{"_id":"5a42a9374f1c1b001c8bb1f3","slug":"201514318135-saharanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"केंद्र सरकार के संसद में प्रस्तावित बिल पर बोले एआईएमपीएलबी उपाध्यक्ष मौलाना सालिम....","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
केंद्र सरकार के संसद में प्रस्तावित बिल पर बोले एआईएमपीएलबी उपाध्यक्ष मौलाना सालिम....
Updated Wed, 27 Dec 2017 01:25 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देवबंद(सहारनपुर)। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष मौलाना सालिम कासमी ने कहा कि प्रस्तावित तीन तलाक के बिल की ड्राफ्टिंग में की गई भारी खामियों को दूर करने के बाद ही संसद में पेश किया जाए। उनका कहना है कि केंद्र सरकार संविधान के अनुच्छेद 25 के अंतर्गत देश में मुसलमानों को मिले अधिकारों में खुला हस्तक्षेप कर रही है।
दीनी तालीम के दूसरे बड़े मरकज दारुल उलूम वक्फ के सदर मोहतमिम व ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष मौलाना सालिम कासमी ने मंगलवार को तीन तलाक वाले प्रस्तावित बिल की ड्राफ्टिंग में की गई खामियों को गिनाते हुए कहा कि संसद में प्रस्तावित बिल को जब तक मजहबी और शरई ऐतबार से दुरुस्त नहीं कर लिया जाता तब तक उसे संसद में पेश ने किया जाए। इस मांग को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी भेजा है। मौलाना सालिम कासमी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने केवल तीन तलाक को खत्म किया है। जबकि केंद्र सरकार के प्रस्तावित बिल में तलाक-ए-बाइन (तलाक देने से एक सप्ताह पूर्व बीवी को मायके भेजना) भी आ जाती है। जिसे कोर्ट ने गैर कानूनी करार नहीं दिया है। साथ ही कहा कि बिल में बच्चों को तलाकशुदा महिला की कस्टडी में दिए जाने का उसूल भी नहीं रखा गया है तथा कानून में महिलाओं और बच्चों की जिंदगी पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में भी कोई प्रावधान नहीं रखा गया है। मौलाना सालिम ने कहा कि पर्सनल लॉ बोर्ड यह महसूस करता है कि इस कानून से देश के मुसलमानों पर गहरा फर्क पड़ेगा।
विज्ञापन
दीनी तालीम के दूसरे बड़े मरकज दारुल उलूम वक्फ के सदर मोहतमिम व ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष मौलाना सालिम कासमी ने मंगलवार को तीन तलाक वाले प्रस्तावित बिल की ड्राफ्टिंग में की गई खामियों को गिनाते हुए कहा कि संसद में प्रस्तावित बिल को जब तक मजहबी और शरई ऐतबार से दुरुस्त नहीं कर लिया जाता तब तक उसे संसद में पेश ने किया जाए। इस मांग को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी भेजा है। मौलाना सालिम कासमी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने केवल तीन तलाक को खत्म किया है। जबकि केंद्र सरकार के प्रस्तावित बिल में तलाक-ए-बाइन (तलाक देने से एक सप्ताह पूर्व बीवी को मायके भेजना) भी आ जाती है। जिसे कोर्ट ने गैर कानूनी करार नहीं दिया है। साथ ही कहा कि बिल में बच्चों को तलाकशुदा महिला की कस्टडी में दिए जाने का उसूल भी नहीं रखा गया है तथा कानून में महिलाओं और बच्चों की जिंदगी पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में भी कोई प्रावधान नहीं रखा गया है। मौलाना सालिम ने कहा कि पर्सनल लॉ बोर्ड यह महसूस करता है कि इस कानून से देश के मुसलमानों पर गहरा फर्क पड़ेगा।
विज्ञापन