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बुराइयों को त्यागकर अल्लाह के बताए रास्ते पर चलें : मुफ्ती मुजम्मिल
Updated Tue, 01 May 2018 12:36 AM IST
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देवबंद (सहारनपुर)। दारुल उलूम के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना मुफ्ती मुजम्मिल कासमी ने कहा कि सभी लोगों को चाहिए कि वह बुराइयों को त्यागकर अल्लाह के बताए रास्ते पर चलकर अपनी जिंदगी गुजारें। क्योंकि समाज में फैली बुराइयां अल्लाह के गुस्से का सबब बनती हैं।
मोहल्ला रेती चौक स्थित मदरसा रियाजुल उलूम में सोमवार को आयोजित दस्तारबंदी कार्यक्रम में मौलाना मुजम्मिल कासमी ने कहा कि अगर दुनिया और आखिरत में कामयाबी हासिल करनी है तो अल्लाह व उसके रसूल के बताए रास्ते पर चलना होगा। उन्होंने कहा कि हमें जागना चाहिए ताकि सांप्रदायिक ताकतों का अच्छे अखलाक से मुकाबला किया जा सके। दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर ने कुरआन करीम की अजमत पर रोशनी डालते हुए कहा कि कुरआन करीम अल्लाह का कलाम है जो लोग इसे अपने सीनों में महफूज करते हैं वह दुनिया में भी इज्जत पाते हैं और आखिरत में भी उनका अलग ही स्थान होगा। उन्होंने सभी से अपने बच्चों को कुरआन करीम की तालीम अवश्य दिलाने का आहवान किया। कार्यक्रम में कुरआन करीम हिफ्ज करने वाले पांच बच्चों की दस्तारबंदी की गई साथ ही पुरस्कारों का वितरण भी किया गया। इस मौके पर जमालुद्दीन अंसारी, मुफ्ती अखलाक, मौलाना नदीमुलवाजदी, सदरुद्दीन अंसारी, डा. डीके जैन, अब्दुल कादिर, मौलाना महमूद, हाजी तालिब, शहजाद, हाजी यासीन आदि मौजूद रहे।
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मोहल्ला रेती चौक स्थित मदरसा रियाजुल उलूम में सोमवार को आयोजित दस्तारबंदी कार्यक्रम में मौलाना मुजम्मिल कासमी ने कहा कि अगर दुनिया और आखिरत में कामयाबी हासिल करनी है तो अल्लाह व उसके रसूल के बताए रास्ते पर चलना होगा। उन्होंने कहा कि हमें जागना चाहिए ताकि सांप्रदायिक ताकतों का अच्छे अखलाक से मुकाबला किया जा सके। दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर ने कुरआन करीम की अजमत पर रोशनी डालते हुए कहा कि कुरआन करीम अल्लाह का कलाम है जो लोग इसे अपने सीनों में महफूज करते हैं वह दुनिया में भी इज्जत पाते हैं और आखिरत में भी उनका अलग ही स्थान होगा। उन्होंने सभी से अपने बच्चों को कुरआन करीम की तालीम अवश्य दिलाने का आहवान किया। कार्यक्रम में कुरआन करीम हिफ्ज करने वाले पांच बच्चों की दस्तारबंदी की गई साथ ही पुरस्कारों का वितरण भी किया गया। इस मौके पर जमालुद्दीन अंसारी, मुफ्ती अखलाक, मौलाना नदीमुलवाजदी, सदरुद्दीन अंसारी, डा. डीके जैन, अब्दुल कादिर, मौलाना महमूद, हाजी तालिब, शहजाद, हाजी यासीन आदि मौजूद रहे।
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