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पैरेंट्स की जेब पर डाका और सरकार से टैक्स की चोरी

Sat, 07 Apr 2018 12:56 AM IST
Updated Sat, 07 Apr 2018 12:56 AM IST
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पैरेंट्स की जेब पर डाका और सरकार से टैक्स की चोरी
पैरेंट्स की जेब पर डाका और सरकार से टैक्स की चोरी
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सहारनपुर। जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) लागू कर सरकार खुद ही अपनी पीठ थपथपा रही है, जबकि हकीकत यह है कि जीएसटी लागू होने के बाद भी दुकानदार टैक्स नहीं चुका रहे हैं। इसका बेहतर उदाहरण इन दिनों दुकानदारों द्वारा पैरेंट्स को बेची जा रही स्टेशनरी का पक्का बिल न देना है। दुकानदार मनमाने दाम वसूल रहे हैं, मगर पक्का बिल देने को कतई राजी नहीं हैं। वह आम आदमी की जेब पर तो डाका डाल ही रहे हैं, साथ ही टैक्स चोरी कर सरकार को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं।
वर्तमान में पब्लिक स्कूलों में दाखिले की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में जाहिर है कि अगली कक्षा के लिए पैरेंट्स बच्चों के लिए यूनिफॉर्म, किताबें, नोटबुक और स्टेशनरी खरीद रहे हैं। पिछले करीब 15 दिन से किताबों और स्टेशनरी की दुकानों पर भीड़ नजर आ रही है। कई जगह पर लाइन लगवाकर किताबें और स्टेशनरी बेची जा रही है। वाणिज्य कर विभाग के अधिकारियों की मानें तो किताबें टैक्स फ्री हैं। यानी उन पर कोई टैक्स लागू नहीं होता है, मगर स्टेशनरी और अन्य सामान पर अलग-अलग टैक्स निर्धारित है। नियमानुसार दुकानदारों को स्टेशनरी का पक्का बिल ग्राहक को देना चाहिए। मगर हैरत की बात यह है कि अनेक दुकानदार स्टेशनरी का पक्का बिल ग्राहकों को नहीं दे रहे हैं। ऐसे में वह मनमाने दाम वसूल कर अपनी जेबें भर रहे हैं। इससे सरकार को खासा नुकसान पहुंच रहा है। कोर्ट रोड के अलावा मटिया महल में भी अनेक दुकानदार ऐसा कर रहे हैं।
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कमीशन बेस पर स्कूलों ने दिया है ठेका
पक्का बिल न देने की एक वजह यह भी है कि अनेक पब्लिक स्कूलों ने दुकानदारों को किताबें और स्टेशनरी बेचने का ठेका दिया हुआ है। सूत्रों ने बताया कि बाहर से किताबों और स्टेशनरी का आयात स्कूल के द्वारा होता है। सिरदर्दी से बचने के लिए अनेक स्कूलों ने कमीशन बेस पर किताबें और स्टेशनरी बेचने का ठेका दुकानदारों को दिया हुआ है। यही वजह है कि दुकानदार पक्का बिल नहीं दे रहे हैं। कई स्कूल अपने यहां से ही किताबें और स्टेशनरी बेच रहे हैं। स्टेशनरी में अलग-अलग आइटम पर 12 से 18 फीसदी तक टैक्स निर्धारित है।
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हम बाजारों में टीमें भेजकर जांच करा रहे हैं। क्योंकि किताबों पर टैक्स नहीं होता। ऐसे में हमारी टीमें स्टेशनरी की बिक्री पर नजर रख रही है। टीमों ने ज्यादातर बड़ी दुकानों पर छापेमारी की है, जहां पक्का बिल दिया जा रहा है। अगर कोई दुकानदार पक्का बिल नहीं दे रहा है तो यह टैक्स चोरी का मामला है। यदि किसी दुकानदार की शिकायत मिलती है तो जांच कराकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
एके पाठक, एडिशनल कमिश्नर, ग्रेड वन, वाणिज्य कर विभाग।
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