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जनता की नौकर है पुलिस - एसएसपी

Sat, 01 Sep 2018 12:20 AM IST
Updated Sat, 01 Sep 2018 12:20 AM IST
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जनता की नौकर है पुलिस - एसएसपी
सहारनपुर। अमर उजाला फाउंडेशन द्वारा आयोजित पुलिस की पाठशाला में एसएसपी उपेंद्र कुमार अग्रवाल ने कहा कि आईपीएस का मतलब है इंडियन पुलिस सर्विस, यानी भारतीय पुलिस सेवा। भारत की पुलिस लोगों की सेवा के लिए है। किसी पर शासन करने के लिए नहीं। एक तरह से पुलिस जनता की नौकर है।
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एसएसपी उपेंद्र कुमार अग्रवाल ने शुक्रवार को एसएएम इंटर कॉलेज में अमर उजाला फाउंडेशन द्वारा आयोजित पुलिस की पाठशाला में छात्रों को यातायात सुरक्षा, साइबर क्राइम और सोशल मीडिया का प्रयोग करते समय बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि पुलिस में भर्ती होने वाले लोग विदेश से नहीं आते हैं। वे आप सबके बीच के ही लोग हैं। उन्होंने कहा कि ट्रैफिक नियमों का पालन करके दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकता है। अधिकांश सड़क दुर्घटनाएं ओवर स्पीड, नशे में वाहन चलाने, अधिक सवारी होने एवं नियमों की अनदेखी करने की वजह से हो रही है। ट्रैफिक पुलिस भी अपने स्तर से वाहन चालकों को जागरूक कर रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस नहीं होगी तो व्यवस्था बिगड़ जाएगी। अपराधी निरंकुश हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि गलत कार्य करने वाले ही पुलिस से डरते हैं। सही कार्य करने वाले पुलिस से नहीं डरते।
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पुलिस की पाठशाला का संचालन डा. सादाराम ने किया। कालेज के प्रधानाचार्य मनोज काकरान, एनएनसीसी अधिकारी बृजेश पुंडीर, रामवीर सिंह, कुलदीप कुमार, फरहत मियां, सुधीर शर्मा आदि रहे। 83 यूपी बटालियन के एनसीसी कैडेट्स ने व्यवस्था संभाली।
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- अच्छा नागरिक बनने के लिए शिक्षा जरूरी
एसएसपी उपेंद्र कुमार अग्रवाल ने कहा कि शिक्षा प्रत्येक व्यक्ति का अधिकार है। सिर्फ नौकरी और व्यवसाय के लिए ही शिक्षा जरूरी नहीं। अच्छा नागरिक बनने के लिए शिक्षा जरूरी है। नागरिक शिक्षित और मेहनती होंगे तो समाज और देश का भविष्य उज्जवल रहेगा।
- सुविधा से नहीं लगन और मेहनत से मिलती है सफलता
एसएसपी उपेंद्र कुमार अग्रवाल ने कहा कि सुविधाएं जरूरी हैं। लेकिन सिर्फ सुविधाओं से नहीं इच्छाशक्ति, लगन और मेहनत से ही सफलता हासिल होती है। उन्होंने बताया कि उन्होंने एक छोटे से गांव के सरकारी स्कूल से शिक्षा शुरू की। टाट-पट्टी लेकर स्कूल जाते थे। उनके पास न लाइब्रेरी थी और न ही बैठने के लिए सीट-बेंच थीं।
- लापरवाही बन रही दुर्घटनाओं का कारण : एसपी ट्रैफिक
युवा दोपहिया एवं चार पहिया वाहन चलाते समय नियमों का पालन करें। सिर्फ लापरवाही से दुर्घटनाएं हो रहीं हैं। गति पर नियंत्रण रखें, हेलमेट और सीट बेल्ट का प्रयोग करें। दुपहिया वाहनों पर दो से अधिक सवारी न बैठाएं। यातायात के नियमों का पालन पुलिस जबरन करा रही है। वाहन चालकों को समझना चाहिए कि उनका कोई घर पर इंतजार भी कर रहा है। जरा सी असावधानी, दुर्घटना बन सकती है। अपनी भी सुरक्षा करें, दूसरों को भी सुरक्षित रखें।
- विनीत भटनागर, एसपी यातायात
- जुर्माना सिर्फ सीख देने के लिए
