकियों ने पहाड़ पर बैठकर जवानों पर गोलियां चला दीं। काफिले से आगे क्विक रिएक्शन टीम चलती है। साफ है कि टीम के निकलने के बाद ही आतंकियों की गाड़ी काफिले के पास स्थानीय लोगों की मदद के लिए पहुंची है।
दिल्ली रोड निवासी पूर्व कर्नल मधुर गोयल का कहना है कि वह जम्मू-कश्मीर में तैनात रहे हैं। वहां की परिस्थितियां अलग हैं। इन दिनों बर्फबारी भी हुई है। इसी वजह से आतंकियों ने आसानी से सीआरपीएफ के जवानों पर हमला कर दिया। स्थानीय लोगों की मदद से हमले के लिए आतंकी तंग इलाके चिह्नित करते हैं।
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जम्मू-कश्मीर में तैनात रहे नकुड़ निवासी पूर्व कैप्टन जसबीर सिंह का कहना है कि कहीं न कहीं चूक हुई है। आतंकियों ने पूरी प्लानिंग के साथ जवानों को निशाना बना लिया। सेना की मूवमेंट से पहले हर 15 मिनट पर आरओपी (रोड ओपनिंग पार्टी) टीम चेकिंग करती है। ऐसे में अचानक हमला किया जाने के पीछे साफ है कि किसी न किसी स्थानीय व्यक्ति ने आतंकियों को फीडबैक दिया। उनका कहना है कि जम्मू-कश्मीर में विषम परिस्थितियां हैं। बिना किसी मदद से आतंकी हमला नहीं कर सकते हैं। इस तरह की घटना पहली बार देखने को मिली है, जब आतंकियों की गाड़ी सीआरपीएफ जवानों के काफिले से टकराई। जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर सीआरपीएफ के काफिले के दौरान अचानक बीच में आतंकियों की गाड़ी आ जाना चूक है। दुश्मन भारतीय सेना का सामने से मुकाबला नहीं कर सकता। पूर्व कैप्टन रामनिवास तिवारी का कहना है कि चेकिंग के बाद ही काफिला निकलता है। सेना के काफिले पर हमला करना इतना आसान नहीं है। आतंकी स्थानीय लोगों की मदद से ऐसी घटना को अंजाम देते हैं। आरओपी रास्ता साफ होने की रिपोर्ट दे चुकी थी। इससे साफ पूरी तैयारी और स्थानीय लोगों की मदद से घटना को अंजाम दिया गया है।
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जम्मू-कश्मीर में तैनात रह चुके पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल व जिला सैनिक कल्याण बोर्ड अध्यक्ष मोहर सिंह का कहना है मुखबिरी के बाद ही ऐसी घटना को अंजाम दिया जाता है। सेना के काफिले के आवागमन से पहले मार्ग को आरओपी टीम सर्च करती है। इसके बाद ही काफिला निकलता है। आतंकी ऐसी जगह का चयन करते हैं, जहां एक तरफ पहाड़ हो और दूसरी तरफ खाई। इस घटना में भी ऐसी जगह पर हमला किया गया। मार्ग क्लियर होने के बाद अचानक आतंकियों की गाड़ी सीआरपीएफ के काफिले से टकराई और धमाका हुआ। इसके बाद आतंकियों ने पहाड़ पर बैठकर जवानों पर गोलियां चला दीं। काफिले से आगे क्विक रिएक्शन टीम चलती है। साफ है कि टीम के निकलने के बाद ही आतंकियों की गाड़ी काफिले के पास स्थानीय लोगों की मदद के लिए पहुंची है।
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दिल्ली रोड निवासी पूर्व कर्नल मधुर गोयल का कहना है कि वह जम्मू-कश्मीर में तैनात रहे हैं। वहां की परिस्थितियां अलग हैं। इन दिनों बर्फबारी भी हुई है। इसी वजह से आतंकियों ने आसानी से सीआरपीएफ के जवानों पर हमला कर दिया। स्थानीय लोगों की मदद से हमले के लिए आतंकी तंग इलाके चिह्नित करते हैं।
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जम्मू-कश्मीर में तैनात रहे नकुड़ निवासी पूर्व कैप्टन जसबीर सिंह का कहना है कि कहीं न कहीं चूक हुई है। आतंकियों ने पूरी प्लानिंग के साथ जवानों को निशाना बना लिया। सेना की मूवमेंट से पहले हर 15 मिनट पर आरओपी (रोड ओपनिंग पार्टी) टीम चेकिंग करती है। ऐसे में अचानक हमला किया जाने के पीछे साफ है कि किसी न किसी स्थानीय व्यक्ति ने आतंकियों को फीडबैक दिया। उनका कहना है कि जम्मू-कश्मीर में विषम परिस्थितियां हैं। बिना किसी मदद से आतंकी हमला नहीं कर सकते हैं। इस तरह की घटना पहली बार देखने को मिली है, जब आतंकियों की गाड़ी सीआरपीएफ जवानों के काफिले से टकराई। जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर सीआरपीएफ के काफिले के दौरान अचानक बीच में आतंकियों की गाड़ी आ जाना चूक है। दुश्मन भारतीय सेना का सामने से मुकाबला नहीं कर सकता। पूर्व कैप्टन रामनिवास तिवारी का कहना है कि चेकिंग के बाद ही काफिला निकलता है। सेना के काफिले पर हमला करना इतना आसान नहीं है। आतंकी स्थानीय लोगों की मदद से ऐसी घटना को अंजाम देते हैं। आरओपी रास्ता साफ होने की रिपोर्ट दे चुकी थी। इससे साफ पूरी तैयारी और स्थानीय लोगों की मदद से घटना को अंजाम दिया गया है।