यातायात के नियम किसी और की नहीं सिर्फ अपनी सुरक्षा के लिए पालन करें। छात्र अपने अभिभावकों, अपने परिचितों को जागरूक करें कि उनकी सुरक्षा कितनी जरूरी है। कोई भी नियम तोड़ता है तो उस पर जुर्माना लगाकर चालान काटा जाता है। गैर जिम्मेदराना तरीके से वाहन चलाने पर अथवा वाहन नियमित न होने पर सीज भी किया जाता है। लेकिन यह पुलिस किसी को परेशान करने के लिए नहीं बल्कि जागरूक करने के लिए और सीख देने के लिए ही करती है।
- तेज प्रताप सिंह, यातायात उपनिरीक्षक
- अनुशासन छात्रों के लिए जरूरी
पुलिस ने छात्रों को नियमों और कानूनों की जानकारी दी है। स्कूलों द्वारा भी छात्रों को नियमों का पाठ पढ़ाया जाता है। अनुशासन सिखाया जाता है। अनुशासन ही नियम पालन करने की पहली सीढ़ी है।
- मनोज काकरान, प्रधानाचार्य, एसएएम इंटर कॉलेज
- पुलिस की पाठशाला : छात्रों के सवाल, एसएसपी के जवाब
सहारनपुर। अमर उजाला फाउंडेशन द्वारा एसएएम इंटर कॉलेज में आयोजित पुलिस की पाठशाला में छात्रों ने बेबाक होकर एसएसपी उपेंद्र कुमार अग्रवाल से सवाल किए। एसएसपी ने छात्रों के सवालों के तब तक जवाब दिए, जब तक छात्र संतुष्ट नहीं हो गए। उनकी सुुरक्षा से लेकर उनके करियर बनाने तक की जिज्ञासा को शांत किया।
सवाल - पुलिस की न दोस्ती अच्छी, न दुश्मनी, लोग ऐसा क्यों बोलते हैं।
जवाब - ऐसा लोग कहते हैं, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। जो पुलिस में भर्ती होने के लिए आते हैं, वे समाज के बीच से ही आते हैं। साथ पढ़े हुए होते हैं। सामाजिक रहने वाले व्यक्ति को वास्तविक स्थिति की जानकारी होती है। और गलत कार्य करने पर चाहे वह दोस्त हो या फिर अनजान हो, न्याय की बात की जाती है। इसलिए कई बार ऐसा लगता है कि दोस्त होते हुए भी पुलिस ने उसके साथ ऐसा कर दिया। कुछ लोग मानते हैं कि किसी पुलिसकर्मी से दुश्मनी हो गई तो जरा सी गलती पर वह बख्शेगा नहीं। लेकिन ऐसा होता नहीं है।
सवाल - ट्रैफिक पुलिस के पकड़ने पर नेताओं के फोन पर क्यों छोड़ते हैं ?
जवाब - सभी को अपने लिए हर संभव प्रयास करने का पूरा अधिकार है। किसी पुलिस अधिकारी से, किसी मिलने वाले से या फिर किसी नेता से सिफारिश कराकर बचने का प्रयास किया जाता है। यह प्रयास लोगों को नजर आता है। लेकिन छोड़ दिया जाए, यह बहुत कम ही होता है। नियम तोड़ने वाले को पुलिस छोड़ती नहीं है।
सवाल - पुलिस उप निरीक्षक कैसे बन सकते हैं।
जवाब - इसके लिए कम से कम स्नातक की शिक्षा जरूरी है। भर्ती फार्म समय-समय पर निकलते हैं। प्रशिक्षण होता है और नियमों, कानूनों की जानकारी दी जाती है। कर्तव्यनिष्ठा और ईमानदारी का संकल्प दिलाया जाता है।
सवाल - पुलिस पर सबसे अधिक भ्रष्टता के आरोप क्यों लगते हैं ?
जवाब - पुलिस सीधे तौर पर जनता से जुड़ी है, जबकि अन्य विभाग सीधे तौर पर जनता से सीधे संपर्क में नहीं है। किसी भी विभाग को कार्य कराने के लिए सरकार से धन मिलता है। जनता की जेब से पैसा नहीं जाता। जिस कारण जनता को भ्रष्टाचार का इतना अहसास नहीं होता, क्योंकि उसकी जेब से तो सीधे तौर पर कोई पैसा नहीं जाता है। दो पक्ष अपना विवाद लेकर पुलिस के पास आते हैं। पुलिस की जांच में जो भी गलत होता है, वही पुलिस पर भ्रष्ट होने का आरोप लगा देता हैै।


वो तो बच्चों के बीच जाकर उन्हें जागरूक करना चाहते थे। अमर उजाला ने पुलिस पाठशाला के माध्यम से उन्हें बच्चों से जोड़ने का अवसर दिया। भविष्य में ट्रैफिक पुलिस के माध्यम से भी स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
- उपेंद्र अग्रवाल, एसएसपी।
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